शितिवारक (Cock”s Comb)

     भारत के हिमालयी क्षेत्रों में लगभग 1500 मी की ऊँचाई तक तथा समस्त मैदानी भागों में बेकार पड़ी भूमि व सड़कों के किनारे पर पाया जाता है। इसके पुष्प शुभ श्वेत से गुलाबी वर्ण होते हैं। इसके फल अण्डाकार तथा गोलाकार होते हैं; जिसमें 4-8, झिल्लीदार, कृष्ण वर्ण के चमकीले, बीज होते हैं।

शितिवारक के उपयोग 

  1. मुखव्रण-बीजों का क्वाथ बनाकर गरारा करने से मुखव्रण में लाभ होता है।
  2. मधुमेह-1 ग्राम बीज चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
  3. मूत्रकृच्छ्र-बीजों का क्वाथ बनाकर पीने से मूत्रकृच्छ्र तथा मूत्राश्मरी में लाभ होता है।
  4. रक्तप्रदर-पुष्पों का फाण्ट बनाकर पीने से रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर एवं गर्भाशयगत रक्तस्राव में लाभ होता है।
  5. संधिशूल-बीज सहित पञ्चाङ्ग को पीसकर जोड़ों पर लगाने से संधिशूल तथा शोथ का शमन होता है।
  6. बलवर्धनार्थ-बीज चूर्ण में दुग्ध एवं शर्करा मिलाकर सेवन करने से बल की वृद्धि होती है।

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