नारियल (Coconut)

     नारियल का फल  और नारियल का पानी दोनों के स्वास्थ्यवर्द्धक गुण अनगिनत होते हैं। इसलिए आयुर्वेद में कई बीमारियों के लिए दोनों का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में मूल, नारियल जल, फल की गिरी, पुष्प, नारियल जटा, तैल एवं क्षार का प्रयोग औषधी के लिए किया जाता है। उष्णकटिबंधीय समुद्रतटवर्ती प्रदेशों में पाया जाता है। भारत में यह विशेषत केरल, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात एवं दक्षिण-भारत में पाया जाता है। यह लगभग 12-24 मी ऊँचा, खजूर या ताड़ के सदृश सीधा, शाखा-प्रशाखाओं से रहित, बहुवर्षायु वृक्ष होता है। इसके फल बृहत्, 20-30 सेमी लम्बे, अण्डाकार, पीताभ अथवा हरिताभ वर्ण युक्त रेशेदार, पक्वावस्था में भूरे वर्ण के होते हैं। फल के भीतर श्वेत वर्ण की अन्तफलभित्ति होती है, जिसे गिरी कहते हैं। कच्ची अवस्था में फल के भीतर मधुर जल भरा रहता है, जो पकने के बाद सूख जाता है।

नारियल के उपयोग

  1. नारियल के जल (5-10 मिली) को पीने से सिरदर्द, सूर्यावर्त्त तथा अर्धावभेदक आदि बीमारियों से राहत मिलती है। 100 मिली नारियल के दूध में 1 ग्राम कट्फल चूर्ण मिलाकर, उबालकर मावा समान गाढ़ा बनाकर, घृत में भून कर तथा मिश्री, बादाम, केसर आदि डालकर सेवन करने से सिर दर्द कम होता है।
  2. नारियल तेल को स्कैल्प पर नियमित रूप से लगाने से नए बालों के आने की संभावना बनती है।
  3. नारियल के पानी को नाक से लेने से अर्धावभेदक या माइग्रेन में लाभ होता है।
  4. नारियल के जड़ का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले के घाव शीघ्र भर जाते हैं।
  5. रोहिणी में जो प्यास लगती है उसमें कच्चे नारियल जल का सेवन करने से प्यास लगने का अनुभव कम होता है।
  6. नारियल की जटा की 65 मिग्रा भाग को पानी में घोलकर उस पानी को छानकर पिलाने से हिचकी बन्द होती है।
  7. नारियल के जल से सत्त् को घोलकर उसमें चीनी  मिलाकर पीने से पित्त-रोग तथा हृदय रोगों में लाभ होता है एवं शरीर के कंपन, प्यास, बेहोशी और भ्रम जैसे लक्षणों से राहत मिलती है।
  8. नारियल गिरी के काढ़े में मिश्री, मधु तथा पीपल का चूर्ण मिला कर सेवन करने से पित्त के कारण जो उल्टी होती है उसमें शीघ्र लाभ मिलता है।
  9. नारियल जड़ से बने काढ़े में हींग डालकर पीने से पेट की कृमियां दूर होती है।
  10. नारियल जल का सेवन करने से भूख कम लगने की बीमारी, दस्त एवं प्रवाहिका से राहत मिलती है।
  11. नारियल पुष्प के 1-2 ग्राम के सूक्ष्म चूर्ण को दूध अथवा दही के साथ सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र में लाभ होता है। इसके अलावा कच्चे नारियल (डाभ) के जल का सेवन करने से मूत्रकृच्छ्र तथा मूत्र संबंधी रोग का शमन होता है। जड़ का काढ़ा तथा नारियल के भीतर के अंश का सेवन भी मूत्रकृच्छ्र में लाभप्रद होता है।
  12. डाभ (कच्चे नारियल) के जल का सेवन करने से किडनी की सूजन कम होती है।
  13. डिलीवरी के बाद यदि गर्भाशय में दर्द हो तो नारियल की गिरी खिलाने से मां को दर्द से जल्दी आराम मिलने में आसानी होती है।
  14. पुराने नारियल के तेल का लेप करने से घाव भर जाता है। अल्सर के दर्द से आराम पाने में नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से जल्दी राहत मिलता है।
  15. कच्चे नारियल (डाभ) के जल से चेहरे को धोने से मुँहासे, पिड़िका तथा झाँईयां कम होती है एवं मुख की कान्ति यानि चेहरे का ग्लो बढ़ता है। चेहरे के लिए नारियल पानी का लाभ दाग-धब्बों को दूर करने में मिलता है।
  16. कच्चे नारियल के जल से सिक्त रूई के फाहों को स्मॉल पॉक्स पर रखने से तथा नारियल जल से ही धोने से धीरे-धीरे दाने कम होते हैं तथा दाग कम होते हैं। नारियल पानी के फायदे से चेचक का उपचार करने से लक्षणों से राहत मिलने में आसानी होती है।
  17. पुराने नारियल की गिरी को बारीक कूटकर उसमें एक चौथाई पिसी हुई हल्दी मिलाकर चोट तथा मोच में लगाने से लाभ होता है।
  18. नारियल गिरि का रस निकाल कर, रात में पीने से जीर्ण-ज्वर या बुखार कम होता है।
  19. पुष्प कल्क से निकाले तेल अथवा पुष्प कल्क मिश्रित तेल का लेप करने से सूजन कम होता है।

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