लीची (Litchi)

     लीची का पेड़ मध्यम आकार का होता है। इसके फल गोल और कच्ची अवस्था में हरे रंग के होते हैं। ये पकने पर मखमली-लाल रंग के हो जाते हैं। फल के अन्दर का गूदा सफेद रंग का, मांसल और मीठा होता है। प्रत्येक फल के अन्दर भूरे रंग का बीज होता है। आयुर्वेद में लीची सिर्फ अपने मधुर स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अनेक औषधीय गुणों के कारण भी जाना जाती है। लीची गर्म प्रकृति वाली फल है, जो गठिया के दर्द, वात तथा पित्त दोष को कम करती है।

लीची के उपयोग

  1. लीची के पेड़ की जड़ या तने की छाल का काढ़ा बना लें। इससे कुल्ला करने से मुंह के रोग में फायदा पहुंचता है।
  2. लीची फल, मज्जा या गूदे (2-4 ग्राम) को कांजी में पीस लें। इसका सेवन करने से पेट संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है।
  3. लीची के पेड़ की जड़, छाल और फूल का काढ़ा बना लें। इसे गुनगुना करके गरारा करें, इससे गले का दर्द ठीक हो जाता है।
  4. लीची के बीज का प्रयोग तंत्रिका-तंत्र विकारों के इलाज में कर सकते हैं। 
  5. लीची के कच्चे फल का प्रयोग बच्चों के चेचक रोग की चिकित्सा  में किया जाता है।
  6. लीची के बीज का काढ़ा बना लें। इसे 10-15 मिली मात्रा में पिएं। इससे अंडकोष के दर्द और सूजन से राहत मिलती है। इससे अंडकोष की जलन भी खत्म हो जाती है।


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