पुत्रजीवक (Child life tree)

     पुत्रजीवक एक औषधि है जिसका सेवन संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। संतान की प्राप्ति के लिए महिलाएं रूद्राक्ष की तरह इसके बीजों की माला गले में धारण करती हैं। इसके बीजों को धागे में गूथकर पुत्र प्राप्ति के लिए स्त्रियां गले में पहनती हैं। बच्चों के गले में भी पहनाती हैं जिससे वे स्वस्थ बने रहें। इसके बीज, पत्ते या जड़ को दूध के साथ सेवन करने से कमजोर गर्भाश्य को मजबूती मिलती है और महिला को पुत्र की प्राप्ति होती है। इसे भारत में पुत्र प्राप्ति के आयुर्वेदिक मेडिसिन या पुत्र प्राप्ति की दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। प्राचीन युग से पुत्रजीवक का प्रयोग आयुर्वेद में प्रजनन संबंधी रोगों के लिए औषधि के रूप में किया जाता रहा है। पितौजिया मधुर, कड़वा, रूखा और ठंडे तासीर का होता है। यह कफवात दूर करने में भी मदद करता है। पुत्रजीवक का पेड़ 12-15 मी ऊँचा, छोटे से मध्यम आकार का सदाहरित वृक्ष होता है। इसके फल गोल-नुकीले, अण्डाकार होते हैं। बीज बेर की गुठली के जैसे कड़े, झुर्रीदार तथा 5 मिमी व्यास (डाइमीटर) के होते हैं। इसके फल वेदनाशामक होते हैं। इसके बीज के सेवन से कमजोरी और सूजन कम होने के साथ-साथ शरीर के मल-मूत्र निकालने में भी मदद करते हैं। यहां तक कि पुत्रजीवक के पत्ते काम शक्ति बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

पुत्रजीवक बीज के उपयोग 

  1. पुत्रजीवक फल के रस को पीसकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द कम होता है।
  2. पुत्रजीवक के रस को थोड़ा गर्म करके (5 मिली) में हींग डालकर पीने से छाती की जकड़न दूर होती है। इससे छाती से कफ निकल जाता है और राहत मिलती है।
  3. पुत्रजीवक के पत्ते एवं बीज का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से प्रतिश्याय (Coryza)या तृष्णा (प्यास) में लाभ होता है।
  4. 5-10 मिली पुत्रजीवक के रस का सेवन करने से हाथी पांव रोग के परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।
  5. पुत्रजीवक फल मज्जा को पीसकर लेप करने से दर्द वाला फोड़ा-फून्सी कम होता है। इसके अलावा पुत्रजीवक की छाल को पीसकर लेप करने से फोड़े-फून्सी मिटते हैं।
  6. 10-20 मिली पुत्रजीवक पत्ते के काढ़े का सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है।
  7. 1-2 ग्राम पुत्रजीवक फल मज्जा को नींबू के रस में पीसकर पीने से विष के असर करने का गति कम होता है। 


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