उत्कण्टक (Globe thistle)

     उत्कण्टक अनेक घर में उपयोग में लाया जाता है। उत्कण्टक 1600 मीटर की ऊंचाई पर गंगा के मैदानी क्षेत्रों, चरागाहों व खुले वनों, उत्तर-पश्चिमी हिमालय, पंजाब, उत्तर-प्रदेश, बिहार तथा प्रायद्वीपों में होता है।आयुर्वेद में उत्कण्टक के गुण के बारे में कई सारी अच्छी बातें बताई गई हैं। ऊँटकटेरा (उत्कण्टक) ब्रह्मदण्डी और सत्यानाशी की तरह दिखते हैं। ऊँटकटेरा (उत्कण्टक) के सभी भागों पर ब्रह्मदण्डी और सत्यानाशी की तरह ही कांटे होते हैं जो तीक्ष्ण तथा ऊपर की ओर उठे हुए होते हैं, लेकिन वास्तव में उत्कण्टक दोनों से अलग है। इस वनस्पति को ऊँट बड़े चाव से खाते हैं। 

उत्कण्टक का उपयोग 

  1. उत्कण्टक की जड़ को सोंठ के साथ पीसकर मस्तक पर लगाएं। इससे सिर दर्द से आराम मिलता है।
  2. उत्कण्टक (उँटकटेरा) के ताजे कच्चे डोडों (फूल युक्त फलों) को कूटकर पीस लें। इसे छानकर रस निकाल लें। इसे आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों की फूली तथा रतौंधी में लाभ होता है।
  3. उत्कण्टक के पत्तों को अच्छी तरह पीसकर, गले में लेप करने से कंठमाला रोग में लाभ होता है। 
  4. उत्कंटक पंचांग का काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा में गुड़ मिलाकर पीने से खांसी ठीक होती है और पाचनतंत्र ठीक रहता है।
  5. 1/2-1 ग्राम जड़ की छाल के चूर्ण को पान में रखकर चूसें। इससे खांसी और सांसों की बीमारी में लाभ होता है।
  6. 5-10 मिली उत्कण्टक पत्ते के रस में बराबर शहद मिलाकर चाटने से सांसों की बीमारी और खांसी में लाभ होता है।
  7. उत्कण्टक की जड़ का काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली की मात्रा में पीने से अत्यधिक प्यास लगने की समस्या ठीक होती है।
  8. 1 ग्राम उत्कण्टक जड़ के चूर्ण में 1 ग्राम छुहारे की गुठली का चूर्ण मिला लें। इसका सेवन करने से पाचनशक्ति बढ़ती है।
  9. 1/2-1 ग्राम जड़ छाल के चूर्ण को काले तिल के साथ सेवन करने से एनीमिया और पीलिया रोग में लाभ होता है।
  10. उत्कण्टक की जड़ के काढ़ा को गर्भवती महिला की नाभि पर लगाने से प्रसव सुखपूर्वक और तुरंत हो जाता है।
  11. 1 ग्राम उत्कण्टक की जड़ की छाल के चूर्ण में समान भाग मिश्री तथा तालमखाना बीज के चूर्ण को मिला लें। इसे खिलाने से सूजाक में लाभ होता है।
  12. 1 ग्राम उत्कण्टक जड़ को गोमूत्र में पीसकर त्वचा में लगाने से कुष्ठ में लाभ होता है।
  13. 1 ग्राम उत्कण्टक की जड़ की छाल के चूर्ण में 1 ग्राम गोखरू चूर्ण मिला लें। 1 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से डायबिटी, सुजाक तथा मूत्र रोग में लाभ होता है।
  14. उत्कण्टक जड़ की छाल को गुड़हल के फूलों के साथ पीस लें। इसे योनि में लगाने से योनि के ढीलेपन की समस्या के साथ योनि के अन्य विकारों में लाभ होता है।
  15. 1 ग्राम उंटकटेरा की जड़ के चूर्ण के बराबर गोखरू तथा क्रौंच बीज मिला लें। इसे 200 मिली दूध में पकाकर, छान लें। इसे ठंडा करके मिश्री मिलाकर पीने से वीर्य संबंधी विकारों में लाभ होता है।
  16. उंटकटेरा जड़ का काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली की मात्रा में पीने से त्वचा संबंधी विकारों में लाभ होता है। 
  17. रोमछिद्रों में सूजन हो जाने पर उत्कण्टक के बीजों को पीस लें। इसे प्रभावित स्थान पर लगाने से रोमछिद्रों की सूजन की समस्या ठीक होती है।
  18. 2-4 ग्राम उत्कंटक की जड़ को 100 मिली दूध में पका लें। इसे पिलाने से काम-शक्ति में वृद्धि होती है।
  19. उत्कंटक जड़ की छाल को शहद में पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें। इससे स्तम्भन-शक्ति बढ़ती है।
  20. अधिक पसीना आता है तो उत्कण्टक की जड़ को छाया में सूखा लें। इस जड़ को पीस लें। 1 ग्राम जड़ के चूर्ण में शहद मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
  21. उत्कंटक पंचांग का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिएं। इससे हिस्टीरिया में लाभ होता है।
  22. 1-2 ग्राम उत्कण्टक जड़ को पानी में पीसकर पिएं। इससे मिर्गी में लाभ होता है।
  23. 500 मिग्रा उत्कण्टक जड़ के चूर्ण को पान में रखकर सेवन करने से बुखार ठीक होता है।

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