धातकी (Red bell bush)
धातकी एक बहुत ही गुणी औषधि है। आयुर्वेद के अनुसार, कई रोगों के इलाज में धातकी के फायदे मिलते हैं। आप हड्डी रोग, अल्सर, बुखार, दस्त और बवासीर जैसे रोग में धातकी से लाभ ले सकते हैं। धातकी के पौधे से अनेक प्रकार की औषधियां बनाई जाती हैं। यह इतनी महत्वपूर्ण वनस्पति है कि लगभग सभी आयुर्वेदिक अर्क या रस में धातकी के फूल का प्रयोग किया जाता है। बहुत सालों से धातकी का इस्तेमाल शोध और अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। धातकी का पौधा माध्यम उंचाई का होता है। इसकी औसत ऊंचाई लगभग 3.6 मीटर होती है। यह औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पति है। इसकी जड़, तने की छाल, लता, पत्ता, फूल, फल आदि सभी अंग गुणकारी होते हैं। धातकी से विभिन्न रोगों का उपचार किया जाता है। धातकी के पौधे हर साल जनवरी से अप्रैल के दौरान फूलों से भर जाते हैं। इसी वक्त इसके पत्ते झड़ जाते हैं। इसके पौधों में नए पत्ते फरवरी से मार्च के बीच आते हैं। धातकी के फूल स्वाद में कड़वे, तासीर में ठंडे और आकार में छोटे होते हैं।
धातकी के उपयोग
- धातकी के फूल और तिनिश सार को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दूध एवं शहद के साथ अच्छी तरह मिलाकर सेवन करें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है। कफ आदि के कारण पलक उठाने में हो रही परेशानी में भी धातकी लाभदायक साबित होती है।
- धातकी के पत्तों और फूल, दोनों को बराबर हिस्सा लेकर काढ़ा बना लें। इसे गले में अटकाकर कुल्ला (गरारा) करने पर दांतों के सभी तरह के रोग में फायदा होता है।
- आंवला, पिप्पली और धातकी के फूल, को बराबर मात्रा में लेकर महीन पीस लें। इस चूर्ण के 1 ग्राम में शहद मिलाकर सुबह और शाम रोज बच्चों के मसूड़ों पर मालिश करें। ऐसा करने से दांत निकलते समय होने वाला दर्द दूर हो जाता है। दांत आसानी से निकल जाता है।
- धातकी के फल के 3 ग्राम चूर्ण को सुबह खाली पेट में ताजा पानी के साथ लगातार कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे पेट के कीड़े मर जाते हैं।
- दस्त होने पर धातकी के एक चम्मच चूर्ण में दो चम्मच शहद या एक कप छाछ मिलाकर सेवन करें। इससे दस्त और पेचिश में काफी लाभ होता है।
- जिन्हें बार-बार शौच जाना पड़ता है, उन्हें इस दिव्य औषधि का सेवन जरूर करना चाहिए।
- सोंठ, धातकी के फूल, मोचरस और अजमोदा को मिलाकर पीस लें। इस मिश्रित चूर्ण की 1-3 ग्राम मात्रा का सेवन छाछ के साथ करें। इससे दस्त और और पेचिश दोनों में लाभ होता है।
- पेचिश के उपचार के लिए धातकी के 10 ग्राम फूलों को लगभग 400 मिलीलीटर पानी में उबालें। पानी का एक चौथाई बच जाने पर उबालना बंद कर दें। इस काढ़ा को सुबह खाली पेट और शाम में भोजन से 1 घंटा पहले सेवन करें। दवा के इस्तेमाल के दौरान आसानी से पचने वाला भोजन करें। कुछ समय के लिए दूध और घी नहीं खाएं। इसके सेवन से निश्चित तौर पर फायदा होगा।
- धातकी के फूल के 1-3 ग्राम चूर्ण को दही के साथ सेवन करें। इससे पेचिश का इलाज होता है।
- सोंठ, धातकी के फूल, मोचरस और अजमोदा को मिलाकर पीस लें। इस मिश्रित चूर्ण की 1-3 ग्राम मात्रा का सेवन छाछ के साथ करने से दस्त और पेचिश में लाभ होता है।
- धातकी के फूलों का शर्बत पिलाने से बवासीर में लाभ होता है। खूनी बवासीर या अन्य किसी कारण से खून बहने को रोकने के लिए धातकी के फूल के एक चम्मच चूर्ण में दो चम्मच शहद मिलाएं। इसे दिन में 2-3 बार सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से खून आना बंद हो जाता है, या धीरे-धीरे कम हो जाता है।
