काजू (Cashew nut)
काजू एक प्रकार का फल होता है जो सूखे मेवे में शामिल होता है। काजू के गुण यानि पौष्टिक गुण इतने है कि आयुर्वेद में काजू को कई तरह के बीमारियों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। काजू दांत दर्द से लेकर दस्त,कमजोरी जैसे अनेक रोगों से राहत दिलाने में मदद करता है। काजू को यूं ही खाने से भी न सिर्फ इसके स्वास्थ्यवर्द्धक गुणों का लाभ मिलता है बल्कि काजू को व्यंजन में डालने से व्यंजन का जायका बदलता है। इसके साथ ही काजू खाने से सेहत और सौन्दर्य में भी निखार आता है। काजू छोटा, लगभग 12 मी ऊँचा, मध्यम आकार का आम के वृक्ष के जैसा सदा हरा-भरा रहने वाला वृक्ष होता है। इसकी शाखाएं मुलायम होती है। काजू के वृक्ष की छाल से पीले रंग का निचोड़ या रस निकलता है। काजू का पत्ता कटहल के पत्ता जैसा होता है,किन्तु सुगन्धित होता है। इसके फूल छोटे, गुलाबी धारियों से युक्त, पीले रंग के होते हैं, जिनमें सफेद गिरी होती है, इसे ही काजू कहते हैं। इसके ताजे फलों के रस से एक प्रकार का मद्य तथा फलों के छिलकों से काला व कड़वा रस युक्त तेल निकाला जाता है। यह तेल त्वचा में लगने से त्वचा पर फफोले पड़ जाते हैं।
काजू के उपयोग
- काजू का पत्ता एवं छिलके का काढ़ा बनाकर गरारा करने से दांत का दर्द कम होता है तथा दांत के जड़ में जो घाव होता है उससे भी राहत मिलती है।
- 10 मिली काजू के फल के रस में मधु मिलाकर, दिन में एक बार सेवन करने से दस्त (अतिसार) में लाभ होता है।
- 5-10 मिली काजू के छिलके का काढ़ा या 1-2 ग्राम छिलके के चूर्ण का सेवन करने से उदकमेह में लाभ होता है।
- 10-15 मिली काजू फल के रस में मधु मिलाकर, दिन में एक बार सेवन करने से मूत्र संबंधी रोग, मूत्राशय में सूजन आदि में लाभ होता है।
- 10-15 मिली काजू फल के रस में मधु मिलाकर सेवन करने से कष्ट से आराम मिलता है।
- काजू फल के रस को जोड़ों में लेप करने से आमवात जन्य दर्द में लाभ होता है।
- काजू के शाखा को पीसकर लगाने से त्वचा संबंधी का समस्याओं से राहत मिलती है।
- काजू के छिलके का तेल लगाने से शरीर के छोटे-छोटे काले मस्से नष्ट हो जाते हैं।
- कुष्ठ के कारण त्वचा में जो शून्यता आती है इस तेल को लगाने से वह मिटती है।
- 2-4 काजू को 100 मिली दूध में मिलाकर खाने से कमजोरी दूर होती है तथा शरीर पुष्ट होता है।
- काजू के छिलके का तेल लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।
- काजू के रस को सूजन वाले जगह पर लगाने से लाभ मिलता है। इससे प्रभावित स्थान का सूजन और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।
- पित्त-प्रकृति वाले व्यक्तियों को इसका सेवन अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
Comments
Post a Comment