प्याज (Onion)
प्याज का प्रयोग लगभग हर घर में किया जाता है। प्रायः प्याज का इस्तेमाल सब्जी को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। अनेक लोग प्याज को सलाद के रूप में खाते हैं। क्या आपको पता है कि प्याज का प्रयोग सब्जी या सलाद के अलावा एक औषधि के रूप में भी किया जाता है। प्याज औषधीय गुणों वाला खाद्य पदार्थ है। इसकी दो प्रजातियाँ होती हैं। इसकी जड़ का प्रयोग सलाद या सब्जियों के पूरक के रूप में सबसे अधिक किया जाता है। प्याज का ऊपरी तना को भी खाया जाता है। इसकी जड़ और तने के रस का प्रयोग उपचारों के लिए किया जाता है। रंगों एवं आकार के आधार पर प्याज की कई प्रजातियाँ होती हैं। रंगों में यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है। एक लाल और एक सफ़ेद। कुछ विद्वान इसे ‘प्याज’ और ‘जंगली प्याज’ के रूप में भी दो वर्गों में बाँटते हैं। औषधि के रूप में प्रयोग के लिए सफ़ेद रंग की प्याज को उत्तम माना गया है। प्याज को विटामिन ‘ए’ का अच्छा स्रोत भी माना जाता है।
- प्याज के रस में हल्की मात्रा में सेंधा नमक मिलाकर, छानकर आँख में 2-2 बूँद डालने से रतौंधी में लाभ मिलता है। इसे प्रयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।
- प्याज के 5-10 मिली रस में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर आँखों में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
- प्याज के 10-20 मिली रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार चाटने से नजला मिटता है।
- नाक से खून आने के कई कारण होते हैं। खून का थक्का जमाने का प्याज के औषधीय गुण होता है। नाक से खून आने की हालत में प्याज के पत्तों का 1-2 बूँद रस नाक में डालने से खून का थक्का जम जाता है और खून बहना बंद हो जाता है।
- कान में सूजन होने की स्थिति में अलसी को प्याज के रस में पकाकर छान लें। इस रस को गुनगुना कर कान में इसकी 4 से 8 बूँद डालें। इससे कान में दर्द, सूजन और अन्य प्रकार की समस्याएँ दूर होती हैं।
- दांतों में दर्द होने या मसूड़ों के फूलने की स्थिति में प्याज और कलौंजी को बराबर मात्रा में लेकर चिलम में रख दें। धीरे धीरे उसके धुएं का सेवन करें। ऐसा करने से मसूड़ों की सूजन दूर होती है और दांतों का दर्द भी मिट जाता है।
- प्याज को सिरका के साथ पीसकर तरल तैयार कर लें। इसका नियमित सेवन करने से कंठ रोग की बहुत-सी समस्याएँ दूर होती हैं।
- छोटे बच्चों में कफ से होने वाले रोगों में प्याज के 5-10 मिली रस में 10 ग्राम चीनी मिलाकर पिलाना चाहिए। ऐसा करने से कफ का प्रभाव दूर होता है। छोटे बच्चे की माताओं को कफ से होने वाले रोगों की हालत में 1-2 नग प्याज को पानी में उबालें। इसे पिलाने से लाभ होता है। इसका सेवन करने से वात की कमी होती है और कफ पतला होकर बाहर निकल जाता है, घबराहट कम हो जाती है और पित्त भी बाहर निकल जाता है।
- सांसों के रोग जैसे दमा के रोगी को प्याज का काढ़ा बनाकर 40-60 मिली की मात्रा में सुबह शाम पिलाने से तुरंत लाभ होता है। प्याज की जड़ के रस का सेवन करने से तेज हिचकी तथा दमा में लाभ होता है।
- प्याज के रस के सेवन से या कच्चा प्याज खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है और कमजोर पाचन के कारण होने वाली बीमारियां दूर होती हैं।
- प्याज के 20 मिली रस में 125 मिग्रा हींग और 1 ग्राम काला नमक व नींबू का रस मिला लें। इसे दिन में तीन बार पिलाने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
- प्याज के 1-2 नग को 50 मिली सिरका के साथ मिलाकर खाने से आमाशय को बल मिलता है और पाचन सही तरह से होता है।
