चुकन्दर (Beetroot)
चुकंदर एक ऐसा मूसला जड़ वाला वनस्पति है जो लगभग पूरे साल पाया जाता है। इसको सलाद, सब्जी और जूस के रुप में सेवन करते हैं। चुकंदर न सिर्फ सौन्दर्य दृष्टि से फायदेमंद है बल्कि ये स्वास्थ्यवर्द्धक भी है। चुकंदर देखने में छोटा होता है लेकिन चुकंदर के फायदे अनगिनत होते हैं। चुकंदर 30-90 सेमी ऊँचा, मांसल, कंद (bulb), मोटा तना वाला, शाकीय पौधा होता है। इसके पत्ते मूली या शलगम के पत्ते जैसे होते हैं। चुकंदर के फूल 2-3 के गुच्छों में या एकल, लम्बे बेलनाकार स्पाइक जैसे होते हैं। इसकी जड़ बैंगनी लाल रंग की होती है। चुकंदर सितम्बर से फरवरी महीने में फलता-फूलता है। चुकंदर एक ऐसा सब्जी है जो शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है लेकिन इसके साथ-साथ चुकंदर के औषधीय गुण भी बहुत है। चुकन्दर आँखों के लिए अच्छा, चर्बी कम करने वाला तथा कृमिनाशक होता है। चुकंदर के फायदे अनेक हैं। चुकन्दर तीखा, पित्त बढ़ाने वाला तथा अर्श या पाइल्स में फायदेमंद होता है। लाल चुकन्दर पुष्टिकारक होता है। सफेद चुकन्दर मूत्र रोग में फायदेमंद होता है। इसकी जड़ मीठी और ठंडे तासीर की होती है। चुकंदर की जड़ कफ निकालने वाली, कमजोरी दूर करने वाली, हिमोग्लोबीन की संख्या बढ़ाने वाली होती है। इसके पत्ते के सेवन से मूत्र संबंधी परेशानी, कब्ज , सूजन, सिरदर्द, लकवा तथा कानदर्द से राहत मिलती है। इसके बीज सेक्स की इच्छा बढ़ाने में मदद करते हैं।
चुकंदर का उपयोग
- चुकन्दर के जड़ के रस का 1-2 बूंद नाक में डालने से आधा कपाल में जो दर्द होता है उससे राहत मिलती है।
- चुकन्दर के पत्ते के रस को कुछ दिनों तक लगातार सिर में लगाने से सिर का गंजापन कम होता है।
- चुकन्दर पत्ते में हल्दी मिलाकर पीसकर सिर में लगाने से भी बालों का झड़ना कम होता है।
- चुकन्दर के तने के काढ़े से सिर को धोने से सिर की रूसी तथा जुएं दूर होती हैं।
- चुकन्दर के कन्द के रस को कनपटी पर लगाने से नेत्राभिष्यंद या आँख आने पर उसके कष्ट से आराम मिलता है।
- चुकन्दर के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से दांतों का दर्द तथा मुंह के छाले मिटते हैं।
- चुकंदर के पत्ते के रस को गुनगुना करके 2-2 बूंद कान में डालने से कान की सूजन तथा दर्द में लाभ होता है। कान दर्द में चुकंदर खाने के फायदे से लाभ मिलता है।
- चुकन्दर के 1-2 ग्राम बीज चूर्ण का सेवन करने से आध्मान (पेट फूलना) तथा विबन्ध (कब्ज) में लाभ होता है।
- चुकन्दर के जड़ के चूर्ण को घी के साथ 21 दिनों तक सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है। इसके अलावा चुकन्दर का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली काढ़ा को सुबह भोजन के 1 घंटा पहले तथा रात में सोते समय पीने से कब्ज तथा रक्तार्श (खूनी बवासीर) में लाभ होता है।
- चुकन्दर के ताजे पत्तों को पीसकर मोच पर लगाने से दर्द और सूजन कम होती है तथा अल्सर के घाव में लगाने से जल्दी ठीक होता है।
- चुकन्दर के पत्तों का काढ़ा बनाकर ठंडा करके जले हुए जगह पर लगाने से जल्द आराम मिलता है।
- चुकन्दर के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से दाग धब्बे या झांईयां मिटती है।
- चुकंदर का जूस पीने से रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
- चुंकदर का सेवन हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कि हड्डियों की मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।
- 1-2 बूंद चुकंदर के पत्ते के रस को नाक में डालने से मिर्गी में लाभ होता है। इसके अलावा चुकन्दर के कंद (bulb) के रस को नाक से लेने से अपस्मार या मिर्गी, आधासीसी (आधे कपाल में दर्द) तथा अन्य मानसिक विकारों में लाभ होता है।
- चुकन्दर के तेल की मालिश करने से दर्द से आराम मिलता है। चुकन्दर के पत्तों के रस में शहद मिलाकर सूजन पर लगाने से जल्द राहत मिलती है।
- अति मात्रा में सेवन करने से रक्त में कैल्शियम की कमी हो जाती है तथा वृक्क (किडनी) में परेशानी होती हैं। मधुमेह के रोगी का लेना हानिकारक होता है। इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में मरोड़ जैसा अनुभव होने लगता है।
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