पलाश (The Forest flame)

     वैदिक काल में पलाश का प्रमुख उपयोग यज्ञ कर्मों के लिए किया जाता था। पलाश एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे "जंगल की आग" भी कहा जाता है। पलाश का फूल उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प है और इसको 'भारतीय डाकतार विभाग' द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित किया जा चुका है।प्राचीन काल से ही होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है। भारत भर मे इसे जाना जाता है। एक "लता पलाश" भी होता है। लता पलाश दो प्रकार का होता है। एक तो लाल पुष्पो वाला और दूसरा सफेद पुष्पो वाला। लाल फूलो वाले पलाश का वैज्ञानिक नाम " ब्यूटिया मोनोस्पर्मा " है। सफेद पुष्पो वाले लता पलाश को औषधीय दृष्टिकोण से अधिक उपयोगी माना जाता है। वैज्ञानिक दस्तावेजो मे दोनो ही प्रकार के लता पलाश का वर्णन मिलता है। सफेद फूलो वाले लता पलाश का वैज्ञानिक नाम " ब्यूटिया पार्वीफ्लोरा " है जबकि लाल फूलो वाले को " ब्यूटिया सुपरबा " कहा जाता है। एक पीले पुष्पों वाला पलाश भी होता है।

पलाश का उपयोग

  1. पलाश की ताजी जड़ों का अर्क निकालकर एक-एक बूँद आँखों में डालते रहने से मोतियाबिंद, रतौंधी इत्यादि सब प्रकार के आँख के रोगों से राहत मिलती है।
  2. रात भर 100 मिली ठंडे पानी में भीगे हुए 5-7 पलाश फूल को छानकर सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से नकसीर बंद हो जाती है।
  3. पलाश के जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगंड में लाभ होता है।
  4. पलाश की ताजी जड़ का रस निकालकर अर्क की 4-5 बूँदें पान के पत्ते में रखकर खाने से भूख बढ़ती है।
  5. पलाश की छाल और शुंठी का काढ़ा या पलाश के पत्ते का काढ़ा बना लें। 30-40 मिली मात्रा में दिन में दो बार पिलाने से आध्मान (अफारा) तथा उदरशूल या पेट दर्द में आराम मिलता है।
  6. एक चम्मच पलाश बीज चूर्ण को दिन में दो बार खाने से पेट के सब कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं।
  7. पलाश के बीज, निशोथ, किरमानी अजवायन, कबीला तथा वायविडंग को समान मात्रा में मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से सब प्रकार के कृमि नष्ट हो जाती है।
  8. 1 चम्मच पलाश बीज के काढ़े में 1 चम्मच बकरी का दूध मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में तीन बार सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है। इस समय में बकरी का उबला हुआ ठंडा दूध और चावल ही लेना चाहिए।
  9. 1-2 ग्राम पलाश पञ्चाङ्ग की भस्म को गुनगुने घी के साथ पिलाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) में बहुत लाभ होता है। इसका कुछ दिन लगातार सेवन करने से मस्से सूख जाते हैं।
  10. पलाश के पत्रों में घी की छौंक लगाकर दही की मलाई के साथ सेवन करने से अर्श (बवासीर) में लाभ होता है।
  11. पलाश के फूलों को उबालकर पीसकर सूखा कर पेडू पर बाँधने से मूत्रकृच्छ्र (मूत्र संबंधी समस्या) तथा सूजन में लाभकारी होता है।
  12. 20 ग्राम पलाश के पुष्पों को रात भर 200 मिली ठंडे पानी में भिगोकर सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द तथा मूत्र के साथ रक्त का आना बंद हो जाता है।
