ज्वार (Broom corn)
ज्वार एक प्रमुख फसल है। ज्वार कम वर्षा वाले क्षेत्र में अनाज तथा चारा दोनों के लिए बोई जाती हैं। ज्वार जानवरों का महत्वपूर्ण एवं पौष्टिक चारा हैं। यह खरीफ की मुख्य फसलों में है। यह एक प्रकार की घास है जिसकी बाली के दाने मोटे अनाजों में गिने जाते हैं। ज्वार एक पोषक तत्व है। ज्वार में मिनरल, प्रोटीन, और विटमिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे कई पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इसके अलावा ज्वार में काफी मात्रा में पोटेशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम और आयरन भी होता है। ज्वार काफी कम कैलोरी में अधिक पोषण देता है। लोग ज्वार का प्रयोग अनाज के रूप में करते हैं।
ज्वार का उपयोग
- ज्वार के रस को ललाट पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलता है।
- ज्वार के आटे को काजल की तरह आँखों में लगाने से आँख के रोगों में लाभ होता है।
- ज्वार के रस को गुनगुना करके 1-2 बूंद कान में डालने से बहते कान की बीमारी में लाभ होता है।
- ज्वार के बीजों को जलाकर उनकी राख से दांतों को मलें। इससे दांतों का हिलना, मसूड़ों से खून निकलना तथा मुख के बदबू आने की समस्या ठीक होती है।
- ज्वार के भुने हुए फलों को गुड़ के साथ खाने से खाँसी में लाभ होता है।
- ज्वार के बीजों का सेवन करने से कब्ज, एसिडिटी तथा अन्य पाचन-सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है।
- ज्वार के दानों को उबाल लें। इसका रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में एरण्ड तेल मिला लें। इसका लेप करने से लकवा में लाभ होता है।
- ज्वार के आटे की रोटी बना लें। रोटी को ठण्डा करके दही में डालकर खाने से पेचिश में लाभ होता है।
- ज्वार के भुने हुए फल तथा तने के रस का सेवन करने से खूनी तथा बादी बवासीर में लाभ होता है।
- ज्वार के तने का रस 5 मिली सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। ज्वार के भुट्टे को आग में भूनकर खाने से पीलिया, गोनोरिया, ल्यूकोरिया आदि में लाभ होता है।
- ज्वार के भुने हुए फलों को गुड़ के साथ खाने से साँस फूलना तथा सांस की नली की सूजन आदि रोगों में लाभ होता है।
- ज्वार का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से किडनी के रोग ठीक होते हैं।
- 5-10 मिली ज्वार के तने के रस को पीने से किडनी के रोगों तथा गोनोरिया, पेशाब करने में दिक्कत जैसी परेशानी आदि में लाभ होता है। इससे घाव सुखता है।
- प्रदर रोग के दौरान ज्वार के भुने भुट्टों का सेवन करना चाहिए।
- ज्वार के दानों को उबाल लें। इसका रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में एरण्ड तेल मिला लें। इसका लेप करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
- ज्वार के हरे पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से त्वचा के रोगों में अत्यन्त लाभ होता है। ज्वार के तने की गांठों को पीसकर उसमें एरण्ड का तेल मिलाकर लगाने से खुजली मिटती है।
- ज्वार को पीसकर उसमें थोड़ा कत्था मिलाकर चेहरे पर लगाने से मुँहासे दूर हो जाते हैं।
- ज्वार के आटे से बने पदार्थों का सेवन करने से मोटापा घटता है।
- ज्वार के आटे की रोटी बनाकर रात में रख दें। सुबह उसमें थोड़ा सा भुना हुआ सफेद जीरा तथा छाछ मिलाकर खाने से जलन मिटती है।
- ज्वार के रस में चीनी तथा बराबर मात्रा में दूध मिला लें। इसे 20 मि.ली. मात्रा में सुबह, दोपहर तथा शाम पिलाने से धतूरे के विष का असर खत्म हो जाता है।

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