सेब (Apple)

     सुबह खाली पेट सेब खाने से बहुत तरह के रोगों को शरीर से दूर रखा जा सकता है। आयुर्वेद में सेब के फायदों का विस्तार से उल्लेख मिलता है। सेब लाल या हरे रंग का फल है, जो विटामिन से भरपूर होता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘मेलस डोमेस्टिका’ कहते हैं। सेब का पेड़ लगभग 3 से 7 मीटर तक ऊंचा होता है। इसकी छाल भूरे रंग की होती है। इसके फूल गुलाबी से सफेद रंग या खून के रंग के होते हैं। इसके फल मांसल और लगभग गोलाकार होते हैं। कच्ची अवस्था में सेब हरे रंग का, तथा स्वाद में खट्टा होता है। पक जाने पर लाल रंग का और मीठा होता है। सेब के बीज छोटा, काले रंग का तथा चमकीला होता है।

सेब के उपयोग

  1. सेब चबाकर खाने से लार अधिक बनती है, जो मुंह की साफ-सफाई करने के अलावा बैक्टीरिया को पनपने से भी रोकती है। इस प्रकार से सेब खाने से आपके दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
  2. सेब को पीसकर, पकाकर आँखों में बांधने से आँखों की बीमारियां दूर होती हैं।
  3. 1 गिलास सेब का रस निकाल लें। इसमें मिश्री मिलाकर सुबह के समय पिएं। इससे सूखी खांसी में लाभ होता है। इससे बेहोशी की समस्या में भी फायदा होता है। सूखी खांसी में भरपूर लाभ लेने के लिए रोजाना पके हुए मीठे सेब खाने चाहिए।
  4. रात को सोते समय दो सेब खाएं। ऐसा कम से कम 7 दिन तक करें। इससे पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर आ जाते हैं। सेब खाने के बाद रातभर पानी नहीं पिएं। खाली पेट सेब खाने से कब्ज दूर होती है। 
  5. सुबह के समय छिलके सहित सेब खाने से भी कब्ज की समस्या दूर होती है।
  6. सेब में टार्टरिक एसिड होने के कारण यह बहुत जल्दी पच जाता है। यह अपने साथ अन्य आहार को भी पचा देता है। इसके साथ ही, सेब के मुरब्बे का सेवन करने से आमाशय-संबधी रोगों में भी लाभ होता है।
  7. अधपके सेब का 5-15 मिली मात्रा में रस पिएं। इससे उल्टी बंद हो जाती है।
  8. पोस्त के दानों से बने काढ़ा में सेब का शर्बत मिलाकर पीने से खूनी पेचिश में लाभ होता है। 
  9. सेब के पत्तों को पीसकर लेप करने से त्वचा के रोग ठीक होते हैं। सेब के वृक्ष की जड़ को पीसकर दाद-खाज-वाले स्थान पर लगाएं। इससे लाभ होता है।
  10. सेब के पत्तों को पीसकर जले हुए स्थान पर लगाएं। इससे लाभ होता है।
  11. रोगभ्रम उस स्थिति को कहते हैं जिसमें व्यक्ति को रोगग्रस्त होने का भ्रम हो जाता है। व्यक्ति शरीर के किसी अंग में रोग की कल्पना करने लगता है, या रोग की चिंता करने लगता है। रोगभ्रम को अंग्रेजी में हाइपोकॉन्ड्रियाएक्स कहते हैं। आयुर्वेद में इसे ‘पित्तोन्माद’ कहा जाता है। इसके लिए सेब के शर्बत में ब्राह्मी-चूर्ण मिलाकर पिएं। इससे रोगभ्रम की स्थिति में लाभ होता है।
  12. सेब का मुरब्बा खाने से दिमाग तथा हृदय मज़बूत होता है। सेब दिमागी कोशिकाओं को स्वस्थ बनाने का काम करता है। विद्यार्थियों के लिए सेब स्मरण शक्ति और दिमागी शक्ति बढ़ाने का आसान स्रोत है।
  13. 100 मिली सेब के रस में 500 मिग्रा कर्पूर मिला लें। इसका सेवन कराने से बिच्छू का ज़हर उतर जाता है।

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