तिंदुक (Gaub Persimmon)

     तेंदू एक प्रकार का फल है जो चीकू से भी मीठा और कई आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है। तेंदू के फल हल्के पीले रंग के होते हैं। तेंदू के पेड़ मध्यामाकार होते हैं।  इसके पत्तों से बीड़ी बनाई जाती है। इसकी लकड़ी चिकनी तथा काले रंग की होती है। इसका उपयोग फर्नीचर बनाने के लिए किया जाता है। चरक-संहिता से उदर्द प्रशमन महाकषाय तथा सुश्रुत-संहिता के न्यग्रोध्रादि-गण में इसका वर्णन मिलता है।

तेंदू के उपयोग

  1. फल के रस का अंजन यानि काजल की तरह लगाने से आँख संबंधी रोगों में फायदा मिलता है।
  2. तिंदुक, हरीतकी, लोध्र, मंजिष्ठा तथा आँवला के 1-3 ग्राम चूर्ण में मधु एवं कपित्थ रस मिलाकर छानकर 1-2 बूंद कान में डालने से कान दर्द में लाभ होता है।
  3. तेंदू  फल के जूस का गरारा करने से मुँह के छाले तथा गले का घाव भी जल्दी भरते हैं।
  4. फलों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से मुंह के छालों दूर होते हैं।
  5. तिन्दुक छाल की गोलियां बनाकर चूसने से खाँसी से राहत मिल सकती है।
  6. तिन्दुक त्वचा के पेस्ट को गम्भारी पत्ते से लपेट कर पुटपाक-विधि से रस निकाल कर 5-10 मिली रस में मधु मिलाकर सेवन करने से अतिसार या दस्त में लाभ मिलता है।
  7. 10-20 मिली तिंदुक छाल काढ़े को पीने से पेचिश (प्रवाहिका), अतिसार व मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
  8. तेंदू फल के गूदे को खिलाने से अतिसार में लाभ होता है।
  9. 1 ग्राम बीज चूर्ण का सेवन करने से अतिसार ठीक होता है।
  10. तिंदुक के पके हुए फल को खाने से मूत्रमार्ग की पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
  11. तेंदू के फल के रस में जल मिलाकर योनि का प्रक्षालन (धोने) करने से श्वेत प्रदर (सफेद पानी) में लाभ होता है।
  12. तिन्दुक फलों का काढ़ा बनाकर योनि का प्रक्षालन करने से योनिस्राव कम होता है।
  13. लकवा के कारण यदि जिह्वा-स्तम्भ या जीभ हिल नहीं रहा है तथा बोलने की शक्ति अस्पष्ट हो गई है तो, तिन्दुक जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से तथा 1-2 ग्राम छाल चूर्ण में 1 ग्राम मरिच चूर्ण मिलाकर जिह्वा में घिसने से लाभ होता है।
  14. तिन्दुक रस से तिन्दुक फल को पीसकर लेप करने से त्वचा की रंगत दूर हो जाती है तथा मुख के रंग तथा कान्ति की वृद्धि होती है।
  15. तिन्दुक काढ़े में घी मिलाकर आग से जले हुए स्थान का सिंचन व लेप करने से घाव भर जाता है।
  16. तिन्दुक छाल काढ़े में तिल मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
  17. 10-15 मिली तिंदुक छाल काढ़े में मधु मिलाकर पिलाने से ज्वर में लाभ होता है।
  18. तिंदुक की काष्ठ को घिसकर सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन कम होता है।
  19. जामुन तथा तिन्दुक या केंदू के फूल और फल के (1-3 ग्राम) पेस्ट में मधु तथा घी मिला कर खिलाने से बच्चों की हिचकी रुक जाती है।

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)