गोभी ( Cauliflower,Cabbage,Kohlrabi )

     गोभी तीन तरह के होते हैं, फूलगोभी, बंदगोभी या पत्रगोभी और गांठगोभी। गोभी के स्वास्थ्यवर्द्धक  गुणों के कारण आयुर्वेद में इसको औषधि के रुप में प्रयोग किया जाता है। 
पुष्प गोभी  मधुर, उष्ण, गुरु, कफवात कम करने वाला, ग्राही, बल बढ़ाने वाला, देर से हजम करने वाला, स्तम्भक, अग्निमांद्यकारक तथा सूजन कम करने वाली होती है। इसके पत्ते मधुर, शीत, मूत्रल, कृमिनाशक, अनॉक्सीकारक तथा मृदुकारी होते हैं।
बंधा गोभी खाने में रूची बढ़ाने के साथ-साथ , वातकारक, मधुर, गुरु, शीतपित्तशामक, मूत्रल, हृद्य, कृमिनाशक, आध्मानकारक, मृदुकारी तथा दीपन होती है। इसके बीज मूत्रल, विरेचक, आमशयोत्तेजक तथा कृमिरोधी होते हैं। इसके पत्र तिक्त, आमशयोत्तेजक, शीत, पाचक, हृद्य तथा शीतादरोधी होते हैं। यह जीवाणुनाशक, पूयरोधी, व्रणनाशक, शीतादरोधी, मृदुकारी, कवकनाशी तथा अल्परक्तशर्कराकारक क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है।
गांठ गोभी मधुर, शीत, गुरु, बलकारक, रुचिकर, दुर्जर (देर से पचने वाली), ग्राही तथा शीतल होती है। इसको कम मात्रा में उबालकर खाने से यह भेदक तथा अधिक उबालकर खाने से ग्राही होती है। यह कफ, कास, प्रमेह व श्वास में लाभप्रद तथा वात व पित्त प्रकोपक होती है।



गोभी के  उपयोग

  1. फूलगोभी की जड़ का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले के दर्द तथा गले के घाव में लाभ होता है तथा 15-20 मिली काढ़ा पिलाने से बुखार में लाभ होता है।
  2. पुष्पगोभी का शाक बनाकर खाने से भूख बढ़ती है, पेट दर्द तथा दस्त से राहत मिलती है।
  3. पुष्पगोभी के पत्ते का शाक बनाकर खाने से अतिसार या दस्त में लाभ होता है तथा पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
  4. फूल गोभी को घी में भूनकर थोड़ा सेंधानमक मिलाकर खिलाने से अर्श में लाभ होता है।
  5. बंदगोभी के पत्ते के रस को आंखों में लगाने से आँखों में दर्द जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
  6. बंदगोभी के 5-10 मिली पत्ते के रस को पीने से पुरानी खांसी तथा खून वाली उल्टी से राहत मिलती है। 
  7. पत्रगोभी के 10-15 मिली पत्ते के काढ़े  में मिश्री मिलाकर पिलाने से मूत्र संबंधी समस्या में लाभ होता है।
  8. बंदगोभी के 10-15 मिली पत्ते के रस में हल्दी चूर्ण तथा मधु मिलाकर पिलाने से प्रमेह या मधुमेह में लाभ होता है।
  9. पत्तागोभी  के पत्तों को पीसकर लेप करने से आमवात या गठिता तथा त्वचा संबंधी बीमारियों में आराम मिलता है।
  10. बंदगोभी के पत्तों को पानी में उबालकर पिलाने से मदात्यय में लाभ होता है।
  11. गांठगोभी का शाक (सब्जी) बनाकर खिलाने से खाने की इच्छा बढ़ती है।
  12. गांठगोभी के पत्तों का शाक बनाकर खाने से अर्श (बवासीर) में लाभ होता है।
  • गोभी में ग्लूकोसाइनोलेट, आइसोथायोसायनेट पाया जाता है; अत: इसका ज्यादा सेवन करने से यह अवटुग्रंथि (Thyroid gland) के काम में बाधा उत्पन्न करता है। साथ ही इसमें इन्डोल-3-कार्बिनोल पाया जाता है, जो स्तन-कैंसर होने का कारण बन सकता है।
  • इसके अत्यधिक सेवन से पेट में गैस, खाने में  अरुचि,  पथरी, पेट फूलना, कान में दर्द एवं किडनी की बीमारी आदि रोगों का कारण बन सकती  हैं।
  • पत्र गोभी का सेवन अत्यधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। इसको अत्यधिक मात्रा में खाने से यह पेट फूलने तथा पेट दर्द की समस्या हो सकती है।

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