रुद्रजटा (Quail grass)

     समस्त भारत में यह शृंङ्गारिक पौधे के रूप में घरों के बाहर तथा बगीचों में लगाया जाता है। इसके पुष्प बहुत ही सुन्दर एवं आकर्षक होते है। जो देखने पर मुर्गे की कलगी जैसे दिखाई देते हैं। इसलिए इसे मुर्गकेश या लाल मुर्गा कहते हैं। इसके पुष्प पीत, गुलाबी, बैंगनी अथवा रक्त वर्ण के, मखमली तथा चपटे होते हैं। बीज कृष्ण वर्ण के, चपटे तथा चिकने व छोटे होते हैं।

रुद्रजटा के उपयोग

  1. 3-4 बूँद पत्र-स्वरस में समभाग जल मिलाकर नाक में डालने से नकसीर बन्द हो जाती है।
  2. खाँसी-500 मिग्रा रुद्रजटा बीज चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से खाँसी में लाभ होता है।
  3. 2-3 ग्राम पञ्चाङ्ग का क्वाथ बनाकर पीने से कास तथा श्वास में लाभ होता है।
  4. रुद्रजटा पञ्चाङ्ग में अर्जुन छाल मिलाकर इसका क्वाथ बनाकर पीने से हृद्शूल तथा हृद विकारों में लाभ होता है।
  5. अतिसार-रुद्रजटा के पुष्पों का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से अतिसार में लाभ होता है।
  6. रुद्रजटा के बीजों का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से प्रवाहिका व मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है।
  7. 2 ग्राम रुद्रजटा पञ्चाङ्ग में समभाग मकोय पञ्चाङ्ग तथा पुनर्नवा मूल मिलाकर क्वाथ पीने से यकृत् शोथ में लाभ होता है।
  8. पथरी-500 मिग्रा मूलचूर्ण को चावल के धोवन के साथ पीने से कुछ दिनों में छोटी पथरी गलकर निकल जाती है। इस अवधि में पथ्य रूप में दुग्ध का सेवन करना चाहिए।
  9. अत्यार्तव-रुद्रजटा के पुष्पों का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से आर्तव-विकारों का शमन होता है।
  10. कामशक्ति-वर्धनार्थ-रुद्रजटा के 1 ग्राम चूर्ण में 5 ग्राम मिश्री मिलाकर दुग्ध के साथ पीने से काम शक्ति बढ़ती है।
  11. 2-3 मिली पत्र-स्वरस में मिश्री तथा पानी मिलाकर इसका शरबत बनाकर पीने से अतिरक्तस्राव तथा रक्तप्रदर में लाभ होता है।

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)