महाबला (Arrow leaf sida)

     समस्त भारत के मैदानी भागों तथा जंगलों व गांवों के आस-पास पड़ी परती भूमि में महाबला के पौधे पाए जाते हैं। महाबला का क्षुप 30-150 सेमी ऊँचा, छोटा, सीधा, शाखित, एकवर्षायु अथवा बहुवर्षायु होता है।

महाबला के उपयोग

  1. शिरशूल-पञ्चाङ्ग को पीसकर मस्तक पर लेप करने से शिरशूल का शमन होता है।
  2. दंतशूल-मूल का प्रयोग दातून के रुप में करने से दंतशूल का शमन होता है।
  3. फुफ्फुस क्षय-पञ्चाङ्ग का क्वाथ बनाकर पीने से फूफ्फूस क्षय में लाभ होता है।
  4. प्रवाहिका-मूल से निर्मित शीतकषाय (हिम) का सेवन करने से प्रवाहिका में लाभ होता है।
  5. अजीर्ण-मूल कल्क का सेवन करने से अजीर्ण का शमन होता है।
  6. त्रिदोषज मूत्रविकार-मूल तथा पत्र से निर्मित क्वाथ का सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र तथा अन्य त्रिदोषज मूत्रविकारों का शमन होता है।
  7. श्वेत प्रदर-मूल कल्क में मधु मिलाकर सेवन करने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।
  8. आमवात-पञ्चाङ्ग कल्क का लेप करने से आमवात तथा पेशी उद्वेष्टन में लाभ होता है।
  9. त्वचा रोग-मूल तथा पत्रों से निर्मित कल्क का लेप करने से क्षत एवं व्रण का शीघ्र रोपण होता है।
  10. ज्वर-पञ्चाङ्ग स्वरस को (10 मिली) प्रतिदिन दिन में तीन बार सेवन करने से सविरामी ज्वर में लाभ होता है।
  11. शोथ-पत्र कल्क का लेप करने से सर्वांङ्ग शोथ में लाभ होता है।

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