सीताफल, शरीफा (Custurd apple)

     सीताफल को शरीफा भी बोलते हैं। इसका स्वाद अन्य फलों से अलग होता है। सीतफल एक ऐसा आहार है, जो शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ कई बीमारियों के उपचार के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। इसका फल गोल होता है। फल के अंदर का हिस्सा मांसल, या गुदायुक्त होता है। सीताफल के बीज चिकने, चमकीले, भूरे-काले रंग के होते हैं। जब सीताफल कच्ची अवस्था में होता है, तो यह थोड़ा पीला, और हरा रंग का होता है। यह आम फलों की तरह ही एक स्वादिष्ट फल है, जिसको लोग बड़ी पसंद से खाते हैं। सीताफल  का इस्तेमाल कफ दोष को ठीक करने के लिए, खून की मात्रा को बढ़ाने के लिए, उल्टी, दांतों के दर्द से आराम पाने के लिए किया जाता है।आयुर्वेद के अनुसार, सीताफल का प्रयोग एक-दो नहीं बल्कि, अनेक रोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है। 

सीताफल का उपयोग 

  1. शरीफा के वृक्ष के तने का काढ़ा बना लें। इसे 15-30 मिली मात्रा में पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है।
  2. महिलाएं 1-2 ग्राम शरीफा की जड़ के चूर्ण का सेवन करे। इससे प्रसूता संबंधित विकार में लाभ होता है।
  3. रोम छिद्र विकार को ठीक करने के लिए सीताफल के पत्ते का पेस्ट बना लें, और लेप लगाएं। इससे त्वचा के घाव, त्वचा पर होने वाली सूजन, और रोम छिद्र की बीमारी में लाभ होता है।
  4. सीताफल के बीजों को पीसकर सिर पर लगाएं। इससे जूं (लीख) मर जाते हैं। इसका प्रयोग करते समय बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अगर यह आंखों में लग जाए तो आंख खराब हो सकते हैं।
  5. ठंड लगकर बुखार आता हो, तो सीताफल के तीन पत्तों को नमक के साथ पीसकर पेस्ट बना लें। इसका सेवन करें। इससे सर्दी वाला बुखार ठीक होता है।
  6. सर्दी-जुकाम, या कफ से परेशान लोग सीताफल के तने को चबाएं। इससे सर्दी-जुकाम,और कफ में आराम मिलता है।
  7. सीताफल के पत्तों का काढ़ा बनाकर गुदा पर लगाएं। इससे गुदाभ्रंश में लाभ होगा।
  8. सीताफल के पत्तों का 1-3 ग्राम चूर्ण बनाकर सेवन करें। इससे मधुमेह में लाभ होता है।
  9. सीताफल के पत्ते के रस का नाक से लेने से हिस्टीरिया में लाभ होता है।
  10. गांठ होने पर लोग पके हुए सीताफल को कूटकर, नमक मिला लें। इससे लेप करने से लाभ होता है।

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