आवर्तनी (East Indian screw tree)

     इसका क्षुप झेलम नदी के किनारे से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य, पश्चिम एवं दक्षिण भारत के वन्य प्रदेशों में पाया जाता है। इसका क्षुप लगभग 5 मी0 ऊचाँ होता है इसके फल मुड़े हुए होते हैं तथा इनके फलों का प्रयोग मरोड़युक्त पेचिश तथा अतिसार की चिकित्सा में किया जाता है। इसलिए इसे मरोड़फली कहते हैं।

आवर्तनी के उपयोग

  1. आवर्तनी फल को पीसकर कर्णपाली में लगाने से कर्णपाली के व्रणों का शीघ्र रोपण होता है।
  2. आवर्तनी फल स्वरस को 1-2 बूँद कान में डालने से कर्णशूल का शमन होता है।
  3. आवर्तनी फलों को एरण्ड तैल या नारियल तैल में पकाकर छानकर 1-2 बूँद तैल को कान में डालने से कर्णस्राव का शमन होता है।
  4. उदरशूल-1-2 ग्राम आवर्तनी फल चूर्ण का सेवन करने से मरोड़ युक्त उदरशूल का शमन होता है।
  5. मरोड़फली का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पिलाने से उदरशूल का शमन होता है।
  6. आंत्रकृमि-मरोड़फली में समभाग वायविडंग मिलाकर क्वाथ करके 10-20 मिली क्वाथ को पिलाने से उदरात्र कृमियों का शमन होता है।
  7. अफारा-500 मिग्रा मरोड़फली चूर्ण में काला नमक मिलाकर खाने से आध्मान (अफारा) में लाभ होता है।
  8. अतिसार-1 ग्राम मरोड़फली चूर्ण में 1 ग्राम इन्द्रयव चूर्ण मिलाकर देने से अतिसार में लाभ होता है।
  9. रक्तातिसार-1-1 मरोड़फली को पानी में भिगोकर, मसल-छानकर पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है।
  10. प्रमेह-मरोड़फली मूल छाल का क्वाथ बनाकर 15-20 मिली क्वाथ में मिश्री मिलाकर पिलाने से प्रमेह में लाभ होता है।
  11. पामा-मूल-त्वक् एवं फल को पीसकर लगाने से पामा का शमन होता है।
  12. ज्वर-समभाग अपामार्ग पञ्चाङ्ग तथा मरोड़फली फल का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पीने से ज्वर का शमन होता है।
  13. मरोड़फली तथा चिरायता को समान मात्रा में लेकर क्वाथ बना लें। इस क्वाथ को 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से ज्वर का शमन होता है।
  14. कृमि रोग-आवर्तनी की फलियों को 500 मिग्रा मात्रा में भूनकर बच्चों को खिलाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।

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