मटर (Pea)

     मटर एक दलहन है, जिससे आप लोग अच्छे से परीचित होंगे। मटर का इस्तेमाल कई प्रकार के खाद्य पदार्थों में किया जाता है। ठंड के मौसम में तो मटर के बिना शायद ही कोई सब्जी बनाई जाती होगी। सच यह है कि मटर सभी लोगों को पसंद होता है, और लोग इससे बहुत पसंद से खाते हैं। मटर से सिर्फ सब्जी ही नहीं बनाई जाती है, बल्कि मटर का सेवन दाल, पराठे आदि अन्य आहार में भी किया जाता है। इसके अलावा और भी मटर के फायदे हैं। आयुर्वेद में ऐसा ही बताया गया है। पतंजलि के अनुसार, मटर में अनेक प्रकार के पौषक तत्व होते हैं। जो आपके शरीर के लिए फायदेमंद साबित होते हैं। मटर के उपयोग से आप शरीर की जलन, खून संबंधित विकार, सांसों के रोग, खांसी, भूख की कमी का इलाज कर सकते हैं। डायबिटीज, कुष्ठ रोग, चेचक जैसी कई बीमारियों में भी आप मटर का लाभ पा सकते हैं।

मटर के उपयोग

  1. भुनी हुई मटर, तथा नारंगी के छिलकों को दूध में पीस लें। इस उबटन को शरीर पर लगाना है। इससे आपकी त्वचा में निखार आता है।
  2. हरी मटर में अरहर, दालचीनी तथा इलायची मिला लें। इसका जूस बना लें। इसका सेवन करने से भूख बढ़ जाती है।
  3. मटर, मसूर, गेहूं तथा हरेणु (छोटी मटर) को बराबर-बराबर मात्रा में मिला लें। इसे पीस लें, और लेप के रूप में घाव पर लगाएं।इससे घाव से होने वाली पीड़ा तो ठीक होती ही है, साथ ही कच्चा घाव जल्दी पक जाता  है, तथा घाव का मवाद या पीव आसानी से बाहर निकल जाता है।
  4. मटर का काढ़ा बनाएं, फिर इससे त्वचा पर जहां विकार हैं, वहां धोएं। इससे त्वचा के विकारों में फायदा होता है।
  5. जले हुए अंग पर मटर का उपयोग करना चाहिए। हरी कोमल मटर को पीस लें, और इसे जले हुए अंग पर लगाएं। इससे लाभ होता है।
  6. मटर का काढ़ा बना लें। इस काढ़े में सरसों का तेल मिला लें। इससे सूजन वाली अंगुलियों को धोएं। सूजन ठीक हो जाती है।
  7. सूखी मटर, सोयाबीन, चना, गेहूं, यव लें। इसमें थोड़ी मात्रा में तिल को मिला लें। इसका आटा बनाकर प्रयोग करें। यह बहुत ही पौष्टिक होता है। इससे पित्तज और कफज विकारों में लाभ होता है।
  8. हरी मटर में अरहर, दालचीनी तथा इलायची मिलाें। इसका जूस बना लें। इसका सेवन करने से भोजन सही से पचता है।

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