उड़द ( Black gram)

     उड़द एक दलहन होता है और इसका तासीर भी ठंडा होता है। इसलिए उड़द दाल को घी में हींग का छौंक डालकर बनाया जाता है। इसमें जो अनगिनत गुण होते हैं वह न सिर्फ खाना को स्वादिष्ट ही बनाता है वरन् कई तरह के बीमारियों के लिए वरदान जैसा साबित होता है। उड़द दाल में बहुत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं जिसके कारण इस दाल को सिर दर्द, नकसीर, बुखार, सूजन जैसे अनेक बीमारियों के इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। उड़द काली तथा हरी आदि कई तरह की होती है। सब प्रकार के उड़दों में काले रंग की उड़द उत्तम मानी जाती है। वैद्यक ग्रन्थों में अनेक पौष्टिक प्रयोगों में उड़द की प्रशंसा की गई है। वास्तव में आमिष भोजियों के लिए जिस प्रकार मांस पुष्टिदायक माना जाता है, उसी प्रकार या उससे बढ़कर निरामिष भोजियों के लिए माष अर्थात् उड़द मांसवर्धक और पुष्टिकर होता है।

उड़द के उपयोग

  1. 50 ग्राम उड़द को 100 मिली दूध में पकाकर उसमें घी डालकर खाने से वात के कारण जो सिर दर्द होता है उससे राहत मिलती है।  
  2. उड़द को जलाकर उसकी भस्म बनाकर, उसमें चतुर्थांश अर्कदूध तथा सरसों तेल मिलाकर लेप बना लें। इसको सिर पर लगाने से सिर के रोग, गंजापन, बालों की सफेदी आदि कम होती है।
  3. उड़द के आटे का तालू पर लेप करने से नाक से खून (नकसीर) आना कम होता है।
  4. उड़द का यूष या जूस बनाकर 10-20 मिली की मात्रा में सेवन कराने से लीवर की बीमारियों से राहत मिलती है। 
  5. उड़द, बला, केवाँच, कत्तृण, रास्ना, अश्वगंधा तथा एरण्ड को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाएं फिर 25-30 मिली काढ़े में हींग तथा सेंधानमक मिलाकर पिएं तथा भोजन करने के 12 घण्टे बाद जिस तरफ में दर्द है उस तरफ के नाक के छेद द्वारा 5-10 मिली की मात्रा में ग्रहण करने से लकवा, गर्दन की जकड़ाहट, कान का दर्द (कर्णशूल) एवं अर्दित रोग (Facial paralysis) में 1 सप्ताह में आराम मिलने लगता है।
  6. समान मात्रा में उड़द, अतिविषा, कपिकच्छु, एरण्ड, रास्ना, सौंफ तथा सेंधानमक के पेस्ट में चार गुना तेल, सोलह गुना उड़द तथा बला का काढ़ा मिलाकर विधिवत् तेल पकाकर प्रयोग करने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
  7. उड़द के 20-25 मिली जूस में 500 मिग्रा सोंठ चूर्ण मिलाकर पिलाने से पक्षाघात या लकवे में लाभ होता है।
  8. प्रतिदिन उड़द, कपिकच्छु, एरण्ड तथा बलामूल से बने 10-20 मिली काढ़ा में हींग तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से वात की बीमारी कम होती है।
  9. सेंधानमक एवं उड़द के काढ़े को भोजन के बाद पीने से अंगों की जकड़ाहट तथा सिरदर्द कम होता है।
  10. माष तेल, बृहन्माष तेल तथा महामाष तेल का 1-2 बूंद नस्य लेने से (नाक में डालने पर) या मालिश आदि विविध-प्रकार से बाहरी एवं भीतरी प्रयोग करने से वात संबंधी रोग से राहत मिलती है।
  11. माषादि तेल का नस्य लेने से या स्नान करने से ग्रीवास्तम्भ, गर्दन की जकड़ाहट, हाथ का दर्द, दौरे पड़ना,  हाथ पैरों का कंपन, सिर का हिलना, तथा अन्य वात की बीमारियों में फायदेमंद होता है।
  12. उड़द के 20-25 मिली जूस में एरण्ड छाल को पकाकर, छानकर पिलाने से गठिया में लाभ होता है।
  13. उड़द के आटे से बने हुए खाने को मक्खन के साथ खाकर, दशमूल काढ़े का सेवन करने से अर्दित रोग या मुँह के लकवे में बहुत फायदा पहुँचता है।
  14. उड़द को पीसकर घाव/ व्रण के ऊपर बांधने से पीब निकल जाता है तथा घाव ठीक हो जाता है।
  15. उड़द का जूस बनाकर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से बुखार कम होता है।
  16. उड़द को पीसकर प्रभावित स्थान पर बांधने से शोथ (सूजन) में लाभ होता है।
  17. उड़द के आटे में थोड़ा नमक, थोड़ी सोंठ और थोड़ी हींग मिलाकर, उसकी रोटी बनाकर एक तरफ से सेंक लें और उसको उतारकर कच्चे भाग की तरफ तिल का तेल लगाकर दर्द वाले स्थान पर बांधने से दर्द कम होता है।
  18. साठी चावल के भात में घी मिलाकर, उड़द जूस के साथ सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि तथा वीर्य संबंधी रोगों के उपचार में सहायता मिलती है।
  19. उड़द की दाल को दूध में पकाकर, घी से छौंक कर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
  20. समान मात्रा में उड़द, विदारीकन्द तथा सफेद गुञ्जा के 5 ग्राम चूर्ण में मधु एवं घी मिलाकर सेवन करने के बाद दूध पीने से वीर्य की वृद्धि होती है।
  21. उड़द एवं केवाँच फल की खीर बनाकर उसमें घी, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है।
  22. 50-100 ग्राम उड़द के चूर्ण में मधु, घी तथा आँवला रस मिला कर अथवा आँवला रस के साथ सेवन करने से काम शक्ति की वृद्धि होती है।
  23. उड़द के दो टुकड़े कर, घी में डुबाकर फिर उसकी खीर बनाकर, उसमें घी तथा मिश्री मिलाकर सेवन करने से कामशक्ति की वृद्धि होती है।
  24. समान मात्रा में उड़द, शालि चावल, गेहूँ, जौ तथा पिप्पली के चूर्ण को घी में भूनकर, 5 ग्राम चूर्ण में शर्करा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से कामशक्ति की वृद्धि होती है।
  25. 375 ग्राम उड़द की दाल के चूर्ण को बबूल के कच्चे फल स्वरस की भावना देकर 50-50 ग्राम श्वेत मुसली, तालमखाना, बीजबन्ध, 100 ग्राम सालिम तथा 5 ग्राम वंग भस्म के चूर्ण में मिलायें। इस चूर्ण को 2-5 ग्राम की मात्रा में लेकर मिश्री-युक्त दूध के साथ एक मास तक सेवन करने से पूयमेह या गोनोरिया तथा प्रमेह या डायबिटीज में फायदा मिलता है व कामशक्ति बढ़ती है।

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