मूली (Radish)

     मूली को मिलाकर कई तरह की सब्जियां बनाई जाती हैं। लंबी और पतली-सी दिखने वाली मूली को लोग बहुत पसंद से खाते हैं क्योंकि लोगों को यह पता है कि मूली के अनेक फायदे हैं। क्या आपको जानकारी है कि मूली एक औषधि भी है। भारत में मूली को सब्जी के साथ-साथ सलाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। मूली के नए पत्ते देखने में सरसों के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। फूल दिखने में सरसों के फूलों की तरह ही होते हैं। रंगों के अनुसार, मूली दो प्रकार की होती है। सफेद मूली, लाल मूली। इसके बीज और जड़ से सफेद रंग का तेल निकाला जाता है।

मूली के उपयोग

  1. मूली से बने जूस बनाएं, या सूखी मूली से काढ़ा बनाएं। इसे 50-100 मिली की मात्रा में 1-1 घंटे के बाद पिएं। इससे हिचकी की समस्या में लाभ होता है।
  2. मूली के बीजों को नींबू के रस में पीस लें। इसे बीमार अंग पर लगाएं। इससे दाद-खाज-खुजली ठीक होती है।
  3. 5 ग्राम तिल के साथ मूली के 1-2 ग्राम बीजों का सेवन करें। ऐसा दिन में दो-तीन बार करने से सूजन ठीक होती है।
  4. मूली के रस को काजल की तरह आंखों में लगाएं। इससे आंखों की बीमारी ठीक होती है। 
  5. मूली और तिल के तेल को कान में 2-2 बूंद डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
  6. 3 ग्राम मूली क्षार और 20 ग्राम शहद को मिलाएं। इसमें बत्ती भिगोकर कान में रखने से मवाद आना बन्द हो जाता है।
  7. मूली के रस को थोड़ा गर्म करें। इसमें मधु, तेल एवं सेंधा नमक मिलाकर कान में डालने से कान के दर्द से आराम मिलता है।
  8. मूली कंद के रस या पत्ते के रस से पकाए हुए तिल के तेल को 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक होता है।
  9. मूली के 5-10 ग्राम बीजों को पीस लें। इसे गर्म जल के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करने से कंठ का रोग ठीक होता है। इससे गला साफ होता है।
  10. छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांसों की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक गुणकारक होता है।
  11. 5 मिली मूली के रस में बराबर मात्रा में मधु और सेंधा नमक मिलाएं। इसका सेवन करने से सांस की नली से संबंधित परेशानी में आराम मिलता है।
  12. 500 मिग्रा मूली क्षार में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
  13. मूली से बने जूस या सूखी मूली से बने काढ़ा को 50-100 मिली की मात्रा में सेवन करें। इससे सांसों की बीमारी ठीक होती है।
  14. सूखी मूली से बने जूस का सेवन करने से भी सांसों के रोग में लाभ होता है।
  15. वात दोष के कारण होने वाली खाांसी को ठीक करने के लिए मूली की सब्जी का सेवन करें।
  16. छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खांसी की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।
  17. कच्ची मूली का जूस बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है।
  18. भोजन से पहले खाने पर मूली पचने में अधिक समय लेती है, लेकिन भोजन के बाद भोजन को पचाने में मदद करती है।
  19. कोमल मूली को मिश्री में मिलाकर खाएं। इससे एसिडिटी में लाभ मिलता है।
  20. मूली के पत्तों के 10-20 मिली रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे एसिडिटी में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
  21. मूली के 25 मिली रस में आवश्यकतानुसार नमक मिलाएं। इसके साथ ही तीन-चार काली मिर्च का चूर्ण डालें। इसे 3-4 बार पिलाने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  22. मूली की सब्जी का सेवन करना भी पेट के लिए अच्छा होता है।
  23. 60 मिली मूली के रस को सुबह सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
  24. दस्त की समस्या में मूली के औषधीय गुण से फायदा मिलता है। कोमल मूली से बने 10-30 मिली काढ़ा में 1-2 ग्राम पीपर का चूर्ण मिला लें। इसे पीकर दस्त को रोक सकते हैं।
  25. मूली का 20 मिली रस निकालें, और इसमें 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
  26. मूली की सब्जी का सेवन करने से वात दोष के कारण होने वाले बवासीर में लाभ मिलता है।
