पपीता (Papaya)

     पपीता एक ऐसा फल है जो बहुत ही आसानी से कहीं भी मिल सकता है। यहां तक कि आप घर के आस-पास थोड़ी-सी जगह होने पर वहां भी लगा सकते हैं। पपीता को कच्चा या पका दोनो अवस्थाओं में खा सकते हैं। कच्चा हो या पका पपीता के औषधीय गुणों के कारण ये कई बीमारियों के लिए उपचारस्वरुप प्रयोग किया जाता है। इस पौधे के किसी भी भाग में हल्का खरोंच आने पर भी दूध जैसा पदार्थ निकलने लगता है, जिसको आक्षीर कहते है। पपीता में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, पोटाशियम, एनर्जी जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। जिसके कारण आयुर्वेद में पपीते के पत्ते, बीज, जड़ और फल सबका रोगों के उपचार के तौर पर प्रयोग  किया जाता है। पपीता का मूल रूप से दक्षिण अमेरिका से आया है। 400 वर्ष पूर्व पोर्तुगीज लोगों के द्वारा यह भारत में लाया गया। मालूम होता है पहले यह दक्षिण भारत के केरल देश में आया है। केरल निवासी इसे कप्पकाय‘ कहते हैं। कप्पकाय का शब्दार्थ जहाज से आया हुआ फल है, अत: अनुमान किया जाता है कि यह भारतीय फल नहीं है। यह शायद पहले जहाज से केरल के किनारे उतारा गया था। इसीलिए अभी भी केरल देश में इसकी विशेष अधिकता है। इसका मूल उत्पत्ति स्थान दक्षिण अमेरिका है, किन्तु अब तो यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में न्यूनाधिक प्रमाण में घरों में और बागों में पाया जाता है। मुंबई, पूना, बंगलौर, चेन्नई और राँची के पपीते प्रसिद्ध और उत्तम माने जाते हैं।

पपीता के उपयोग

  1. पपीते के दूध या आक्षीर को जीभ पर लगाने से जीभ पर होने वाला घाव जल्दी भर जाते हैं।
  2. पपीते से प्राप्त दूध को रूई में लपेटकर लगाने से दांत का दर्द कम होता है।
  3. पपीता से प्राप्त आक्षीर या दूध को जल में मिलाकर गरारा करने से गले के रोगों में लाभ होता है।
  4. पपीता के कच्चे फलों का साग बनाकर सेवन करने से अग्निमांद्य तथा कमजोरी में लाभ होता है।
  5. पके बीजों का सेवन चावल के साथ करने से अतिसार या दस्त में फायदा पहुँचता है। इसके अलावा कच्चे फल का साग बनाकर सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है।
  6. पपीता के कच्चे फलों से प्राप्त आक्षीर या दूध को अर्श के मस्सों पर लगाने से बवासीर में लाभ होता है।
  7. पपीता के फलों का सेवन करने से रक्तार्श, यकृत् तथा प्लीहा-विकारों का शमन होता है।
  8. पपीता के बीजों से तेल बनाकर, छानकर मालिश करने से लकवा तथा अर्दित (मुँह का लकवा) में लाभ होता है।
  9. पौधे से निकलने वाले आक्षीर को सिध्म, गोखरू, अर्बुद, गाँठ तथा चर्म रोगों में लगाने से लाभ होता है।
  10. पपीता के बीजों को पीसकर, उसमें ग्लिसरीन मिलाकर दाद पर लगाने से दाद तथा खुजली में लाभ होता है। इसके अलावा इसके फलों से प्राप्त आक्षीर को लगाने से दाद तथा खुजली की परेशानी कम होती है।
  11.  पपीता के फल मज्जा को पीसकर लगाने से सूजन कम होती है।
  12.  पपीते के कच्चे फल से प्राप्त आक्षीर या दूध को दंश-स्थान पर लगाने से वृश्चिक या बिच्छू दंशजन्य विषाक्त प्रभाव कम  होता है।

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