कासनी (Chicory)
कासनी बारहमासी पौधा होता है। आयुर्वेद में कासनी जड़ी बूटी औषधि के रुप में प्रयोग में लाया जाता है। कासनी को चिकोरा भी कहा जाता है। कासनी का फूल नीले रंग का होता है। और कासनी को कॉफी के जगह पर भी इस्तेमाल किया जाता है और इसमें कैफीन नहीं होता है।
कासनी का उपयोग
- कासनी बीज का चूर्ण (1-2 ग्राम) अथवा काढ़ा (10-20 मिली) का सेवन करने से सिर दर्द कम होता है।
- कासनी पत्ते के रस को माथे पर लगाने से या कासनी पत्ते के रस को चन्दन के साथ पीसकर मस्तक पर लगाने से सिरदर्द कम होता है।
- 2 ग्राम कासनी के पत्तों को पीसकर, ठण्डे पानी के साथ सेवन करने से खून की उल्टी से राहत मिलती है।
- कासनी के बीजों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से मुखपाक तथा मसूड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
- 10-20 मिली कासनी बीज के काढ़े का सेवन करने से पित्त के कारण जो उल्टी होती है उससे राहत दिलाने में मदद मिलती है।
- कासनी के बीजों का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से भी उल्टी से राहत मिलती है।
- खान-पान में असंतुलन होने पर शरीर की सभी क्रिया असंतुलित हो जाती है। 5-10 मिली कासनी पत्ते का रस या 15-20 मिली कासनी पत्ते के काढ़े का सेवन करने से कामला या पीलिया में लाभ होता है। इस अवधि में रोगी को तक्र और चावल या दूध तथा चावल का सेवन करना चाहिए। घी तथा शक्कर का प्रयोग वर्जित होता है।
- कासनी के फूलों का शर्बत बनाकर पिलाने से लीवर से जुड़े रोगों में फायदा पहुँचता है।
- कासनी के बीजों का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से मूत्रकृच्छ्र तथा मूत्र संबंधी रोगों में फायदेमंद होता है।
- कासनी बीज का काढ़ा बनाकर, 20-25 मिली काढ़े में गुड़ मिलाकर पिलाने से मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।
- कासनी की जड़ का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से भी लाभ होता है।
- कासनी के जड़ को महीन पीस लें। उस पेस्ट की पोटली बनाकर योनि में लगाने से योनि का दर्द तथा योनि का सूजन कम होता है। इसके प्रयोग से सफेद पानी निकलना बंद हो जाता है।
- कासनी के पत्तों को पीसकर लेप करने से संधिशूल तथा संधिशोथ में लाभ होता है।
- कासनी के पत्तों को जौ के आटे के साथ पीसकर हृदय के जगह पर लेप करने से उन्माद या पागल तथा हृदय संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।
- कासनी के पत्तों के साथ पित्तपापड़ा, गिलोय, नागरमोथा तथा खस मिलाकर काढ़ा बनाएं। 15-20 मिली काढ़ा का सेवन करने से प्यास, बेचैनी, निद्रा की समस्या, मूत्र करते वक्त जलन तथा बुखार में लाभ होता है।
- कासनी के पत्ते को वनफ्सा के फूलों के साथ पीसकर नेत्र के बाहर चारों तरफ लगाने से आराम मिलता है।
- कासनी पञ्चाङ्ग को यव के आटे के साथ पीसकर जोड़ों में लगाने से आमवात या गठिया में लाभ होता है। कासनी का पेस्ट जोड़ो पर लगाने से आराम मिलता है।
- कासनी के पत्तों को लाल चन्दन, गुलाब के अर्क तथा सिरके के साथ पीसकर लगाने से शीतपित्त में लाभ होता है।

Comments
Post a Comment