नाशपाती (pear fruit)

     नाशपाती पौष्टिक गुणों से भरपूर फल है जिसका आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। ये न सिर्फ त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती है बल्कि कई तरह के बीमारियों को ठीक करने के लिए औषधि के रुप में काम भी करती है। नाशपाती पहाड़ी, बागी, जंगली तथा चीनी भेद से चार प्रकार की होती हैं। इनमें से पहाड़ी एवं बागी नाशपाती विशेष रुप से कोमल, मधुर व रसीली होती है। नाशपाती आकृति में सुराही जैसी होती है। इन्हें ही नाख या नाक कहते हैं। बाकी प्रकार की नाशपाती खट्टी या खट्टीमिठी होती है। नाशपाती से एक प्रकार की शराब बनाई जाती है। यह सेव की शराब की अपेक्षा कम मधुर एवं कम गुणवाली होती है। 

नाशपाती का उपयोग

  1. 10-20 मिली नाशपाती के फल के रस में चीनी, बेलगिरि चूर्ण, बेर चूर्ण, सेंधा नमक, काली मिर्च और भुना हुआ जीरा डालें। इस मिश्रण को पीने से सिर दर्द, मूत्र करते वक्त जलन या दर्द, रक्त की उल्टी तथा खाने में अरुचि जैसे बीमारियों में लाभ होता है।
  2. नाशपाती को पीसकर नेत्र के बाहर चारों तरफ लगाने से नेत्ररोगों में लाभ होता है।
  3. 15-20 मिली नाशपाती फल के रस में 500 मिग्रा पिप्पली चूर्ण मिलाकर पिलाने से भूख लगती है। 
  4. नाशपाती के मुरब्बे में 250 मिग्रा नागकेशर चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है। इसके सेवन से दर्द और खून का निकलना कम होता है।
  5. 10-15 मिली नाशपाती फल के रस को सुबह शाम भोजन के पहले सेवन करने से वृक्काश्मरी व पित्ताश्मरी या किडनी का स्टोन टूट-टूट कर निकल जाती है। 
  6. नाशपाती के पत्तों को पीसकर पिलाने से सांप ने जिस जगह पर काटा है उस जगह का  विषाक्त प्रभाव कम होता है। 

  • नाशपाती के अधिक सेवन से कफ दोष बढ़ता है। इससे कारण  खांसी-जुकाम होने लगता है क्योंकि इसमें कफ को बढ़ाने वाला शीत गुण पाया जाता है। 

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)