जयंती (Common sesban)

     जयंती एक अद्भुत वनस्पति है। जयंती दलहन प्रजाति का एक बहुउपयोगी पौधा है जो हमें भोजन, दवा और ईंधन तीनों उपलब्ध कराता है। हालांकि इसके बीज जहरीले होते हैं, परंतु इसे तीन दिनों तक पानी में भिगोने से इसका जहरीला प्रभाव जाता रहता है और तब इसे खाया जाता है। स्वाद में कड़वा तथा तीखा, पेट के लिए गरम और जल्द पचने वाली वनस्पति है। जयंती कफ तथा पित को शान्त करती है। आयुर्वेद की संहिताओं में जयंती के पत्तों के रस के प्रयोग का विशेष वर्णन प्राप्त होता है। पीले/सफेद, लाल और काले फूलों के आधार पर इसकी तीन प्रजातियां होती हैं। पीले फूलों वाली जंयती सभी जगह पाई जाती है, परन्तु सफेद फूलों वाली जयंती दुर्लभ होती है। सफेद जयंती के जड़ का प्रयोग कुष्ठ आदि त्वचा विकारों में अत्यन्त लाभकारी होता है।

जयंती का उपयोग

  1. जयंती के पत्तों को पीसकर सिर में लगाने से या जयंती के पत्तों का काढा.बनाकर सिर को धोने से बालों का झड़ना बंद होता है और गंजापन भी दूर होता है।
  2. 1-2 ग्राम जयन्ती के बीज का चूर्ण तथा 5 मिली जयन्ती की छाल के रस का सेवन करने से पेचिश तथा पाचन की समस्याओं में लाभ होता है।
  3. जयंती के पत्तों का स्वरस 5-10 मिली की मात्रा में पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  4. जयंती के बीज तथा छाल को पीसकर पेट पर लेप करने से बढ़ी हुई प्लीहा (तिल्ली) सामान्य हो जाती है।
  5. जयंती के पत्तों को पीसकर अण्डकोषों पर लगाने से अण्डकोषों की सूजन मिटती है।
  6. सर्दी-जुकाम एक आम बीमारी है जो मौसम के बदलने या फिर प्रदूषण के कारण अक्सर हो जाया करती है। जयन्ती के फूलों का चूर्ण बनाकर 1-2 ग्राम मात्रा में सेवन करने से जुकाम में लाभ होता है।
  7. जयंती के फूलों को तिल के तेल में पकाकर, छानकर, उस तेल को छाती और मस्तक पर लगाने से जुकाम तथा उसके कारण होने वाले सिरदर्द दोनों ठीक होते हैं।
  8. जयन्ती के पत्तों का काढा.बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से गले का बैठना जुकाम, बार-बार पेशाब आना आदि रोगों में लाभ होता है।
  9. जयन्ती के पत्ते का काढ़े को आटे में मिलाकर उसकी रोटी बनाकर सेवन करने से जमा हुआ कफ निकल जाता है।
  10. मासिक धर्म अनियमित हो या स्राव कम हो रहा हो या मासिक धर्म के दौरान पेट दर्द हो रहा हो, जयन्ती का बीज सारी समस्याओं को दूर करता है। जयन्ती के बीज का 1-2 ग्राम चूर्ण का सेवन करने से ऐसे सभी मासिक-विकारों में लाभ होता है।
  11. जयन्ती के पत्तों को पीसकर घुटने आदि जोड़ों में लगाने से जोड़ों की सूजन तथा दर्द दोनों में ही आराम मिलता है।
  12. चर्म रोगों में जयंती काफी लाभकारी है। जयंती के बीज के रस को लगाने से खुजली तथा अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं।
  13. जयंती के पत्तों तथा बीजों को पीसकर लगाने से खुजली मिटती है।
  14. जयन्ती के बीज के चूर्ण को आटे में मिलाकर उबटन करने से खुजली दूर होती है।
  15. जयंती की छाल के 5 मिली रस में शहद मिलाकर पीने से चर्म रोगों में लाभ होता है।
  16. जयन्ती के बीजों में चक्रमर्द (पवांड) के बीज मिलाकर, दोनों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा के रोग ठीक होते हैं।
  17. जयंती की जड़ को एक ग्राम की मात्रा में दूध के साथ पीसकर सेवन करने से सफेद दाग मिटते हैं।
  18. जयन्ती के बीजों को गाय के घी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुंसियों आदि विकारों में लाभ होता है।
  19. त्वचा के विकारों के कारण होने वाले फोड़ों को जल्दी पकाने के लिए जयन्ती के पत्तों की पुल्टिस बांधनी चाहिए।
  20. जयंती के पत्तों से बनी पुल्टिस बांधने तथा जयंती की छाल के स्वरस को फोड़ों तथा सूजन में लगाने से लाभ होता है।
  21. जयंती के बीज के चूर्ण तथा पत्तों के चूर्ण को मिलाकर घाव पर लगाने से घाव से बहने वाला रक्त बंद हो जाता है।
  22. जयंती के पत्तों को हल्दी तथा लहसुन के साथ पीसकर सूजन वाली स्थान पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।
  23. जयंती की जड़ के चूर्ण को बिच्छु के काटे हुए स्थान पर लगाएं। इससे बिच्छू के काटने से होने वाले दर्द, जलन आदि समाप्त होते हैं।

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