कोद्रव (Native millet)

     कोद्रव को कोदो भी कहते हैं। कोदो की खेती पूरे भारत में की जाती है। कोदो का पौधा धान के जैसा ही होता है, लेकिन खास बात यह है कि इसकी खेती में धान से बहुत कम पानी की जरूरत होती है। लोग कोदो या कोद्रव के बारे में इतना ही जानते हैं, लेकिन असलियत यह है कि कोदो एक बहुत ही गुणी औषधि है। कोदो एक ऐसा अन्न है जिसे लम्बे समय तक रखने से भी यह खराब नहीं होता है। इसमें कीड़े नहीं लगते हैं। आप कफ-पित्त दोष, मल-मूत्र विकार में कोदो से लाभ  ले सकते हैं। कोद्रव का पौधा 60-90 सेमी तक ऊँचा, सीधा, धान के पौधे जैसा होता है। इसके बीज चमकीले, गहरे बैंगनी रंग के, छोटे, सफेद, गोल सरसों के समान होते हैं। इसका रंग श्यामला होता है।

कोद्रव के उपयोग

  1. कोद्रव पंचांग को जलाकर भस्म बना लें। इसमें जल मिलाकर सिर पर लेप करने से दारुणक (रूसी की समस्या) में लाभ होता है।
  2. जलकुम्भी भस्म को गोमूत्र में पीसकर कपड़े से छान लें। इसे कोदो के भात (चावल) के साथ खाने से गले की गांठ (घेंघा) रोग ठीक होता है।
  3. कोद्रव के बीजों का भस्म बना लें। 1-2 ग्राम भस्म में शहद मिलाकर सेवन करने से सांसों के रोग और खांसी में लाभ  होता है।
  4. कोद्रव का भात (चावल) बनाकर दही के साथ खिलाने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  5. कोद्रव की खीर बनाकर खिलाने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
  6. कोदो का भात बना ले। इसे जूस या कांजी मिलाकर बवासीर के रोगी को खिलाएं। इससे लाभ होता है।
  7. कोदो को पीसकर रोटी जैसा आहार बना लें। इसे नमक-रहित कम तेल में पका लें। इसे पत्ते वाली सब्जियों के साथ सेवन करना चाहिए। लकवा में लाभ मिलता है।
  8. भोजन में नियमित रूप से कोदो के धान से आहार बनाकर दही के साथ सेवन करें। इससे साइनस में तुरंत लाभ होता है।
  9. कोदो को पीसकर फोड़े पर पट्टी की तरह बाधें। इससे फोड़ा पककर फूट जाता है।
  10. बेसन तथा हल्दी के साथ कोद्रव के चूर्ण को मिलाकर लगाने से त्वचा की सुन्दरता बढ़ती है।
  11. कोद्रव के आटे की मोटी रोटी बना लें। इसमें एक तरफ हल्दी लगाकर हल्का गर्म करके बांधें। इससे सूजन ठीक हो जााती है।

  • कोद्रव का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से वातदोष तथा कब्ज की समस्या हो सकती है।
  • कोद्रव का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से किसी-किसी को उल्टी तथा बुखार हो सकता है।
  • इसके साथ ही बेहोशी, मैनिया, गतिविधियों में अनियमितता आदि लक्षण होने लगते हैं।
  • इन लक्षणों को दूर करने के लिए कद्दू के रस में गुड़ मिलाकर या हरसिंगार के पत्तों का रस पिलाना चाहिए।

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