जामुन (black berry)
जामुन देखने में काले और छोटे होते हैं तो क्या हुआ, आयुर्वेद के अनुसार, जामुन के बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं। इन औषधीय गुणों के कारण जामुन के फायदे अनेक हैं। गर्मी के मौसम में आम के आने के समय जामुन भी आ जाता है। आयुर्वेद में जामुन को सबसे ज्यादा मधुमेह को नियंत्रण करने के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही जामुन, खाना को हजम करने के साथ-साथ दांतों के लिए, आंखों के लिए, पेट के लिए, चेहरे के लिए, किडनी स्टोन के लिए भी फायदेमंद होता है। जामुन में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेड भी होता है, इसलिए ये बच्चों के सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है। जामुन का फल खाने की इच्छा बढ़ाने के साथ-साथ लीवर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। जम्बुफल की गिरी पाचन क्रिया को सुधारती है। इससे पेशाब और खून में शर्करा की मात्रा कम होती है।
जामुन के उपयोग
- जामुन या इसकी पत्तियों के रस को त्वचा पर लगाने से ये अधिक मात्रा में तैल को त्वचा पर आने से रोकता है जिससे पिम्पल्स जैसी समस्याओ में आराम मिलता है जामुन में कषाय गुण होने के कारण त्वचा के विकारो में फायदेमंद होता है जब इसको बाहय रूप से उपयोग किया जाता है ।
- जामुन का प्रयोग मधुमेह के कारण आँखों पर होने वाले नुकसान से बचने में भी कर सकते है।
- जामुन के 15-20 कोमल पत्तों को 400 मिली पानी में पका लें। जब यह काढ़ा एक चौथाई बच जाए, तो इससे आंखों को धोएं। इससे आंखों का दुखना में लाभ होता है।
- जामुन की गुठली के चूर्ण को शहद में अच्छी तरह से मिला लें। इसकी तीन-तीन ग्राम की गोलियां बना लें। रोज 1-2 गोली सुबह-शाम खाएं। इन्हीं गोलियों को शहद में घिसकर काजल की तरह लगाएं। इससे मोतियाबिन्द में लाभ मिलता है।
- जामुन की गुठली को शहद में घोंट लें। इसकी 1-2 बूंद कान में डालने से कान का बहना बन्द हो जाता है।
- जामुन के पत्तों की राख बना लें। इससे दांत और मसूड़ों पर मलने से दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं।
- जामुन के पके हुए फलों के रस को मुंह में भरकर, अच्छी तरह हिलाकर कुल्ला करें। इससे पाइरिया ठीक होता है।
- जामुन के पत्तों के रस से कुल्ला करने पर मुंह के छालों में लाभ होता है। 10-15 मिली जामुन के फल के रस का नियमित सेवन करें। इससे गले के रोग भी ठीक होते हैं।
- गले के दर्द में 1-2 ग्राम जामुन के पेड़ की छाल के चूर्ण का सेवन करें। चूर्ण का सेवन शहद के साथ करने से भी आराम मिलता है।
- 5-10 मिली जामुन के पत्ते का रस बना लें। इसे 100 मिली बकरी के दूध के साथ मिलाकर पिएं। इससे दस्त में लाभ होता है।
- पेचिश में दस्त के साथ खून आने लगता है। 10 मिली जामुन की छाल का रस निकाल लें। इसमें समान भाग में बकरी का दूध मिलाकर पिएं। इससे फायदा पहुंचता है।
- 2-5 ग्राम जामुन के पेड़ की छाल के चूर्ण में 2 चम्मच मधु मिला लें। इसे 250 मिली दूध के साथ पिएं। इससे पेचिश में फायदा होता है।
- 10 ग्राम जामुन के पेड़ की छाल को 500 मिली पानी में पकाएं। जब यह एक चौथाई बच जाए तो पिएं। इससे पेचिश में लाभ मिलता है। इस काढ़ा को 20-30 मिली की मात्रा में दिन में 3 बार पीना चाहिए।
- बार-बार उल्टी होने पर आम तथा जामुन के कोमल पत्तों को समान मात्रा, या फिर 20 ग्राम की मात्रा में लें। इसे 400 मिली पानी में पकाएं। जब काढ़ा एक चौथाई बच जाए, तो इसे ठंडा कर पिलाएं। इससे उल्टी बन्द हो जाती है।
- पाइल्स या बवासीर होने पर जामुन के कोमल कोपलों के 20 मिली रस में, थोड़ी-सी शक्कर मिला लें। इसे दिन में तीन बार पीने से बवासीर से बहने वाला खून बन्द हो जाता है।
- 10 ग्राम जामुन के पत्तों को 250 मिली गाय के दूध में घोंट लें। सात दिन तक सुबह, दोपहर तथा शाम को पीने से बवासीर में गिरने वाला खून बन्द हो जाता है।
- तिल्ली या लीवर में सूजन हो तो, 10 मिली जामुन की गुठली के रस का सेवन करें। इससे लाभ मिलता है। जामुन का सिरका 10 मिली रोज लेने से तिल्ली और लिवर के बढ़ने के विकार में बहुत लाभ होता है।
