खरबूज (Muskmelon Fruit)
खरबूजा अपनी मिठास एवं स्वाद के लिए बहुत लोकप्रिय है। खरबूज के बीजों की गिरी से मेवा बनाया जाता है जिसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की मिठाई में किया जाता है। खरबूज, ककड़ी, फूट एक ही जाति के फल (chibud fruit) है। इन फलों को ताजा ही खाया जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में खरबूजा की कई उपजातियां मिलती हैं, किन्तु गुणों में विशेष अन्तर नहीं होता है। खरबूज कई रंगों में मिलता है, लेकिन सामान्यतः यह पकने पर हरा से पीला या नारंगी रंग का हो जाता है। इसके फल लम्बी लताओं में लगते हैं। इसकी लता पतली, जमीन पर फैलने वाली, तरबूज की बेल जैसी, और मोटी जड़ वाली होती है। इसमें 90 प्रतिशत तक पानी होता है। इसलिए गर्मियों में खरबूजा का सेवन बहुत लाभ देता है। खरबूज के बीजों (magaz seeds) में 40-50 प्रतिशत तेल पाया जाता है। खरबूज का उपयोग सलाद के रूप में होता है। कच्चे फलों का उपयोग ग्रामीण क्षे़त्रों में सब्जी के रूप में भी किया जाता है।
खरबूजा के उपयोग
- खरबूजे की बीज (magaz seeds) को घी में भून लें। इसे मिश्री की चासनी में डालकर सेवन करें। इससे सिरदर्द में बहुत आराम मिलता है। आप इसमें इच्छानुसार मावा डालकर लड्डू भी बना सकते हैं।
- खरबूजे के बीजों का काढ़ा बनाकर गरारा करें। इससे गले की जलन में बहुत आराम मिलता है।
- खरबूजे के बीजों तथा फल के छिलकों को पीस लें। इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, झाई आदि मिट जाते हैं। यह प्रयोग चेहरे को कोमल भी बनाता है, और चेहरे पर चमक लाता है।
- खरबूज के बीज (2 ग्राम) तथा खीरा के बीज (2 ग्राम) को मिलाकर पीस लें। इसमें आधा ग्राम काली मिर्च तथा 5 ग्राम मिश्री मिलाकर घोटकर छान लें। इसे पिलाने से सीने की जलन में आराम मिलता है।
- खरबूजे के बीज को पीस लें। इसे गुनगुना करके बच्चों के पेट पर लेप करने से पेट की गैस निकल जाती है, और दर्द में आराम मिलता है।
- दस्त की शुरुआती अवस्था में जब आँव, कफ तथा दुर्गन्धयुक्त मल बार-बार हो रहा हो तो खरबूज के गूदे में सोंठ, काली मिर्च तथा जीरा चूर्ण और ऊपर से सेंधा नमक डालकर खाएं। इससे आँव का पाचन होता है और मल से दुर्गन्ध आने की समस्या खत्म होती है।गैस निकलना बन्द होता है।
- खरबूजे के बीज में मिश्री तथा काली मिर्च मिलाकर खिलाने से पेशाब की वृद्धि होती है, तथा मूत्र विकार खत्म होते हैं।
- खरबूजे के बीज को पीसकर, दूध में मिला लें। इसे पीने से पेशाब की जलन की समस्या ठीक होती है।
- खरबूज के 5-10 ग्राम बीज चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर खाने से पेशाब करते समय होने वाला दर्द दूर होता है।
- खरबूज में पथरी को गलाने की शक्ति होती है। खरबूज के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करें। इससे गुर्दे के दर्द से आराम मिलता है।
- इससे पथरी भी गलकर शरीर से बाहर निकल जाती है।
- खरबूजा गूर्दे की सफाई भी करता है।
- 5 ग्राम खरबूजे के बीजों को पानी में पीस लें। इसमें 15-20 बूंद चन्दन का तेल मिला लें। इसका सेवन करने से सिफलिस (उपदंश) में लाभ होता है।
- खरबूजे के बीज का रोजाना सेवन करें। इससे शरीर स्वस्थ होता है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
- प्रोटीन की अधिकता के कारण यह हड्डियों, बालों और नाखूनों के लिए भी फायदेमंद होता है।
- लू लगने पर खरबूज के बीजों को पीसकर सिर परऔर पूरे शरीर पर लगाएँ। इससे लू के कारण होने वाली जलन, दर्द तथा बुखार आदि समस्याएं ठीक होती हैं। इससे शरीर में ठंडक मिलती है।
- खरबूजे के छोटे-छोटे टुकड़ों में देसी खाण्ड मिलाकर शरबत (Musk Melon Juice) बना लें। इसका नियमित सेवन करें। इससे शरीर में बढ़े हुए पित्त का प्रभाव घट जाता है। इससे पित्त के कारण होने वाले रोगों से आराम मिलता है। इससे एसिडिटीज ठीक होती है।
- खरबूजा को खाने से पहले थोड़ी देर ठंढे पानी में डाल दें।
- भोजन के कुछ देर बाद ही खरबूजा का सेवन करना ठीक होता है।
- खरबूजा को खाली पेट या भोजन के पहले खाने से शरीर में पित्त-दोष यानी एसिडिटी होने की की संभावना बढ़ जाती है। किसी-किसी को पित्त दोष के कारण होने वाला बुखार भी हो जाता है।
- खरबूजा (kharbooja) बहुत ही ठण्डा और सुगन्धित होता है, इसलिए जिनको बहुत ज्यादा जुकाम तथा खाँसी होती हो, या जिनकी पाचन क्रिया कमजोर हो, उन्हें खरबूजा नहीं खाना चाहिए।
- खरबूजा खाने के बाद पानी और दूध का सेवन नुकसान पहुंचाता है।
- खरबूजा खाने के तुरंत बाद पानी पीने से हैजा होने की आशंका रहती है।
- इसे उचित मात्रा में खाने के बाद एक गिलास शक्कर का शर्बत पीना पाचन के लिए विशेष उपयोगी है।
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