खीरा (Cucumber)

     प्रायः खीरा का सेवन सलाद के रूप में किया जाता है लेकिन इसके अलावा भी खीरा का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है। खीरा पचने में भारी, पित्त को शांत करने वाला, कफ और वात को बढ़ाने वाला, मूत्र रोग में फायदेमंद होता है। यह मोटापा कम करने और पीलिया रोग को ठीक करने का काम आता है। पथरी को गलाता है। उलटी को रोकता है। इसके बीज समान गुण वाले ही होते हैं। आकार तथा रंग-रूप के आधार पर खीरा की कई प्रजातियां होती हैं। इसकी फैलने वाली और पेड़ों पर चढ़ने वाली लता होती है। खीरे का ही एक और प्रकार अफ्रीका मूल का है जिसका नाम है बालम खीरा जो दिखने में और गुणों भी खीरे के जैसा ही होता है।

खीरा के उपयोग

  1. खीरे को पीसकर आंखों के बाहर चारों तरफ लेप लगाने से आंखों के बाहर होने वाले काले धब्बे मिटते हैं।
  2. खीरे के टुकड़ों को भी आँख पर रखने से आँखों को ठंडक मिलती है।
  3. खीरे के पत्तों का काढ़ा बनायें। 10-20 मि.ली. काढ़े में आधा ग्राम जीरा चूर्ण मिलाकर सेवन करने से गले के रोगों में लाभ होता है।
  4. पेशाब करने में तकलीफ होने पर रोगी भोजन में खीरे का सेवन करें। इससे लाभ होता है।
  5. खीरे के बीज का 2-4 ग्राम काढ़े को दूध के साथ नियमित पीने से कुछ दिनों में पेशाब की जलन और पेशाब में चीनी आने में लाभ होता है।
  6. तिल तथा खीरे में बीजों को समान मात्रा में लेकर दूध के साथ पीस लें। 2-4 ग्राम काढ़े में घी मिलाकर पीने से पेशाब संबंधी परेशानी ठीक होती है। इससे रुक-रुक कर पेशाब आने की समस्या ठीक होती है।
  7. खीरे का तेल पेशाब करने संबंधी विकार में लाभकारी होता है।
  8. यदि पेशाब न बन रहा हो तो खीरे के बीज के 2-4 ग्राम काढ़े को खट्टी कांजी तथा लवण के साथ मिला लें। इसका सेवन करने से पेशाब बनने लगता है।
  9. खीरे के पत्तों को पीस-छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर 10-15 मि.ली. मात्रा में पिलाने से पेशाब खुल कर आता है और मूत्र विकारों में लाभ होता है।
  10. खीरे के 2-4 ग्राम बीजों को दही के साथ नियमित सेवन करने से पथरी घुल कर निकल जाती है।
  11. खीरे को पीसकर पूरे चेहरे, आँख तथा गले पर लगाएं। इसे लगभग 30 मिनट तक इसी स्थिति में छोड़ देें। इससे यह मुँहासों तथा रुखी त्वचा की परेशानी ठीक होती है।
  12. खीरा को पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाकर घाव की सूजन पर ऊपर से लेप करने से सूजन को कम करता है।
  13. इसे अगर आप इसे मवाद वाले स्थान पर लगाएंगे तो यह  निश्चित स्थान पर मवाद को जमा करने में सहायता करता है।
  14. फ्लू होने पर यदि वायु एवं कफ बहुत बढ़े हुए हों तो खीरा खाकर बाद में मट्ठा पीना चाहिए। मट्ठे में बनाया खीरे का रायता भी ले सकते हैं। इसके साथ ही भांप से स्नान करना चाहिए मतलब पूरे बदल में भांप लगाना चाहिए।
  15. खीरे के गूदे को पीसकर पैर के तलवों पर मालिश करने से नींद ना आने की परेशानी और आँखों की जलन में लाभ होता है।

खीरा के अधिक प्रयोग से ये नुकसान हो सकता हैः-

  • गैस यानी वायुविकार
  • अपच की समस्या
  • एसिडिटी की परेशानी
  • खट्टी डकार इसको ठीक करने के लिए मट्ठा पीना चाहिए।
  • खीरा की कुछ प्रजातियां कड़वी भी होती हैं। उनका सेवन नहीं करना चाहिए।

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