- धातकी के फूलों का 2-3 ग्राम चूर्ण लें। इसे चित्रक की जड़ और हल्दी के चूर्ण के साथ मिला लें। अगर इनमें से किसी एक का भी सेवन 50 ग्राम गुड़ के साथ किया जाए तो प्लीहा विकार जैसे तिल्ली के बढ़ने और प्लीहा के बढ़ने से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में सहायता मिलती है।
- धातकी के फूल, पठानी लोध्र और चंदन को समान मात्रा में लेकर पीस लें। इस मिश्रण को दिन में 3 बार शहद के साथ एक चम्मच लें। कुछ हफ्ते तक इसका नियमित सेवन करने से मधुमेह या डायबिटीज में लाभ होता है।
- धातकी के फूल के चूर्ण और नील कमल के चूर्ण को बराबर-बराबर मात्रा में मिला लें। मासिक धर्म शुरू होने के दिन से 5 दिन तक शहद के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करें। इससे स्त्री गर्भधारण कर लेती है। प्रयोग असफल होने पर अगले मासिक धर्म के दिन से इसे फिर से प्रयोग किया जा सकता है।
- धातकी के फूल के चूर्ण का लोध्र की छाल के साथ उपयोग करें। इससे अल्सर में काफी आराम मिलता है।
- नासूर (साइनस) होने पर अलसी के तेल में धातकी के फूल से बने चूर्ण को मिला लें। इसे थोड़ा शहद मिलाकर रोजाना साइनस के घाव में लगाते रहें। ऐसा करने से जल्द आराम मिलता है।
- धातकी के फूलों को पीसकर अलसी के तेल या शहद में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाएं। इससे बाद में जला निशान भी खत्म हो जाता है। इसके फूलों को गुलाब जल में पीसकर लेप करने से पूरे शरीर में जलन में फायदा होता है।
- धातकी के फूल के पेस्ट को लेप और उबटन के रूप में प्रयोग करें। इससे कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
- इसके अलावा कटेरी और धाय के फूल को जलाकर उसकी भस्म बना लें। इसमें सरसों का तेल मिलाकर कुष्ठ पर लेप करने से भी फायदा होता है।
- धातकी फूल से बने एक चम्मच चूर्ण को सुबह और शाम दूध या पानी के साथ सेवन करें। इससे पित्त विकार के कारण होने वाला बुखार ठीक हो जाता है।
- धातकी के फूल, फल, चन्दन, पठानी लोध, अनन्त मूल, महुआ, नागरमोथा और हरीतकी को समान मात्रा में मिला लें। इस मिश्रण को कूटकर 30 ग्राम चूर्ण को लगभग एक लीटर पानी में भिगो दें। इसके बाद इस पानी में लगभग 5 ग्राम पकी हुई मिट्टी भी भिगो दें। थोड़ी देर बाद पानी छान लें। अब इसमें मुलेठी भिगो दें। जब मुलेठी अच्छी तरह भीग जाय तो पानी छान लें। इसमें मिश्री या चीनी मिलाकर पीने से तेजी से होने वाला रक्स स्राव रुक जाता है। इसे प्रतिदिन ताज़ा-ताजा बनाकर दिन में दो बार कुछ दिन तक लगातार सेवन करें।
- दूब का एक चम्मच रस और धाय के फूल का एक चम्मच चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भी खून बहना रुक जाता है। कहीं से भी खून बह रहा हो, चाहे नकसीर हो या बवासीर अन्य रक्तस्राव, कुछ दिन के इस्तेमाल से खून बहना रोकने में पूर्ण लाभ होगा। तीन सप्ताह तक लगातार इसका सेवन करने से लाभ होता है।
- यदि नाक से खून आ रहा हो तो धातकी का फूल इसे रोकने में मदद कर सकता है। इसके फूल में मोचरस, पठानी लोध्र, आम की गुठली और मंजीठ को पीसकर चीनी के शरबत में मिलाएं। इसे कपड़े से छानकर निचोड़ लें। इस रस को 1-2 बूंद की मात्रा में नाक में डालने से खून आना बंद हो जाता है।
- धातकी के फूल से बने दो चूर्ण को चम्मच (लगभग 3 ग्राम) लें। इसे शहद, पानी, दही या मिश्री के साथ सुबह खाली पेट और शाम को भोजन से एक घंटा पहले सेवन करें। इससे ल्यूोकरिया या श्वेत प्रदर में शीघ्र लाभ होता है।

Comments
Post a Comment