लोबिया (Chinese beans)

     समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है तथा इसका प्रयोग साग के रूप में किया जाता है। यह जमीन पर फैलने वाला वल्लरीनुमा शाकीय पौधा होता है। इसके पुष्प गुलाबी अथवा श्वेत वर्ण के होते हैं। इसकी फली अत्यधिक लम्बी होती है तथा बीज संख्या में लगभग 10-20  फली के अनुसार छोटे तथा बड़े, भूरे-हल्के रक्त वर्ण के अथवा हल्के बैंगनी अथवा कृष्ण वर्ण के होते हैं।

लोबिया के उपयोग

  1. राजमाष के हरे बीजों को गुड़ के साथ सेवन करने से नेत्र रोग व बच्चों के कुपोषण जन्य रोगों में लाभ होता है।
  2. छर्दि (उलटी)-राजमाष के बीजों का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से उत्क्लेश (मिचली), छर्दि (उलटी) व मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।
  3. युवानपिडका-राजमाष पत्र अर्क को लगाने से युवानपिडका (मुंहासों) का शमन होता है।
  4. शोथ-राजमाष के बीजों को पीसकर लगाने से शोथ का शमन होता है।

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