- अक्सर कब्ज से पीड़ित लोग बवासीर (Piles) का शिकार हो जाते हैं। बवासीर से खून आने की स्थिति में सफेद प्याज के 20-30 मिली रस का सेवन करना अच्छा होता है। दिन में दो-तीन बार करने से खून आना बंद हो जाता है।
- सफेद प्याज का छाछ के साथ सेवन करने से और भी ज्यादा लाभ होता है।
- दो प्याज को बालू में भूनकर या सेंककर छिलका उतार लें। इसका लुगदी बनाकर बवासीर के मस्सों पर बाँधने से बहुत लाभ होता है।
- प्याज के 125 मिली रस में 20 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
- प्याज की सब्जी पकाकर छाछ के साथ सेवन करने से भी खूनी बवासीर में लाभ होता है।
- मध्यम आकार के तीन प्याज और 10-15 ग्राम इमली के पत्तों को मिलाकर पीस लें। इसे 500 मिग्रा की गोली बनाकर खिलाने से पेट साफ़ होता है।
- दस्त होने की हालत में प्याज के 6 मिली रस में, 125 मिग्रा काली मिर्च का चूर्ण, 250 मिग्रा कपूर तथा चूने या केले का 25 मिली पानी मिला लें। इसे 15-15 मिनट बाद या आधा घण्टे के अंतर से देने से उल्टी तथा दस्त बंद हो जाते हैं।
- इससे शरीर की ऐंठन भी दूर हो जाती है।
- अन्य तरीके से उपचार के लिए 25 ग्राम प्याज व काली मिर्च के छह नग को बिल्कुल महीन पीस कर जल में मिलाकर पिला दें। एक बार भी यह घोल पिला देने से दस्त में लाभ हो जाता है। इसमें थोड़ी मिश्री मिला दें तो और भी अच्छा परिणाम आता है।
- प्याज के 10 मिली रस में 125 मिग्रा कपूर व बराबर मात्रा में चूने का पानी मिलाकर पीने से भी दस्त में लाभ होता है। केवल प्याज रस के सेवन से भी इसमें लाभ होता है।
- कामला (एक प्रकार का पीलिया) होने की स्थिति में प्याज या प्याज के रस का सेवन करें। इससे बहुत लाभ होता है। इनका सेवन प्लीहा या तिल्ली की वृद्धि में भी लाभ पहुंचाता है।
- प्याज के 10-20 मिली ताजा रस को दिन में तीन बार पीने से गुर्दे की पथरी चूर चूर हो जाती है और पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
- प्याज का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पिलाने से पेशाब में जलन की समस्या दूर होती है।
- हस्तमैथुन के कारण आयी नपुंसकता, सूजाक तथा डायबिटीज जैसे रोगों में प्याज काफी फायदा देता है। इसके लिए 6 मिली रस में 4 ग्राम गाय का घी और 3 ग्राम मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम चाटने से तथा रात को दूध पीने से बहुत लाभ होता है।
- प्याज के कंदों को कुचलकर सुंघाने से सामान्य मिर्गी से होने वाली बेहोशी आदि दूर हो जाती है।
- कच्चे प्याज का नियमित सेवन करने से मासिक चक्र भी नियमित होता है।
- प्याज को किसी बर्तन में भर लें। इस बर्तन का मुँह इस प्रकार बंद कर देना चाहिए कि उसमें हवा न जाने पाए। इस बर्तन को जहाँ गाय बाँधी जाती हो उस जमीन में गाड़ देना चाहिए। चार महीने बाद निकालकर एक प्याज रोज खाने से काम शक्ति बढ़ती है।
- प्याज के आधा लीटर रस में 2 लीटर शहद व 250 ग्राम चीनी मिलाकर शर्बत बनाकर रखें। इस शर्बत के 25 मिली रोजाना सेवन करने से भी कामशक्ति बढ़ती है।
- प्याज की तीस गाँठों को लेकर बर्तन में रखकर उन पर ताजा दूध इतना डालें कि दूध 8 अंगुल ऊपर रहे। इसे आंच पर इतना पकाएं कि प्याज गल जाय। पकने पर आग से नीचे उतार लें। अब प्याज के बराबर गाय का घी और बराबर मात्रा में मधु मिला लें। इसे फिर से थोड़ी देर पकाए और अंत में 60 ग्राम कुंजन डालें। इस औषधि को 3-4 चम्मच की मात्रा में रोज सेवन करें।
- प्याज के रस और राई तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करने से गठिया का दर्द दूर हो जाता है।
- प्याज के 1-2 नग को गाय के मूत्र में पीसकर गर्म करके बंद गाँठ पर लगाने से ग्रन्थि खुल जाती है और दर्द कम हो जाता है।
