भिंडी (Ladiesfinger)
भिंडी का प्रयोग भिंडी की सब्जी के रूप में किया जाता है। इसके फल अंगुली के समान लम्बे होते हैं। भिंडी का पूरा पौधा रोमों से युक्त होता है। इसके फूल पीले रंग के होते हैं। इसके फल हरे रंग के होते हैं। भिंडी के फल आगे की तरफ से नुकीले, या पतले होते हैं। भिंडी के अन्दर सफेद रंग के गोलाकार, चिपचिपे द्रव्य से युक्त अनेक बीज होते हैं। भिंडी के प्रयोग से मुंह का स्वाद अच्छा हो जाता है, और वात-पित्त रोग के साथ-साथ मल संबंधी परेशानी भी दूर होती है।
भिंडी के उपयोग
- भिंडी के पत्तों को पीसकर घाव पर लगाएं। इससे घाव जल्दी ठीक हो जाता है।
- भिण्डी के पत्ते के रस को बीमार त्वचा पर लगाएं। इससे त्वचा रोग में तुरंत लाभ होता है।
- भिंडी के फल को पीसकर लेप बना लें। इसे खुजली वाले स्थान पर लगाएं। इससे खुजली ठीक हो जाती है।
- दस्त की बीमारी में भिण्डी के फलों को मसल लें। इसमें मिश्री मिला लें। इसका सेवन करें।
- भिण्डी के फल की सब्जी बनाकर खाएं। इससे पेचिश में लाभ होता है।
- भिण्डी के फूलों का काढ़ा बना लेना है। इसमें 10-15 मिली मिश्री मिलाकर सेवन करना है। इससे पेशाब में जलन की परेशानी ठीक हो जाती है।
- भिण्डी के फल का काढ़ा बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीएं। इससे मूत्र रोग ठीक होता है।
- सुजाक एक यौन रोग है, जो स्त्री या पुरुष किसी को भी हो सकता है। कई पुरुषों में सुजाक के लक्षण दिखाई नहीं पड़ते। सामान्यतः पुरुषों में इस बीमारी में पेशाब करते समय जलन होने लगते हैं। लिंग से सफेद, पीला या हरा स्राव होता है। इसी तरह महिलाओं में भी पेशाब करते समय दर्द, या जलन होती है। मासिक धर्म के बीच योनि से खून भी निकलता है। इसमें 1-2 ग्राम भिण्डी की जड़ के चूर्ण में मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।
- 5-10 मिली भिण्डी फल का काढ़ा का सेवन करने से भी सुजाक में लाभ होता है।
- 15-20 मिली फल का काढ़ा बनाकर सेवन करें। इससे ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
- योनि से संबंधित विकारों में भिण्डी की जड़ का पेस्ट बना लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। एक माह तक सेवन करना है। इससे योनि से संबंधित रोगों में लाभ होता है।
- भिण्डी के फलों को मसल लें। इसमें मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से वीर्यस्राव की परेशानी में लाभ होता है।
- भिंडी में विटामिन सी, विटामिन ई और जिंक जैसे कुछ तत्त्व पाए जाते हैं, जो कि आँखों की रोशनी को स्वस्थ रखने में सहयोगी होते है।
- भिण्डी के पत्तों को पीसकर जलने वाले स्थान पर लगाएं। इससे जलन शांत हो जाती है।
- खांसी में भिंडी का सेवन ना करें।
- पाचनतंत्र विकार (मन्दाग्नि) में भिंडी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- वात रोग में भिंडी का सेवन करने से नुकसान हो सकता है।
- साइनस (पीनस रोग) में भिण्डी का सेवन नहीं करना चाहिए।
- भिंडी का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से कब्ज की परेशानी हो सकती है।
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