जैतून (olive)
जैतून स्वाद में कसैला होता है और वात तथा पित्त को शान्त करता है। यह रेचक यानी मल को निकालने वाला, शरीर को बल देने वाला और पेशाब लाने वाला होता है। जैतून घावों में पीव यानी पस नहीं बनने देता और रक्त को पतला करता है। जैतून का फल भूख बढ़ाता है, लीवर की समस्याएं दूर करता है। मासिक धर्म लाता है, एक्जिमा रोग को ठीक करता है और प्यास, जलन दूर करने के साथ ही आँखों के लिए भी लाभदायक होता है। जैतून में फूल और फल लगने का समय अक्टूबर से अप्रैल तक होता है। जैतून के फलों से तेल निकाला जाता है। यह तेल साफ तथा पारदर्शी, सुनहरे रंग का तथा हल्का गंधयुक्त होता है। यह तेल खाने और लगाने दोनों के ही काम आता है।
जैतून के उपयोग
- जैतून के कच्चे फलों को जलाकर उसकी राख में शहद मिला लें। इसे सिर में लगाने से सिर के गंजेपन तथा सिर में होने वाली फुन्सियों की समस्या में लाभ होता है।
- 5 मिली जैतून के पत्तों के रस को गुनगुना करके उसमें शहद मिला लें। इसमें 1-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है।
- जैतून के कच्चे फलों को पानी में पकाकर उसका काढ़ा बना लें। इस काढ़े से गरारा करने पर दांतों तथा मसूड़ों के रोग ठीक होते हैं। इससे मुंह के छाले भी मिटते हैं।
- जैतून के तेल को छाती पर मलने से सर्दी, खांसी तथा कफ के कारण होने वाली अन्य समस्याएं ठीक होती हैं।
- जैतून के पत्तों को पीसकर जौ के आटे में मिला लें। इसमें कुछ पानी डालकर नाभि पर लेप करने से बारंबार होने वाले दस्त बंद हो जाते हैं।
- 5-10 मि.ली. काढ़ा प्रतिदिन पीने से पेशाब की सभी प्रकार की कठिनाइयों में लाभ होता है। इससे मधुमेह भी ठीक होता है।
- जैतून की जड़ को पीसकर जोड़ों पर लगाने से आमवात यानी कि गठिया की बीमारी में लाभ होता है। जैतून के बीज के तेल को लगाने से गठिया तथा जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
- जैतून के बीज के तेल को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।
- जैतून के कच्चे फलों को पीसकर घावों पर या पुराने जख्मों पर लेप करने से भी घाव जल्दी भर जाते हैं।
- जैतून के पत्तों के चूर्ण में शहद मिलाकर घावों पर लगाने से घाव जल्दी भरते हैं।
- जैतून चर्म रोगों और चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने में काफी प्रभावकारी है।
- जैतून के कच्चे फलों को पीसकर लगाने से चेचक और दूसरे फोड़े-फुन्सियों के निशान मिटते हैं।
- जैतून के पत्तों को पीसकर लेप करने से पित्ती, खुजली और दाद में लाभ होता है।
- अगर शरीर का कोई भी भाग आग से जल जाय तो कच्चे जैतून के फलों को पीसकर लगाने से छाला नहीं पड़ता।
- जैतून के वृक्ष से मिलने वाले गोंद को दाद पर लगाने से दाद ठीक होती है।
- जैतून के तेल की मालिश से त्वचा को पोषण मिलता है।
- जैतून के तेल को चेहरे पर लगाने से रंग निखरता है तथा सुंदरता बढ़ती है। इसकी मालिश से होठों का फटना बंद होता है और होठ मुलायम हो जाते हैं।
- जंगली जैतून के पत्तों को सुखाकर पीस लें। इस पाउडर को शरीर पर मलने से पसीना आना कम होता है और पसीने के कारण होने वाली दुर्गन्ध दूर होती है।
- जैतून के फल के मुरब्बा को यदि गर्म पानी के साथ खाया जाए तो यह हल्का दस्तावर होता है।
- जैतून का अचार बनाकर खाने से यह कब्ज पैदा करता है।
- जैतून का सेवन अधिक मात्रा में करने पर सिर में दर्द हो सकता है।
- अनिद्रा की बीमारी भी हो सकती है।
- इसका पका हुआ फल आंखों के लिए हानिकारक होता है।
- जैतून के तेल से त्वचा पर मुहांसों की समस्या भी हो सकती है। जैतून का तेल भारी होने के कारण त्वचा में आसानी से अवशोषित नहीं होता, जिससे त्वचा की ऊपरी सतह पर परत इकट्ठी हो जाती है और धूल-मिट्टी त्वचा पर जमने के कारण चेहरे पर कील-मुहांसे हो सकते है।
- इसलिए चेहरे पर जैतून का तेल लगाने पर उसे रगड़ कर मिलाना चाहिए और उसके बाद चेहरे को हल्के गुनगुने पानी से पोछ लेना चाहिए।
- जैतून का तेल सूखी त्वचा के लिए भी नुकसानदायक होता है। कुछ शोधों के अनुसार जैतून का तेल त्वचा की स्वाभाविक नमी को खत्म कर देता है। इसलिए चेहरे के सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक ही करना चाहिए।

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