काली मूसली (Black musli)
काली मूसली एक बहुवर्षायु कोमल क्षुप होती है जिसकी जड़ फाइबर युक्त मांसल (ठोस) होती है। काली मूसली स्वाद में हल्का मीठापन और कड़वापन लिए हुए होती है लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है। काली मूसली के पत्ते ताड़ (ताल) के पत्तों की तरह होते हैं। पीले रंग के फूलों के कारण इसको स्वर्ण पुष्पी या हिरण्या पुष्पी भी कहते हैं। इसकी जड़ें बाहर से मोटी एवं काले-भूरे रंग की तथा अन्दर से सफेद रंग की, मांसल व तंतुयुक्त होती है।
काली मूसली का उपयोग
- समान मात्रा में काली मूशली, गुडूची सत्त्, केंवाच बीज, गोक्षुर, सेमल, आँवला तथा शर्करा को घी और दूध के साथ मिलाकर पिएं।
- मूसली कंद 1 भाग, मखाना दो भाग तथा 3 भाग गोक्षुर के चूर्ण का क्षीरपाक कर मिश्री तथा टंकण मिलाकर तीन सप्ताह तक सुबह गुनगुना करके पीने से सेक्स की इच्छा बढ़ती है।
- 2-4 ग्राम काली मूसली जड़ के चूर्ण का दूध के साथ सेवन करने से शुक्रदोषों में लाभ होता है।
- 1 ग्राम मूसली चूर्ण में मिश्री मिलाकर खाने से शीघ्रपतन तथा वीर्य विकार आदि दोष मिटते हैं।
- 2-4 ग्राम काली मूसली के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर खिलाने से वीर्य की पुष्टि होती है।
- काली मूसली तथा उटंगन के चूर्ण को मिलाकर 2-4 ग्राम मात्रा में सेवन करने से शरीर तथा वीर्य की पुष्टि होती है।
- काली मूसली के 2-4 ग्राम चूर्ण में 5 ग्राम मिश्री मिलाकर तथा 3 बूँद चन्दन तेल डालकर दूध के साथ सुबह शाम पीने से मूत्र संबंधी रोगो में लाभ होता है।
- 10-15 मिली काली मूसली के काढ़े का सेवन करने से मूत्राघात में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम काली मूसली चूर्ण में 5 मिली तुलसी पत्ते का रस मिलाकर खाने से वृक्कशूल में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम काली मूसली की जड़ के चूर्ण को छाछ के साथ सेवन कराने से अतिसार में लाभ होता है।
- 1-2 ग्राम काली मूसली चूर्ण में 500 मिग्रा दालचीनी चूर्ण मिलाकर सेवन करने से उदरशूल कम होता है।
- इङ्गुदी फल का छिलका, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, तालमूली, मनशिला तथा कपास की गुठली के चूर्ण की बत्ती जैसा बनाकर घी में भिगोकर धूम्रपान करने से खाँसी में लाभ होता है।
- काली मूसली के जड़ की छाल को (500 मिग्रा) पान में रखकर खाने से दमा में लाभ होता है।
- काली मूसली को पीसकर लेप करने से खुजली आदि त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।
- काली मूसली की जड़ को बकरी के दूध में पीसकर, मधु मिलाकर चेहरे पर लेप करने से झांईयां मिटती हैं तथा मुखकान्ति की वृद्धि होती है।
- काली मूसली जड़ का पेस्ट बना लें और उसको मुँहासों पर लगायें। इससे जल्द आराम मिलता है।
- काली मूसली के प्रंद चूर्ण को उस प्रभावित स्थान पर बुरकने से रक्तस्राव (ब्लीडिंग) रुकता है तथा घाव जल्दी भरता है।
- काली मूसली के पत्तों को पीसकर लेप करने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।
- 1 ग्राम मूसली चूर्ण तथा 1 ग्राम बाकुची चूर्ण को मिलाकर सेवन करने से बाधिर्य में लाभ होता है।
- मूसली के रस या मूसली के काढ़े से तिल तेल को पकाकर छानकर 1-2 बूंद तेल को कान में डालने से कान संबंधी रोगों मे आराम मिलता है।
- काली मूसली के 2-4 ग्राम चूर्ण को 100 मिली मिश्री मिले हुए दूध में मिलाकर पिलाने से सूजाक में लाभ होता है।
- काली मूसली के चूर्ण में अतसी तेल मिलाकर टूटे स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

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