कटहल (Jackfruit)
कटहल एक ऐसा फल है जिसको कच्चा हो तो कटहल की सब्जी के रूप में और पका हो तो फल के रुप में खाते हैं। कटहल के पकने पर उसका कोवा निकालकर खाया जाता है। इसमें विटामिन ए, सी, बी6, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नेशियम आदि होते हैं। कटहल फल मीठा, हजम करने में मुश्किल, शक्ति प्रदान करने वाला, शुक्राणु यानि स्पर्म की संख्या बढ़ाने वाला, कफ और वातपित्त को कम करने के साथ-साथ जलन कम करने में भी फायदेमंद होता है। कच्चा कटहल मीठा होता है। लेकिन जैसा कि पहले ही बताया गया है कि कटहल को हजम करना मुश्किल होता है, इसलिए यह वजन कम करने में मदद करता है। कटहल का जड़ घाव को ठीक करने में सहायक होता है। कच्चा कटहल का फल मीठा होने के बावजूद इसका फूल कड़वा होता है। पका हुआ कटहल खाने में स्वादिष्ट होता है। यह वजन बढ़ाने वाला, शक्तिवर्द्धक, देर से पचने वाला, स्पर्म बढ़ाने वाला और कफपित्त कम करने लाभदायक होता है। कटहल के बीज एस्ट्रीजेंट प्रकृति वाला, शीतल, मधुर और कफपित्त को ठीक करने वाला होता है।
कटहल के उपयोग
- कटहल के जड़ को पीसकर-छानकर उसका रस निकालकर, 1-2 बूंद नाक में डालने से सिर के दर्द से राहत मिलती है।
- गर्मी में या ठंड में नाक से खून निकलने पर 8-10 कटहल के बीज का काढ़ा बनाकर पीने से नाक से खून निकलना बंद हो जाता है।
- 10 मिली कटहल फल के रस में 125 मिग्रा काली मिर्च का चूर्ण तथा शर्करा मिलाकर सेवन करने से भूख अच्छी लगती है।
- 10-20 मिली कटहल के जड़ का काढ़ा बनाकर सेवन करने से अतिसार ठीक होने में मदद मिलती है।
- 1-2 कटहल के फूलों को पानी में पीसकर पिलाने से विसूचिका या हैजा ठीक होने में मदद मिलती है।
- कटहल के मध्य भाग से काढ़ा बना लें और 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से दर्द से राहत मिलती है।
- लिम्फ नोड्स में सूजन होने पर प्रतिदिन कटहल के जड़ को पीसकर वहां पर लेप करने से पूयस्रावयुक्त अपची से राहत मिलती है।
- कटहल के पत्ते का काढ़ा बनाकर प्रभावित स्थान को धोने से खुजली या पामा जैसे त्वचा संबंधी समस्याओं से आराम मिलता है।
- फोड़ो के दर्द से राहत पाने या जल्दी सूखाने के लिए कटहल के पत्तों के रस का लेप करने से आराम मिलता है। यहां तक कटहल के पत्तों का रस सूजन और खूजली में भी फायदेमंद होता है।
- कटहल के पत्तों को तेल में भूनकर, बचे हुए सरसों के तेल में मिलाकर लेप करने से त्वचा के रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है।
- कटहल के वृक्ष तथा फल से जो दूध मिलता है उसको सूजन वाले स्थान पर लगाने से तथा व्रण पर लगाने से लाभ होता है या कटहल के फल तथा वृक्ष से प्राप्त दूध को सिरके में मिलाकर लेप करने से ग्रन्थि के सूजन तथा घाव के फूट जाने पर लाभ मिलता है।
- 10-20 मिली कटहल के तने का काढ़ा बनाकर पीने से मिर्गी में लाभ मिलता है।
- ताल, नारियल, फणस या कटहल आदि फलों से प्राप्त तेल से मालिश करने पर वात के कारण जो दर्द होता है वह कम होता है।
- 3-4 चम्मच कटहल के फल का रस आधा कप दूध में मिलाकर पीने से थकावट महसूस होना कम होता है।
- कटहल के फल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए खाली पेट कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- कटहल सेवन के बाद पान खाने से शरीर पर विष जैसा प्रभाव पड़ता है।
- कटहल का फल कब्ज दूर करने में सहायता करता है। इसलिए इसका सेवन उचित मात्रा में करना चाहिए।
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