- जामुन के 10-15 मिली रस में 2 चम्मच मधु मिला लें। इसका सेवन करने से पीलिया, खून की कमी तथा रक्त-विकार में लाभ होता है।
- पके हुए जामुन के फल को खाने से पथरी गल कर निकल जाती है।
- जामुन के 10 मिली रस में 250 मिग्रा सेंधा नमक मिला लें। कुछ दिनों तक दिन में 2-3 बार रोज पीने से मूत्राशय में रहने वाली पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है।
- जामुन के 10-15 ग्राम कोमल पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें। इसमें 2-3 नग काली मिर्च का चूर्ण बुरककर मिला लें। इसका सुबह-शाम सेवन करने से पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
- जामुन की 100 ग्राम जड़ को साफ कर, 250 मिली पानी में पीस लें। इसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर सुबह और शाम भोजन से पहले पिएं। इससे मधुमेह में लाभ होता है।
- जामुन की गुठली का चूर्ण 1 भाग, शुण्ठी चूर्ण 1 भाग और गुड़मार बूटी 2 भाग को मिला लें। इसे पीसकर कपड़े से छान लें। इस मिश्रण को घृतकुमारी या ऐलोवेरा के रस में डुबाने के बाद बेर जैसी गोलियाँ बना लें। दिन में तीन बार 1-1 गोली मधु के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है।
- 300-500 मिग्रा जामुन के बीज को सूखाकर उसका चूर्ण बनाकर तीन बार लेने से मधुमेह में लाभ होता है।
- 250 ग्राम जामुन के पके हुए फलों को 500 मिली उबलते हुए जल में डालें। कुछ समय के लिए उबलने दें। ठंडा होने पर फलों को मसलकर कपड़े से छान लें। इसे रोज तीन बार पीने से मधुमेह और धातु रोग में लाभ होता है।
- बड़े आकार के जामुन के फलों को धूप में सुखा कर चूर्ण कर लें। 10 से 20 ग्राम की मात्रा में इस चूर्ण का दिन में तीन बार सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
- जामुन की छाल की राख मधुमेह की उत्तम औषधि है। 625 मिलीग्राम से 2 ग्राम तक की मात्रा में राख का सेवन करें। दिन में 3 बार सेवन करने से पेशाब में शक्कर आना बन्द हो जाता है।
- सिफलिस से प्रभावित अंग पर जामुन के पत्तों से पकाया हुआ तेल लगाएं। इससे आराम मिलता है।
- जामुन के रस को दाद वाली जगह लगाने से भी आराम मिलता है क्योंकि इसमें कषाय गुण होता है।
- गठिया के दर्द को कम करने के लिए जामुन की जड़ को उबालकर, पीस लें। इसे जोड़ों पर रगड़ने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।
- जामुन के पेड़ की छाल को महीन पीसकर घाव पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाता है।
- जामुन के 5-6 पत्तों को पीसकर लगाने में घावों से पीव बाहर निकल जाती है, एवं घाव ठीक हो जाते हैं।
- जामुन के 8-10 पत्तों को पीसकर लेप करने से आग से जला कर बना सफेद दाग मिट जाता है।
- जूतों के कारण पैर में जख्म हो जाए, तो जामुन की गुठली को पानी में पीसकर लगाएं। इससे बीमारी ठीक होती है।
- जामुन के तने को उबालकर काढ़ा बना लें। इससे घाव को धोने से घाव जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।
- 5-10 मिली जामुन के पत्ते के रस का दिन में तीन बार सेवन करें। भोजन से पहले नियमित रूप से सेवन करने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
- जामुन की एक चम्मच छाल को रात में 1 गिलास पानी में भिगोकर रखें। सुबह इसे मसल कर छान लें। इस प्रकार तैयार हिम में मधु मिलाकर पिलाने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
- जामुन के पत्तों को पानी में पीस लें। इस मिश्रण को पिलाने से विष का प्रभाव कम होता है।
- जामुन की सूखी हुई गुठली को पीस लें। इसे 10 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे कुचले के विषाक्त प्रभाव ठीक होते हैं।
- जामुन का पका हुआ फल अधिक खाने से पेट और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। यह देर से पचता है, कफ बढ़ाता है, तथा फेफड़ों के विकार का कारण बनता है। इसको अधिक खाने से बुखार भी आने लगता है। इसमें नमक मिलाकर खाना चाहिए।
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