गन्ना (sugarcane)

     देश भर में कई प्रकार के गन्ना उगाये जाते हैं, जिनमें लाल, सफेद, काला, पौण्ड्रक, मनोगुप्ता इत्यादि गन्ना की मुख्य जातियां हैं। गन्ने से गुड़, शक्कर (चीनी), खांड़ आदि खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। यह हमारे देश की मुख्य फसलों में से एक है। इसे ईख भी कहा जाता है। गन्ना का प्रयोग बहुत सालों से किया जा रहा है। देश में कई स्थानों पर गन्ना की खेती की जाती है। इसके पेड़ डंडे जैसे लंबे होते हैं। इसका स्वाद बहुत ही मीठा होता है।

गुड़ के उपयोग

  1. गुड़ के साथ थोड़ा-सा जीरा मिला लें। इसका सेवन करने से पाचनतंत्र संबंधित परेशानी ठीक होती है।
  2. ईख के रस को धूप में, या आग में गर्म कर लें। एक ऊफान आने के बाद शीशी, या चीनी मिट्टी के बरतन में भरकर रख लें। एक सप्ताह बाद प्रयोग में लाएं। इससे भोजन ठीक से पचता है, और भोजन के प्रति रुचि भी बढ़ती है। 
  3. गन्ने को गर्म रेत, या गर्म राख में गर्म कर लें। इसे चूसें। इससे गला ठीक हो जाता है।
  4. ईख के रस को धूप में, या आग में गर्म करें, जब इसमें एक ऊफान आ जाए, तो इसे शीशी, या चीनी मिट्टी के बरतन में भरकर रख लें। इसे एक सप्ताह बाद प्रयोग में लाएं। इसका गरारा करने से कण्ठ से संबंधित परेशानी से आराम मिलता है। 
  5. हिचकी बहुत ही साधारण समस्या है, लेकिन कभी-कभी हिचकी परेशानी भी बन जाती है। इस परेशानी में थोड़े से गुड़, और सोंठ को पानी में घिस लें। इसे नाक के रास्ते लें। इससे हिचकी और सिर दर्द में फायदा होता है।
  6. इसी तरह 10-20 मिली ईख के रस का सेवन करें। इससे भी हिचकी में लाभ होता है
  7. वीर्य दोष वाले लोग 2-4 ग्राम आंवला चूर्ण के साथ, गुड़ का सेवन करें। इससे वीर्य की वृद्धि होती है। इसके साथ ही थकान, रक्तपित्त, जलन, और पेशाब से संबंधित परेशानी से आराम मिलता है।
  8. मिश्री के टुकड़े को जल के साथ घिसकर आंखों में लगाएं। इससे आंखों की रोशनी ठीक होती है।
  9. 10 ग्राम गुड़, 40 ग्राम दही, तथा 3 ग्राम मरिच चूर्ण को मिला लें। इसका सुबह-सुबह तीन दिनों तक सेवन करें। इससे सर्दी-जुकाम या सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
  10. अगर आप कफ वाली खांसी से बहुत परेशान हैं, और चाहते हैं कि आयुर्वेदिक उपाय से आपकी बीमारी पूरी ठीक हो जाए, तो पुराने गुड़ में अदरक मिलाकर सेवन करें। इससे कफ वाली खांसी  ठीक होती है।
  11. ईख के रस के साथ जौ के बाल को पीसकर पिएं। इससे कब्ज में फायदा होता है।
  12. ईख के रस को पका लें। इसे ठंडा कर पीने से पेट के फूलने की परेशानी में लाभ होता है। 
  13. इसके लिए 5 लीटर ईख के रस को मिट्टी के बरतन में भर लें। इस बरतन का मुंह कपड़े से बंद कर रख दें। एक सप्ताह बाद छानकर रख लें। एक महीने बाद 10-20 मिली रस में 3 ग्राम सेंधा नमक मिला लें। इसे थोड़ा गर्म कर पिलाने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
  14. पेट की बीमारी में 2-4 ग्राम अजवायन चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर सेवन करें।
  15. पित्त संबंधित दोषों के लिए खाना खाने से पहले ईख का सेवन करना उत्तम रहता है।
  16. ईख के 30-40 मिली रस में शहद मिलाकर पीने से पित्त से संबंधित बीमारी ठीक होती है। 
  17. गुड़ को गाय के ताजा दूध के साथ पीने से वात दोष ठीक होते हैं। 
  18. 10 ग्राम गुड़, तथा 6 ग्राम तिल को दूध के साथ पीस लें। इसमें 6 ग्राम घी मिलाकर गुनगुना कर लें। इसका सेवन करने से सिर दर्द से राहत मिलती है।
  19. 3-6 ग्राम गुड़ में इतनी ही मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर सेवन करें। इससे सांस फूलने, या सांस के उखड़ने की परेशानी से राहत मिलती है।