  13. पलाश की सूखी हुई कोपलें, गोंद, छाल और फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-4 ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन दूध के साथ सुबह शाम सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र (मूत्र त्याग में कठिनता) में लाभ होता है।
  14. पलाश की कोंपलों को छाया में सुखाकर कूट-छानकर गुड़ मिलाकर, 9 ग्राम की मात्रा में सुबह सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है।
  15. पलाश की जड़ों का रस निकालकर, उस रस में 3 दिन तक गेहूँ के दानों को भिगो दें। उसके बाद इन दानों को पीसकर हलवा बनाकर खाने से प्रमेह, शीघ्रपतन और कामेन्द्रियों का ढीला पड़ जाने उससे राहत दिलाने में मदद करता है।
  16. पलाश एवं कुसुम्भ के फूल तथा शैवाल को मिलाकर काढ़ा बनायें, ठंडा होने पर 10-20 मिली काढ़े में मिश्री मिलाकर पिलाने से पित्त प्रमेह में लाभ होता है।
  17. पलाश के फूलों की पुल्टिस बनाकर नाभि के नीचे बाँधने से मूत्राशय संबंधी रोग तथा अंडकोष में बाँधने से अंडकोष सूजन कम होता है।
  18. पलाश की छाल को पीसकर 4 ग्राम की मात्रा में लेकर जल के साथ दिन में दो बार देने से अंडवृद्धि में लाभ होता है।
  19. 10 ग्राम पलाश बीज, 20 ग्राम शहद और 10 ग्राम घी इन सबको घोटकर, इसमें रूई को भिगोकर बत्ती बनाकर त्री प्रंग से तीन घण्टे पहले योनि में रखने से गर्भधारण नही होता।
  20. पलाश के बीजों को महीन पीसकर मधु के साथ मिलाकर दर्द वाले स्थान पर लेप करने से संधिवात या  अर्थराइटिस में लाभ होता है।
  21. ढाक के पत्तों की पुल्टिस बाँधने से 3-5 ग्राम पलाश जड़ के छाल का चूर्ण बनाकर उसको दूध के साथ पीने से बंदगाँठ में लाभ होता है।
  22. 100 मिली पलाश के जड़ के रस में समान मात्रा में सफेद सरसों का तेल मिलाकर दो चम्मच सुबह-शाम पीने से श्लीपद रोग या हाथीपाँव  में लाभ होता है।
  23. घावों पर पलाश के गोंद का चूर्ण छिड़कने से जल्दी ठीक होता है।
  24. पलाश बीज से बने तेल को लगाने से कुष्ठ में लाभ होता है।
  25. दूध में उबाले हुए पलाश बीज, गंधक तथा चित्रक को सूखा कर, सूक्ष्म चूर्ण बनाकर, 2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन, 1 मास तक जल के साथ लेने से मण्डल कुष्ठ में अतिशय लाभ होता है।
  26. पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीसकर लगाने से दाद और खुजली को ठीक करने में मदद मिलता है।
  27. पलाश की जड़ों को पीसकर 4-5 बूँद नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा बंद हो जाता है।
  28. अम्ल द्रव से पलाश-पत्तों को पीस कर लेप करने से दाह तथा जलन में लाभ होता है।
  29. ठंडे जल में पिसे हुए पलाश बीज का लेप करने से सूजन कम होता है।
  30. पलाश के फूलों की पुल्टिस बनाकर बाँधने से सूजन कम जाता है।
  31. 5-6 बूँद पलाश मूल अर्क को दिन में दो बार सेवन करने से अनैच्छिक वीर्यस्राव रुकता है और कामशक्ति प्रबल होती है।
  32. 2-4 बूँद पलाश बीज तेल को कामेन्द्रिय के ऊपर (सीवन सुपारी छोड़कर) मालिश करने से कुछ ही दिनों में सब प्रकार की नपुंसकता दूर होती है और प्रबल कामशक्ति जागृत होती है।
  33. पलाशबीज का रस दूध के साथ पीसकर बिच्छू ने जहां पर काटा है उस पर लेप करने से  दर्द के साथ विष का प्रभाव कम होता है।

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