  27. मूली के पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इसमे समान मात्रा में चीनी मिलाकर 40 दिन तक 25 से 50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।
  28. मूली कन्दों के ऊपर का सफेद मोटा छिलका उतार लें, और पत्तों को अलगकर रस निकालें। इसमें छह ग्राम घी मिलाकर रोज सुबह-सुबह सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  29. इसके साथ ही 10 ग्राम फिटकरी को एक लीटर मूली के पत्ते के रस में उबालें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो बेर के समान गोलियां बना लें। एक गोली मक्खन में लपेटकर खाएं। ऊपर से 125 ग्राम दही पिला दें। इससे खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
  30. जिस रोगी को पेशाब रुक-रुक कर आता है उसे मूली का सेवन करना चाहिए। रुक-रुक कर पेशाब आने की बीमारी में लाभ होता है।
  31. 10-20 मिली मूली के पत्ते के रस में 1-2 ग्राम कलमी शोरा मिलाकर पीने से भी मूत्र संबंधी विकारों में लाभ होता है।
  32. मूली के 20-40 मिली रस को दिन में तीन बार पीने से लकवा रोग में लाभ होता है। 
  33. मूली के ताजे पत्तों को जल के साथ पीसकर उबालें। इसमें दूध की तरह झाग ऊपर आता है। इसको छानकर दिन में तीन बार पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
  34. मूली की सब्जी का सेवन करने से भी वात दोष के कारण होने वाले पीलिया रोग में फायदा (mooli benefits) होता है।
  35. 100 मिली मूली के पत्ते के रस को दिन में तीन बार (30-30 मिली) पिएं। इससे पथरी का इलाज होता है। पथरी टूट कर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
  36. मूली के पत्तों के 10 मिली रस में 3 ग्राम अजमोदा मिलाएं। इसे दिन में तीन बार पीने से पथरी का उपचार होता है, और पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
  37. मूली के बीजों को 1 से 6 ग्राम तक दिन में तीन से चार बार खाने से भी पथरी रोग में फायदा होता है। मूत्राशय से पथरी निकल जाती है।
  38. मूली के बीजों को तेल में उबाल (खौला) लें। इस तेल से लिंग (पेनिस) पर मालिश करें। इससे लिंग के ढीलेपन की बीमारी ठीक होती है।कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए मूली के 10-20 ग्राम बीज को बहेड़ा के पत्ते के रस में पीस लें। इससे बीमार अंगों पर लगाएं। इस उपाय से कुष्ठ रोग का इलाज होता है।
  39. मासिक धर्म विकार में मूली बीजों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में पिएं। इससे मासिक धर्म संबंधी विकार ठीक होता है।
  40. मूली को चार टुकड़ा कर लें। इन पर छह ग्राम भूनी फिटकरी डालें। इन्हें रात में ओस में रख दें। सुबह मूली को खा लें, और मूली के ऊपर से जो पानी निकलता है, उसे पी लें। इससे सूजाक रोग में लाभ होता है।
  41. मूली के पत्ते सहित मूली के रस को निकाल लें। इसे दिन में तीन बार 20-20 मिली की मात्रा में पीने से एनीमिया रोग में लाभ होता है।
  42. इसी तरह 70 मिली मूली के रस में 40 ग्राम चीनी मिलाकर पीने से एनीमिया रोग में फायदा होता है।
  43. मूली के पत्ते के रस (60 मिली) में 15 ग्राम खांड मिलाकर पीने से भी एनीमिया की बीमारी ठीक होती है।
  44. ग्रंथि विसर्प रोग में पैर, मुंह, हाथों या अंगुलियों की त्वचा संबंधी रैशेज हो जाते हैं। इसके लिए मूली को पीसकर कुछ गर्म कर लें। इसका लेप करने से ग्रन्थि विसर्प में लाभ होता है। 
  45. किडनी की खराबी के कारण अगर पेशाब बनना बंद हो जाए तो 20-40 मिली मूली के रस को दिन में दो-तीन बार पीने से बहुत लाभ होता है।
  46. 120 मिली मूली के रस में 10 ग्राम कलमी शोरा को मिलाकर सुखा दें। इसकी 500 मिग्रा की गोलियां बना लें। इसकी 1-2 गोली दिन में दो बार सेवन करें।
  47. मूली के चार टुकड़ों को चीनी मिट्टी के बरतन में रखें। ऊपर से छह ग्राम पिसा नौसादर छिड़ककर रात को ओस में रखें। सुबह जो पानी निकले, उसको पीकर ऊपर से मूली के टुकड़े खा लें। इससे लीवर और तिल्ली से संबंधित विकारों में लाभ होता है।
  48. इसके लिए एक ग्राम मूली बीजों को पीसकर सुबह शाम खाने से भी लिवर और तिल्ली की बीमारी में लाभ होता है। 

Comments

Popular posts from this blog

वेत्र (Common rattan)

खैर या खादिर (Black Catechu)

नींबू (Lemon)