गंभारी (Coomb teak)

     गंभारी एक बहुत ही गुणी औषधि है। गंभारी के वृक्ष भारत के लगभग सभी प्रान्तों में मिलते हैं। ये विशेष रूप से पर्वतीय प्रदेशों में जैसे- हिमालय क्षेत्र, मध्यप्रदेश, नीलगिरी तथा पूर्वी और पश्चिमी घाटों में पाये जाते हैं। बहुत सालों से आयुर्वेदिक चिकित्सक गंभारी का उपयोग कर लोगों को स्वस्थ करने का काम कर रहे हैं। गम्भारी का उल्लेख आयुर्वेद में विभिन्न स्थानों में मिलता है। गंभारी के पत्तों में मधु जैसा मीठा रस होता है। इस कारण इसे मधुपर्णिका भी कहते हैं। पत्ते सुन्दर होने के कारण इसे श्रीपर्णी कहा जाता है। इसके फूल पीले होते हैं। इस कारण इसे पीतरोहिणी नाम से भी जाना जाता है। गंभारी तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।  गंभारी की दो प्रजातियां होती है। गम्भारी और पानीय गम्भार

गंभारी के उपयोग

  1. गंभारी की पत्तियों को पीसकर सिर पर लेप करने से बुखार के कारण होने वाला सिरदर्द तो दूर होता ही है, साथ ही जलन और सिर का भारीपन से भी छुटकारा मिलता है।
  2. गंभारी के तेल की 1 से 2 बूँद नाक में डालते रहने से बालों का पकाना रुक जाता है।
  3. गंभारी काढ़ा की 10 से 30 मिली लीटर की मात्रा नियमित रूप से पीने से फेफड़ों की समस्याएं ठीक होती हैंं।
  4. गम्भारी के ताजे फलों को कूटकर उसका रस निकाल लें। दिन में 3-4 बार इस रस का 1-1 चम्मच सेवन करें। कुछ दिन तक लगातार पीने से तो खूनी दस्त या पेचिश रुक जाती है।
  5. गंभारी के फलों से रस बनाकर, इसमें अनार का रस तथा शक्कर मिलाकर पीने से खूनी दस्त तथा पेचिश में लाभ होता है।
  6. 3 ग्राम जड़ की चूर्ण को सुबह-शाम सेवन करने से पाचन ठीक हो जाता है।
  7. गंभारी की जड़ का 40 मिली काढ़ा बना लें। इसे सुबह शाम सेवन करने से यह पेट की बीमारी में फायदा मिलता है।
  8. यदि आपको बहुत अधिक प्यास ज्यादा लग रही हो तो गम्भारी के 20 से 40 मिली काढ़ा में शक्कर मिलाकर पीने से प्यास कम होने लगती है।
  9. काढ़ा न हो तो इसके 5 से 10 मिली रस का सेवन शक्कर के साथ करने से भी यह लाभ होता है। 
  10. गम्भारी की छाल, आँवला का फल तथा लाल कचनार बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा से बने खड्यूष में अनार, इमली आदि फलों के रस को मिलाकर सेवन करने से खून का थक्का बनने लगता है।
  11. 2 किलोग्राम गंभारी छाल को कूटकर 16 लीटर जल में मिलाकर उबालें। एक चौथाई बचने तक उबाल कर काढ़ा बना लें। 250 ग्राम छाल को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट और काढ़ा में 1 लीटर तिल का तेल मिलाकर तेल को पका लें। इस तेल में रूई को भिगोकर स्तनों पर रखे रहने स्तन सुडौल  बनते हैं एवं पुष्ट होने लगते हैं।
  12. प्रसूति स्त्रियों के लिए यह उपाय बहुत फायदेमंद होता है। प्रसूति रोगों के उपचार के लिए गंभारी की 20 से 30 ग्राम छाल को 240 मिली जल में उबालें। इसका एक चौथाई हिस्सा बचने पर काढ़ा बना लें। सुबह और शाम काढ़ा का 10 से 20 मिली की मात्रा में नियमित सेवन करने से प्रसूति स्त्रियों से  जुड़े रोग दूर होते हैं।
  13. इसके सेवन से गर्भाशय की सूजन भी कम हो जाती है।
  14. इसके साथ ही बुखार वगैरह भी ठीक हो जाते हैं।
  15. इससे सेवन से स्तनों में दूध की मात्रा भी बढ़ती है।
  16. गंभारी के फल और मुलेठी को बराबर मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। इसे मधु के साथ सुबह और शाम सेवन करने से गर्भ में मौजूद बच्चे की रक्षा होती है।
  17. गंभारी के पत्तों का रस निकाल कर 10 से 20 मिली रस में गाय का मूत्र मिला लें। इसके साथ ही इसमें मिश्री मिला लें। इसे पीने से पेशाब की जलन, पेशाब में दर्द, सूजन आदि से शीघ्र आराम मिलता है। 
  18. गंभारी के कोमल पत्तों का लेप नाखूनों पर लगाने से नाखून का टूटना रूक जाता है।
  19. गंभारी के फल का चूर्ण बनाकर इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। सुबह  और शाम इस मिश्रण को 1-1 चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के दूध के साथ खाएं। इससे सभी तरह की कमजोरी दूर  होती है।
  20. शुक्राणु सम्बन्धी बीमारी में भी इसके सेवन से लाभ होता है।
  21. बुखार के कारण कमजोरी आई हो तो गंभारी की छाल का काढ़ा 20 से 40 मिली की मात्रा में पीने से कमजोरी दूर होती है।
  22. गंभारी के 20 से 40 मिली काढ़ा में चीनी या मिश्री मिलाकर इसे ठंडा कर लें। इसका सुबह और शाम सेवन करने से जलन और तेज प्यास वाली गंभीर बुखार में लाभ होता है।
  23. गंभारी के फल का एक चम्मच रस दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से भी बुखार ठीक हो जाती है।
  24. गंभारी और अडूसे के कोमल पत्तों का रस निकाल लें। इसका 5 से 10 मिली मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने कफ विकार और कफ विकार से होने वाले रोग शीघ्र ठीक होते हैं।
  25. गंभारी और गूलर के सूखे या ताजे पके फलों के काढ़ा को 20 से 40 मिली की मात्रा में सुबह और शाम पीने से शीतपित्त में जल्द लाभ होता है।
  26. मुलेठी और गंभारी के फल को मिलाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़ा का दिन में तीन बार 20-40 मिली मात्रा में सेवन करने से आमवात या गठिया तथा वातरक्त में लाभ होता है।
  27. गंभारी की जड़ को पीसकर लेप करने से भी आमवात या गठिया तथा वातरक्त में लाभ होता है।
  28. गंभारी की पत्तियों का क्वाथ सुजाक के में घाव के प्रक्षालन में फायदेमंद होता है।
 

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