रेवंदचीनी (Rhubarb)
रेवंदचीनी एक पहाड़ी वनस्पति है, जिसकी जड़ चिकित्सा के लिए प्रयोग में लाई जाती है। रेवातिका स्वाद में कड़वी और तीखी होती है। इसकी तासीर ठंडी होती है। रेवंदचीनी की जड़ सख्त लकड़ी जैसी और मोटी होती है। इसकी जड़ भूरे पीले रंग की होती है। जड़ का कोई निश्चित आकार नहीं होता है। रेवंदचीनी हिमालयी वनों में पायी जाने वाली औषधि है।
रेवंदचीनी के उपयोग
- दांतों के दर्द से जल्द राहत पाने के लिए रेवंदचीनी की जड़ को कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दांतों पर मंजन की तरह मलने से दर्द दूर होता है। इससे दांत-मुंह के अन्य रोग, दुर्गन्ध आदि से भी मुक्ति मिलती है।
- 12-12 ग्राम की मात्रा में घृतकुमारी (एलोवेरा) का गूदा, सनाय के पत्ते तथा शुण्ठी के चूर्ण लें। इसमें 6-6 ग्राम काला नमक और सेंधा नमक मिलाएं। इसमें 3-3 ग्राम की मात्रा में विडङ्ग तथा रेवंदचीनी का चूर्ण मिलाकर मिश्रण बनाएं। इस मिश्रण को 1-2 ग्राम लें और इसमें मधु मिलाकर सेवन करें। इससे कब्ज की परेशानी खत्म होती है।
- रेवंदचीनी की जड़ को पीसकर इसका लेप बवासीर के मस्सों पर लगाएं। इससे बवासीर का दर्द कम होता है। इससे खून आना बंद भी हो जाता है।
- योनि में खुजली होने पर रेवंदचीनी के चूर्ण को गेहूँ के आटा मिला लें। इस मिश्रण को जल में घोल कर हल्का गुनगुना कर लें। योनि में इसका लेप करने से खुजली की परेशानी ठीक होती है।
- इससे योनि के ढीलेपन की समस्या और अन्य योनि के विकारों का भी नाश होता है।
- रेवातिका की जड़ को पीसकर घाव पर लगाएं। ऐसा करने से घाव जल्दी भरता है।
- इसके प्रयोग ये नुकसान होने की संभावना रहती हैः-
पतला दस्त
पेट दर्द की शिकायत
महिलाओं में गर्भाशय का संकुचन

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