गुलदाउदी (Chrysanthemum)

     गुलदाउदी एक मौसमी सजावटी फूलों का पौधा है। इसकी लगभग 30 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। मुख्यतः यह एशिया और पूर्वोत्तर यूरोप मे पाया जाता है। जापान में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है एवं इसे वहां के राष्ट्रीय पुष्प का दर्जा प्राप्त है। पिछले वर्ष इस्रायल सरकार ने गुलदाउदी फूल को नरेंद्र मोदी के सम्मान में मोदी फूल नाम दिया है। गुलदाउदी के फूल अनेक रंगों के और बहुत ही मनमोहक होते हैं। गुलदाउदी का पौधा लोग अक्सर अपने बागीचों में या गमलों में इसे लगाते हैं। सच बात तो यह है कि गुलदाउदी केवल शोभा बढ़ाने वाला फूल नहीं हैं बल्कि गुलदाउदी का इस्तेमाल औषधीय कार्यों के लिए भी किया जाता है। गुलदाऊदी काफी पौष्टिक और हृदय के लिए लाभकारी होती है। यह वीर्यवर्धक, शरीर की चमक बढ़ाने वाली, वात तथा पित्त को शान्त करने वाली तथा जलन को समाप्त करने वाली होती है। इसकी जड़ को चबाने से अकरकरा की जड़ के समान मुंह में चरमराहट उत्पन्न होती है। इसके फूल भोजन को पचाने वाले, हृदय को स्वस्थ रखने वाले तथा रक्त का प्रवाह ठीक करने वाले होते हैं। छोटे तथा सफेद अथवा पीले रंग के फूल वाली गुलदाउदी औषधि के लिए अधिक गुणकारी है। इस पर फूल और फल लगने का समय सितम्बर से फरवरी तक होता है। इसके फूलों और पत्तियों को सुखाकर रख लें और जरूरत पड़ने पर इन्हें पानी में उबालकर चाय के समान पिएं। 

गुलदाऊदी का उपयोग

  1. गुलदाऊदी के पत्तों को पीसकर मस्तक पर लगाने से आधासीसी के दर्द से आप छुटकारा पा सकते हैं।
  2. गुलदाऊदी के फूलों को पीसकर आँख के बाहर चारों तरफ लगाएं। इससे आँखों की जलन, दर्द और खुजली आदि आँख की समस्याएं ठीक होती हैं।
  3. इसके फूलों का हल्का काढ़ा बनाकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आँख के रोग ठीक होते हैं।
  4. गुलदाऊदी के फूलों का काढ़ा बनाकर 20 मि.ली. मात्रा में सुबह और शाम पीने से गैस के कारण होने वाले पेट के दर्द में लाभ होता है।
  5. गुलदाउदी के पत्तों के 10-20 मि.ली. काढ़े में 20 ग्राम चीनी मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है।
  6. गुलदाऊदी के 8-10 पत्तों को 2 नग काली मिर्च के साथ पीस लें। इसे दिन में दो-तीन बार पिलाने से पेशाब खुल कर आने लगता है और पेशाब की जलन आदि समस्याओं में लाभ होता है।
  7. गुलदाउदी के सूखे फूलों को पीस लें। इसे रोग की गंभीरता के अनुसार 1-6 ग्राम की मात्रा में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर खाएं। इससे गुर्दे की पथरी टूटकर पेशाब के रास्ते से निकल जाती है।
  8. गुलदाऊदी के 30 ग्राम फूलों को 400 मि.ली. पानी में पकाएं। जब यह एक चौथाई बचे तो इसका काढ़ा बना लें। इसे सुबह और शाम पीने से पथरी चूर-चूर होकर निकल जाती है।
  9. गुलदाउदी के 10-20 ग्राम फूलों को 240 मिली पानी में पकाएं। जब यह एक चौथाई शेष बचे तो काढ़ा बनाकर रोजाना सुबह और शाम पीने से मासिक धर्म की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
  10. गुलदाऊदी की जड़ को पीसकर उसमें काली मिर्च मिला लें। इसे पिलाने से उपदंश यानी सिफलिस रोग की शुरुआती अवस्था में लाभ होता है।
  11. गुलदाउदी की जड़ को पीसकर उसकी पुल्टिस (गिली पट्टी) बनाकर बांधने से उपदंश की कच्ची गांठे बिखर जाती हैं और पकने वाली गांठें जल्दी पक जाती हैं।
  12. गुलदाऊदी फूल के रस को लगाने से रोमकूप (बालों की जड़) की सूजन ठीक होती है।
  13. 10 ग्राम गुलदाऊदी के फूल, तीन ग्राम सोंठ और एक ग्राम सफेद जीरा लें। तीनों को पीसकर लेप करने से कफ की वजह से होने वाली सूजन ठीक होती है।
  14. कटे -जले में गुलदाऊदी के पत्तो को पीसकर लगाने से फायदा होता है। 

  • गुलदाऊदी के प्रयोग अधिक मात्रा में करने से दस्त जैसी समस्या हो सकती है।

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