नींबू बिजौरा (Citron)

     नींबू बिजौरा नाम से आपको पता चल ही गया होगा कि यह एक प्रकार का नींबू है, लेकिन इसका आकार आम नींबू से बड़ा होता है। चरक के हृद्य एवं छर्दिनिग्रहण गणों में तथा सुश्रुत-संहिता में नींबू बिजौरा के गुण-धर्म का उल्लेख मिलता है। इसका फल नींबू से काफी बड़ा होता है। यह मीठे और खट्टे के भेद से दो प्रकार का होता है। मीठे फल का बिजौरा लाल-गुलाबी रंग का होता है। इसका छिलका बहुत मोटा होता है। इसके मध्यम कद के झाड़ीनुमा वृक्ष होते हैं। इसके पत्ते कुछ बड़े, चौड़े और लम्बे होते हैं। फूल सफेद रंग के तथा सुगन्धित होते हैं। इसके फल गोल, आगे के भाग में उभारयुक्त  तथा अधिक बीजयुक्त होते हैं। फल की छाल छोटे-छोटे उभारों से युक्त मोटी, सुगन्धित तथा स्वाद में कड़वी होती है।बिजौरा नींबू फल के रस को वर्षा में सेंधानमक के साथ, शरद् में मिश्री या चीनी के साथ, हेमन्त में नमक, अदरख, हींग, काली मरिच तथा शिशिर व भ्रंशत में भी हेमन्त के समान व ग्रीष्म में गुड़ के साथ इसका सेवन अति लाभप्रद होता है।