  20. नकसीर या नाक से खून निकलने पर ईख के रस को नाक से देने पर आराम मिलता है।
  21. घेंघा रोग गले में होने वाली एक बीमारी है। इसमें 2-4 ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करें। ऊपर से गन्ने का रस  पीने से लाभ होता है।
  22. ईख की 5-10 ग्राम जड़ को पीस लें। इससे गन्ने की कांजी (काढ़ा) बना लें। इसका सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
  23. गुड़ की ऐसी खाली बोरी लें, जिसमें 2-3 साल तक गुड़ भरा रहा हो। इसे जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को छान लें। रोजाना सुबह 1 ग्राम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है। 
  24. ईख के रस से कपड़े को गीला कर पट्टी बना लें। इसे योनि पर रखने से गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव की बीमारी ठीक होती है।
  25. गुड़ के साथ जौ का राख मिला लें। इसे गर्म जल के साथ सेवन करने से डायबिटीज (मधुमेह) में फायदा होता है।
  26. ईख के ताजे रस को पीने से मूत्र सम्बन्धी विकारों, जैसे- बार-बार पेशाब आने में आराम मिलता है। अगर आपको ईख के ताजा रस नहीं मिल रहा है, तो आप ईख की जड़ से काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।
  27. ईख के 30-40 मिली रस में, आंवले का रस, और शहद मिला ले। इसका सेवन करने से मूत्र संबंधी परेशानी ठीक होती है।
  28. ईख की ताजी जड़ का काढ़ा बना लें। इसे 40-60 मिली मात्रा में पीने से पेशाब में जलन की समस्या से राहत मिलती है।
  29. ईख के टुकड़े कर, रात के समय घर के ऊपर छत पर, ओस में रख दें। इसके रस को सुबह साफ करने के बाद चूसें। 4 दिन के प्रयोग से पीलिया में बहुत लाभ होता है।
  30. ईख के शुद्ध ताजे रस के साथ, जौ के सतू् का सेवन करें। इससे पीलिया (पांडु) रोग में लाभ होता है। 
  31. पेचिश के रोगी, जिन्हें खून के साथ मल आता है। वे 30-40 मिली ईख के रस में इतनी ही मात्रा में अनार का रस मिला लें। इसे पीने से पेचिश में लाभ होता है। 
  32. ईख के रस से गीली पट्टी को मस्सों पर लगाएं। इससे खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  33. गुड़ के साथ जौ का राख मिला लें। इसे गर्म जल के साथ सेवन करें।
  34. किडनी में दर्द हो रहा हो, तो 11 ग्राम गुड़, और 500 मिग्रा बुझा हुआ चूना को मिलाकर, दो गोलियं बना लें। पहले 1 गोली गुनगुने जल के साथ लें। अगर दर्द कम ना हो तो दूसरी गोली लें।
  35. ह्रदय को स्वस्थ रखना है, तो गन्ना का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। इसके लिए गुड़ की पपड़ी, या गुड़ से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर होता है।
  36. 5 ग्राम गुड़ के साथ, 5 ग्राम अदरक, या सोंठ, या हरड़, या फिर पीपल में से किसी का चूर्ण मिला लें। इसे 10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ सेवन करें। इससे मुंह के छाले की बीमारी, सांसों के रोग, कफ, सूजन, सर्दी-जुकाम, गला की बीमारी, बुखार, बवासीर, और पेचिश में लाभ मिलता है। 
  37. मिश्री के टुकड़े के साथ, एक छोटा-सा कत्थे का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसें। इससे मुंह के छाले, तथा भूख की कमी की समस्या ठीक होती है।
  38. आंखों में रोशनी की कमी महसूस होने पर, मिश्री को जल के साथ घीस लें। इसे आंखों में काजल की तरह लगाने से लाभ होता है।
  39. बुखार होने पर दूध में घी, तथा मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से बुखार ठीक होता है।

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