- वात के कारण होने वाले दर्द जैसे कि कमर दर्द, पक्षाघात (लकवा) तथा तंत्रिकाओं में दर्द आदि की स्थिति में प्याज का सेवन करने से लाभ होता है।
- आमवात के कारण होने वाले दर्द (गठिया) में प्याज के क्वाथ में समान मात्रा में सर्षप तेल मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
- प्याज के बीजों को पीसकर लेप करने से सफेद कुष्ठ में लाभ होता है।
- प्याज को सिरके में पीसकर दाद या काले दाग वाली किसी सूजन पर लगाने से बहुत लाभ होता है।
- प्याज को घी में तलकर घाव/त्वचा पर बाँधें। इससे फुन्सी-गाँठ, फोड़े, युवावस्था के कारण त्वचा में होने वाले बदलाव, कंठमाला इत्यादि रोगों में लाभ होता है।
- प्याज के रस को भी घाव/त्वचा पर लगाने से भी लाभ होता है।
- प्याज के छिलके को गर्म कर बाँधने से नाड़ी में दर्द और घाव की सूजन आदि में लाभ होता है।
- प्याज के कंदों को कुचलकर सुंघाने से सामान्य हिस्टीरिया में लाभ होता है।
- प्याज के बीजों की बनाई हुई चाय अनिद्रा रोग को दूर करती है। चिड़चिडे बच्चों को जब किसी अन्य साधन से कुछ फायदा नहीं होता और नींद नहीं आती, तब यह पेय लाभ पहुंचाती है।
- प्याज के 10-15 मिली रस में बराबर मात्रा में घी मिला कर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है और स्फूर्ति आती है।
- प्याज के 50 मिली रस में 10 ग्राम मिश्री तथा 1 ग्राम भुने हुए सफ़ेद जीरे को मिला लें। इसे रोज सेवन करने से खून साफ होता है। खून के विकारों के कारण होने वाली छाजन, पामा आदि समस्याएँ दूर होती हैं।
- प्याज को काटकर उसपर काली मिर्च छिड़क कर दिन दो बार खाने से वात विकार के कारण आया बुखार कम होता है।
- लू लगने की हालत में प्याज के ताजे रस को शरीर पर मलने से लू का प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाता है।
- प्याज से बने काढ़ा में समान मात्रा में सरसों तेल मिला लें। इसे सूजन पर लगाने से सूजन कम होने लगती है।
- जहाँ कीड़ा कटा हो, उस स्थान पर प्याज का रस मलें। इससे जलन धीरे धीरे खत्म हो जाती है।
- बिच्छू के काटने पर प्याज को काटकर उस पर बुझा हुआ चूना लगा लें। इसे काटे हुए स्थान पर रगड़ने से बिच्छू के विष के प्रभाव खत्म होने लगते हैं।
- दमा, कास (खांसी), कामला (एक प्रकार का पीलिया) आदि रोगों से ग्रसित व्यक्ति को जंगली प्याज के 10-15 बूँद रस पिलाने से आराम मिलता है। इसका सेवन करने से श्वासन नली की सूजन भी दूर होने लगती है।
- जंगली प्याज का नियमित सेवन करने से पेट के कई तरह के रोगों में लाभ होता है। इसके सेवन से पेट के कीड़े भी नष्ट होते हैं।
- त्वचा में खुजली, तिल निकलना आदि विकारों व गठिया की समस्या में जंगली प्याज को पीसकर अथवा इसका रस निकाल लें। इसे लगाने से खुजली कम होती और अन्य समस्याएँ भी दूर होती हैं।
- जंगली प्याज को पीसकर पैरों के तलुओं में लगाने से तलुवों की जलन शांत होती है।
- हवा के माध्यम से शीघ्र फैल जाने वाले रोगों से बचने के लिए प्याज को काट कर इसके टुकड़े पास में रख लेना चाहिए। आप इन टुकड़ों को दरवाजे पर भी बाँध सकते हैं। ऐसा करने से ये रोग बढ़ते नहीं हैं।
- सफेद प्याज का 10 मिली रस, अदरक का 10 मिली रस, नींबू का 10 मिली रस लें। इन्हें 50 मिली शहद में मिलाकर रखें। इस घोल को नियमित रूप से 2-2 बूँद आखों में डालने से मोतियाबिन्द कट जाता है।
- प्याज में तीव्र दुर्गन्ध होती है। यह पुरुषों में कामुकता और महिलाओं में रजोगुण को बढ़ा करके कम भावना को तेज करता है। इन कारणों से मनुस्मृति आदि ग्रन्थों में प्याज का आहार के रूप में उपयोग करने से मना किया गया है।

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