नींबू बिजौरा के उपयोग

  1. बिजौरा नींबू की केसर को पीसकर, पेस्ट बनाकर सिर पर लेप करने से पित्तज-शिरोरोग से आराम मिलता है। 
  2. 1-2 ग्राम बिजौरा नींबू जड़ की छाल  चूर्ण में घी मिलाकर सेवन करने से सिरदर्द कम होता है।
  3. 1-2 बूँद बीजपूर फल-के रस को कान में डालने से कान के दर्द से आराम मिलता है। 
  4. 65 मिग्रा सज्जीक्षार को 30-40 मिली बिजौरा नींबू के रस में मिलाकर, छानकर कान में डालने से कर्ण बहना, कान में दर्द तथा कान में जलन से आराम मिलता है। 
  5. 50 मिली नींबू रस में 50 मिली तेल को डालकर, पकाकर, छानकर 1-2 बूँद कान में डालने से कर्ण दर्द से आराम मिलता है।
  6. बिजौरा नींबू जड़ की पेस्ट की बत्ती बनाकर इस वर्त्ति को दांत पर रखकर चबाने से दांत में कीड़ा होने के कारण जो दर्द होता है उससे जल्दी आराम मिलता है। 
  7. फल के छिलकों को चबाने से सांस या मुँह की बदबू से जल्दी राहत मिलती है। 
  8. बिजौरा के फूल के केशर के साथ सेंधानमक तथा काली मरिच का चूर्ण मिलाकर गोली बनाकर चूसने से मुखशोष, मुख की जड़ता आदि मुख संबंधी रोगों से आराम मिलता है।
  9. कंठ का स्वर बेहतर करने के लिए चमेली के पत्ते, इलायची, शहद, बिजौरा नींबू के पत्ते, धान की खील तथा पीपल इन औषधियों से बने अवलेह को 5-10 मिली मात्रा में सेवन करने से गले की आवाज बेहतर होती है।
  10. 5-10 मिली बिजौरा फल के रस में काला नमक तथा शहद मिलाकर पीने से हिक्का तथा खांसी में लाभ होता है।
  11. बिजौरा नींबू की 10-20 ग्राम जड़ को 200 मिली पानी में उबालकर चतुर्थांश शेष का काढ़ा बनाकर पिलाने से छर्दि या उल्टी से राहत मिलती है।
  12. भोजन करने के बाद अगर उल्टी आती है तो शाम के समय बिजौरा नींबू का ताजा रस 5-10 मिली मात्रा में पिलाना चाहिए।
  13. 10-20 मिली बिजौरा फल के रस में शर्करा, शहद तथा पिप्पली चूर्ण मिलाकर पीने से छर्दि या उल्टी से राहत मिलती है।
  14. 5-10 ग्राम बिजौरा नींबू बीज चूर्ण को गर्म जल के साथ देने से पेट की कृमि से मुक्ति मिलने में आसानी होती है। होता है।
  15. फल के छिलकों का काढ़ा बनाकर पिलाने से पेट की कृमियों के कष्ट से आराम मिलता है।
  16. बिजौरा नींबू की जड़ की छाल तथा फूलों को चावल के धोवन के साथ पीसकर थोड़ा जल तथा शहद मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार तथा रक्तार्श में लाभ होता है।
  17. 10-20 मिली बिजौरा नींबू रस में समान मात्रा में शहद मिलाकर और इसमें जल मिलाकर शर्बत बना लें, इस शर्बत में 500 मिग्रा सोंठ, 500 मिग्रा मरिच तथा 500 मिग्रा पिप्पली चूर्ण मिलाकर पिलाने से जलन, उल्टी आदि पित्तज विकारों से आराम दिलाता है।
  18. हींग, अनारदाना, विड्लवण तथा सेंधानमक  के चूर्ण में 4 गुना बिजौरा फल का रस मिलाकर पीने से वातज-गुल्म (ट्यूमर) में लाभ होता है।
  19. जड़ की छाल के 2-5 ग्राम चूर्ण का सेवन सुबह शाम जल के साथ करने से मूत्र-विकारों से आराम मिलता है।
  20. 10-15 मिली बिजौरा फल के रस में 65 मिग्रा यवक्षार (saltpeter) तथा शहद मिलाकर सेवन करने से किडनी में दर्द आदि किडनी संबंधी बीमारियों में होता है।
  21. 10-15 मिली बिजौरा फल के रस में सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से अश्मरी या पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
  22. बिजौरा नींबू फल के रस में मिलाकर लगाने से खुजली में आराम मिलता है। नींबू के बीजों को पीसकर लेप करने से सूजन तथा चर्म रोगों में भी लाभ होता है।
  23. बिजौरा फल के रस में नीम पत्ते का रस तथा निर्गुण्डी पत्ते के रस में मिलाकर 3 दिन तक नाक से  देने से अपस्मार या मिर्गी में लाभ होता है।
  24. बिजौरा नींबू जड़ के चूर्ण और फूल के चूर्ण को बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर 1-2 ग्राम चूर्ण को चावल की मांड के साथ सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
  25. फल रस में थोड़ा कुनैन बुरक कर सुबह, दोपहर तथा शाम पिलाने से पित्तज्वर और नियत-कालिक-ज्वर का आराम होता है। पत्तों का काढ़ा भी लाभकारी होता है।
  26. 10-20 मिली बिजौरा जड़ छाल के काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से बुखार में आराम मिलता है।
  27. नींबू की कली, मधु तथा सेंधानमक को एक साथ पीसकर तालु पर लेप करने से पित्तज्वरजन्य तृष्णा का शमन होता है।
  28. बिजौरा नींबू के पत्तों का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से ज्वर से आराम मिलता है।
  29. 1-2 ग्राम मूल चूर्ण को घी के साथ मिश्रित कर सेवन कराने से दर्द से आराम मिलता है।
  30. 5-10 मिली जड़ के रस में 65 मिग्रा यवक्षार मिलाकर सेवन करने से कुक्षिशूल (stigma) तथा कमर दर्द से आराम मिलता है।
  31. इसके पत्तों को गर्मकर पीड़ा युक्त स्थानों पर बाँधने से लाभ होता है।
  32. बिजौरा मूल के साथ अरनी मूल, देवदारु, सोंठ, कटेरी और रास्ना समभाग मिलाकर पीसकर लेप करने से घाव तथा वातज सूजन को कम करने में लाभकारी होता है।
  33. निद्रा लाने वाले तीक्ष्ण विषों के प्रभाव को नष्ट करने के लिए 10-20 मिली बिजौरा नींबू के रस को थोड़ी-थोड़ी देर से पिलाना चाहिए।
  34. विषैले जीवों के काटने से जो विष चढ़ जाता है, उसे उतारने के लिए इसका 20-30 बूँद अर्क पिलाना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)