मूषिकपर्णी (Kidney leaf morning glory)
मूषिकपर्णी के उपयोग
- 1-2 बूँद मूसाकानी पत्र-स्वरस को कान में डालने से कर्ण रोगों का शमन होता है।
- मुंह के छाले-मूसाकानी के पत्तों को चबाने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
- खाँसी-10 ग्राम मूसाकानी पञ्चाङ्ग को 200 मिली पानी में पकाकर छानकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से खाँसी में लाभ होता है।
- आंत्रकृमि-मूषाकर्णी चूर्ण को जौ के आटे में मिलाकर पुपूलिका (पूड़ी) बनाकर काञ्जी के साथ सेवन करने से आंत के कीड़ों का शमन होता है।
- पेट के कीड़े-5 मिली मूसाकानी पत्र-स्वरस को पिलाने से उदर कृमियों का शमन होता है।
- अफारा-मूसाकानी की जड़ को पानी में पीसकर पेट पर लगाने से आध्मान में लाभ होता है।
- मूत्र-विकार-मूसाकानी को काली मरिच के साथ पीसकर पिलाने से मूत्र-विकारों का शमन होता है।
- गर्भप्रदयोग-मूषाकर्णी मूल को पीसकर योनि में लगाने से गर्भधारण में बाधक योनिगत-दोषों का शमन होता है।
- आमवात-पौधे को पीसकर लगाने से आमवात में लाभ होता है।
- विसर्प-समभाग शैवाल, नलमूल, गोजिह्वा, मूषाकर्णी तथा निर्गुण्डी को पीसकर लेप करने से वातपित्तप्रधान विसर्प में लाभ होता है।
- अपस्मार-मूषाकर्णी स्वरस, शंखपुष्पी, कुष्ठ तथा वचा कल्क से विधिवत् पकाए हुए घृत को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से अपस्मार (मिरगी) में लाभ होता है।
- सूजन-मूसाकानी की जड़ को पीसकर उसमें समान भाग जौ का काढ़ा मिलाकर गुनगुना करके शोथयुक्त स्थान पर लगाने से शोथ का शमन होता है।
विष चिकित्सा् :
- मूषक-विष-चूहे के दंश-स्थान पर मूसाकानी को पीसकर लगाने से विष का प्रभाव कम हो जाता है।

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