तुवरक, चालमोगरा (Morothi Tree)

     तुवरक को चालमोगरा के नाम से भी जानते हैं। चालमोगरा (तुवरक) एक औषधि है जिसके फायदे घाव को ठीक करने, उल्टी को रोकने, कुष्ठ रोग को ठीक करने में मिलते हैं। इसके साथ ही आप खुजली, गले के रोग, डायबिटीज, सूजन सहित खांसी और सांसों के रोग में भी तुवरक से लाभ ले सकते हैं। तुवरक के वृक्ष लगभग 15-30 मीटर ऊँचे, सदाहरित, मध्यम आकार के होते हैं। इसकी शाखाएँ लगभग गोलाकार, रोमश होती हैं। इसके तने की छाल भूरे रंग की और खुरदरी तथा सफेद रंग की होती है जो दरारयुक्त होती है। इसके पत्ते सरल, एकांतर 10-22 सेमी लम्बे एवं 3-10 सेमी चौड़े, चर्मिल तथा गहरे हरे रंग के होते हैं। इसके फूल छोटे, हरे सफेद, एकलिंगी होते है। इसके फल 5-10 सेमी व्यास के, सेब के जैसे, अण्डाकार, गोलाकार तथा सरस फल होते हैं। फल के भीतर के सफेद गूदे के बीच में 15-20 पीताभ, बादाम जैसे बीज होते है। तुवरक के वृक्ष में फूल और फल अगस्त से मार्च तक होता है।

तुवरक (चोलमोगरा) के उपयोग

  1. 1 ग्राम चालमोगरा फल गिरी चूर्ण को दिन में तीन बार खाने से कंठमाला रोग में लाभ होता है। तुवरक के तेल को मक्खन में मिलाकर गांठों पर लेप करें। इससे कंठ पर होने वाले गांठ में लाभ होता है।
  2. तुबरक तेल की 5-6 बूंदों को दूध के साथ दिन में दो बार सेवन करें। इसके साथ ही मक्खन में मिलाकर छाती पर मालिश करें। इससे टीबी (क्षयरोग) रोग में लाभ होता है।
  3. तुबरक की फल-गिरी के एक ग्राम चूर्ण को जल में पीसकर 2-3 बार पिलाने से हैजा का इलाज होता है।
  4. 1-2 ग्राम तुवरक बीज चूर्ण को दिन में 2-3 बार जल के साथ सेवन करने से डायबिटीज (मधुमेह) में लाभ होता है।
  5. एक चम्मच फल-गिरी चूर्ण को दिन में तीन बार खाने से पेशाब से शक्कर जाना कम होता है। जब मूत्र में शक्कर जाना बंद हो जाय तो प्रयोग बंद कर दें।
  6. तुवरक काढ़ा से योनि का धोएं। इससे योनि से दुर्गंध आने की समस्या ठीक होती है।
  7. तुवरक के पेस्ट की बत्ती बना लें। इसे योनि के अन्दर रखें। इससे भी योनि का दुर्गंध दूर होता है।
  8. चालमोगरा के बीजों के साथ जंगली मूंग को मिलाकर कूट लें। इसे भांगरा के रस की 3 दिन भावना देकर चौथे दिन महीन पीस लें। इसमें थोड़ा चन्दन तेल या नारियल तेल या आँवला तेल मिला लें। इसका उबटन बनाकर सिफलिस के घाव पर लगाएं। इसके बाद 3-4 घंटे बाद स्नान करें।
  9. पूरे शरीर में फैले हुए सिफलिस के रोग और गठिया के पुराने रोग में चालमोगरा तेल की 5-6 बूंद सेवन करना शुरू करें। बाद में तुवरक तेल के सेवन की मात्रा बढ़ाते हुए 60 बूंद तक करें। इससे सिफलिस (उपदंश) रोग में लाभ होता है। जब तक इस औषधि का सेवन करें तब तक मिर्च, मसाले, खटाई से परहेज रखें। दूध घी और मक्खन का अधिक सेवन करें।
  10. 1 ग्राम चालमोगरा बीज चूर्ण को दिन में तीन बार सेवन करने से गठिया में आराम मिलता है।
  11. तुबरक के बीजों को खूब महीन पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इसे घाव पर लगाने से घाव से निकलने वाला खून बंद हो जाता है। घाव तुरंत भर जाता है।
  12. तुवरक बीज को पीसकर लगाने से घाव ठीक होता है।
  13. कुष्ठ रोग का इलाज करने के लिए चालमोगरा तेल का सेवन पहले 10 बूंद करना चाहिए। इससे उल्टी होकर शरीर के सब गंदगी बाहर आ जाती है। इसके बाद तुवरक के तेल के 5-6 बूंदों को कैप्सूल में डालकर या दूध व मक्खन के साथ भोजन के बाद सुबह और शाम सेवन करें। धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाकर 60 बूंदें तक ले जायें। इस तेल को नीम के तेल में मिलाकर शरीर के बाहरी अंगों पर लेप करें। कुष्ठ रोग की शुरुआती अवस्था में इस औषधि का सेवन करें। इस दौरान खटाई मिर्च मसाले नहीं खाएं।
  14. तुबरक  बीज, भल्लातक बीज, बाकुची मूल, चित्रकमूल अथवा शिलाजीत का लंबे समय तक सेवन करने से कुष्ठ रोग में लाभ हाता है।
  15. तुवरक तेल को लगाने से महाकुष्ठ, खुजली और अन्य चर्मरोगों में लाभ होता है।
  16. चालमोगरा में निम्ब तेल या मक्खन मिलाकर दाद में मालिश करने से एक महीने में दाद ठीक हो जाता है। इसके लिए 10 मिली तेल को 50 ग्राम वैसलीन में मिलाकर रख लें। इसका प्रयोग करते रहें।
  17. चालमोगरा के तेल को एरण्ड तेल में मिला लें। इसमें गंधक, कपूर और नींबू का रस मिलाकर लगाएं। इससे खाज तथा खुजली रोग में लाभ होता है।
  18. तुवरक के बीजों को छिल्के सहित पीसकर एरंड तेल में मिला लें। इसे खुजली पर लेप करने से खुजली की बीमारी ठीक होती है।
  19. चालमोगरा के बीजों को गोमूत्र में पीसकर दिन में 2-3 बार लेप करने से खुजली में लाभ होता है।
  20. चालमोगरा के पके बीज के तेल को लगाने से त्वचा विकारों में लाभ होता है।
  21. तुवरक बीजों को गोमूत्र में पीसकर लगाने से खुजली में लाभ होता है।
  22. चालमोगरा बीज चूर्ण को मस्तक पर मलने से बेहोशी की समस्या ठीक होती है।
  23. चालमोगरा तेल की 5 बूंदों को कैप्सूल में भरकर या मक्खन के साथ भोजन के आधा घण्टे बाद सुबह-शाम खाएं। इससे रक्त शुद्ध होता है और रक्त विकार ठीक होते हैं।
  24. तुबरक तेल को नीम तेल या मक्खन में मिलाकर लेप करने से रक्त से जुड़े विकारों में लाभ होता है।
  25. तुवरक रसायन का सेवन करने से मनुष्य चेहरे की झुर्रियां, सफेद बालों की समस्या से मुक्त होता है। चोलमागरा रसायन का सेवन करने से लोगों की याददाश्त बढ़ती है।

  • इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए, क्योंकि यह आमाशय को हानि पहुंचाता है। तेल को मक्खन में मिलाकर या कैप्सूल में भरकर भोजन के बाद ही लेना चाहिए।
  • नुकसान की स्थिति में दूध-घी का सेवन करना चाहिए।


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