मसूर (Slit pea)
मसूर का प्रयोग दाल के रूप में पूरे भारत में किया जाता है। मसूर का पौधा लगभग 15-75 सेमी ऊंचा होता है। मसूर के लेप का इस्तेमाल रंग को सुंदर करने के लिए, त्वचा रोग को ठीक करने के लिए और कफ-विकार, रक्त-विकार तथा पित्त-विकारों के इलाज के लिए किया जाता है। इसके साथ ही मसूर मूत्र रोग, दर्द, पेट की गैस और बुखार में भी उपयोग में लाया जाता है।
मसूर दाल के उपयोग
- मसूर को भूनकर, छिलका हटा लें। इसे दूध के साथ पीस लें। इसमें मधु और घी मिलाकर मुंह में लेप के रूप में लगाएं। इससे चेहरे के दाग-धब्बे खत्म हो जाते हैं, और चेहरे की कांति बढ़ती है।
- रक्तचंदन, मंजिष्ठा, कूठ, लोध्र, प्रियंगु, वटांकुर तथा मसूर को पीस लें। इसे चेहरे पर लेप के रूप में लगाएं। इससे चेहरे पर रौनक तो आती ही है, साथ ही चेहरे के दाग-धब्बे ठीक हो जाते हैं।
- चेहरे की झाई में मसूर को घी से पीस लें। इसमें दूध मिला लें, या दूध से पीसकर चेहरे पर लेप करें। इससे चेहरे की झाई की समस्या ठीक होती है।
- बरगद के पत्ते और मसूर को समान मात्रा में लेकर पीस लें। इससे लेप करने से चेहरे की झाई या दाग-धब्बे ठीक हो जाते हैं।
- मुंह के छाले में मसूर की भस्म के बराबर मात्रा में कत्था मिलाकर पीस लेंं। इसे मुंह के छाले पर लगाएं। इससे मुंह के छाले मिटते हैं।
- मसूर को पीसकर पैरों के तलवों पर लगाएं। पैरों की जलन मिट जाती है।
- मसूर को पीस लें। इसमें घी मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
- उल्टी रोकने के लिए मसूर के आटे को 50 ग्राम की मात्रा में लें। इसमें 100 मिलीग्राम अनार का रस मिला लें। इसे मथें। इसे पीने से उल्टी पर रोक लगती है।
- मसूर की दाल को जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को दांतों पर रगड़ने से दांतों के विकार का ठीक होता है।
- मसूर से बने जूस (दाल का पानी) को 20-40 मिली की मात्रा में सेवन करना चाहिए। इससे श्वसनतंत्र में होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
- साइनस रोग में मसूर तथा अनार के छिलके को पीसकर घाव पर लगाएं। इससे साइनस में लाभ मिलता है।
- मसूर की भस्म बना लें। भस्म में भैंस का दूध मिलाकर सुबह और शाम घाव पर लगाएं। इससे घाव जल्दी भर जाता है।
- मसूर को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों का दर्द ठीक हो जाता है।
- मसूर को सिरके के साथ पीस लें। इसे हल्का गुनगुना करके कमर और पीठ पर लगाएं। कमर और पीठ का दर्द ठीक होता है।
- कब्ज की समस्या में मसूर के दाल का पानी पिएं। इससे कब्ज की बीमारी ठीक होती है। सेवन की मात्रा 20-40 मिली होनी चाहिए।
- मसूर शारीरिक कमजोरी दूर करने के साथ-साथ खून को बढ़ाने का भी काम करता है। जिस व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी या खून की कमी हो, वह मसूर की दाल का सेवन कर लाभ पा सकते हैं।
- 5 किग्रा मसूर चूर्ण तथा 12 लीटर को पानी में पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उसमें 400 ग्राम बेल फल मज्जा तथा 750 ग्राम घी मिलाकर फिर पकाएं। इसे 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इसेस दस्त पर रोक लगती है।
- मसूर की दाल तथा अनार की छाल को पीस लें। दोनों को मिलाकर हल्का गुनगुना करके अण्डकोष पर लगाएं। इससे अण्डकोष की सूजन ठीक हो जाती है।
- बराबर मात्रा में सोंठ तथा बेल मज्जा के पेस्ट को मसूर की दाल के पानी के साथ सेवन करें।
- इसी तरह मसूर के 10-20 मिली काढ़ा में 2 ग्राम बेल गिरी चूर्ण मिलाकर पीने से भी पेचिश में लाभ होता है।
- चेचक के इलाज के लिए मसूर की बीज का पेस्ट बना लें। इसे लेप के रूप में लगाएं। इसको लगाने से चेचक की पीड़ा से आराम मिलता है।
- मसूर की दाल को छाछ के साथ सेवन करें। इससे बवासीर में होने वाले रक्तस्राव पर रोक लगता है।
- आंतों के रोग को ठीक करने के लिए मसूर का इस्तेमाल करना अच्छा होता है। आप मसूर की दाल का पानी लें। इसकी मात्रा 20-40 मिली होनी चाहिए। इसका सेवन करें। इससे आंतों की बीमारी ठीक होती है।
- मसूर से तैयार जूस (20-40 मिली) का सेवन करने से आंतों के रोग में लाभ होता है।
- गले के दर्द और सूजन को ठीक करने के लिए मसूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करें। इससे गले की सूजन तथा गले का दर्द ठीक होता है।
- ह्रदय रोग में मसूर के बीजों का जूस (दाल का पानी) बनाकर पिएं। सेवन 20-40 मिली मात्रा में करना चाहिए।
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