टिंडे (Round gourd)

     टिंडा एक ऐसी शाकाहारी सब्जी है, जो पौष्टिकता से भरपूर है। टिंडा को हजम करना आसान होता है। टिंडा में एन्टी-ऑक्सिडेंट, फाइबर, कैराटिनॉयड, विटामिन सी, आयरन या पोटाशियम होता है, जो टिंडे को सूपरफूड बनाने में मदद करता है। टिंडे की सब्जी खाते तो सब लोग है,लेकिन आयुर्वेद में इसका औषधि के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसकी लताएं हर जगह फैल जाती हैं। टिंडा का तना कोणीय आकार का और रोम वाला होता है। टिंडा के पत्ते ककड़ी के पत्ते जैसे पतले, रोमश और लगभग 6 सेमी लम्बे होते हैं। टिंडा के फूल छोटे, पीले, 3 सेमी व्यास या डाइमीटर के और गुच्छे में होते हैं। इसके फल अंडा के आकार के, 6-10 सेमी व्यास के, हरे और सफेद रंग के या धब्बेदार पीले रंग के होते हैं। टिंडा के भीतर का भाग मुलायम और रस वाला होता है। बीज संख्या में अनेक, बड़े और अण्डाकार, 8 मिमी लम्बे, पीले सफेद रंग के और चिकने होते हैं। टिंडा त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा होता है। इसके अलावा टिंडे की सब्जी कई और रोगों के लिए भी लाभकारी है, जैसे- टिंडा का फल आमाशय रस को बढ़ाने वाला, रक्त को शुद्ध करने, कृमिनाशक, मल-मूत्र को शरीर से निकालने में भी सहायता करता है। इसके अलावा, गले के दर्द को कम करने के साथ-साथ खुजली और शराब पीने शरीर जो अज्ञानता के अवस्था में जाता है उससे बाहर निकालने में सहायता करता है। टिंडा का बीज बुद्धि को तेज करने यानि यादाश्त को बेहतर बनाने में सहायता करता है और कमजोरी दूर करने में भी मदद करता है।

टिंडा के उपयोग

  1. कब्ज होने पर टिण्डे के डण्ठल का शाक मल को नरम करने में मदद करता है।
  2. टिण्डे के फल के रस का सेवन करने से रक्त का शोधन तथा मुँह और गला सूख जाने के एहसास से छुटकारा मिलता है। 
  3. टिंडे के फल का शाक बनाकर सेवन करने से कामला या पीलिया तथा मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ मिलता है।
  4. टिंडा के ताजे कोमल फलों को कुचलकर, पीसकर रस निकाल लें। 10-15 मिली रस में 65-125 मिग्रा यवक्षार मिलाकर गुनगुना करके पिलाने से पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है।
  5. टिंडा के फलों का शाक बनाकर सेवन करने से पेशाब करते वक्त दर्द तथा यूरीनरी ब्लाडर या मूत्राशय के सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
  6. 5-10 मिली टिंडे के जड़ का रस बनाकर पीने से गर्भस्रावजन्य रक्तस्राव को कम करने में मदद मिलती है।
  7. टिण्डे के फलों का रस निकालकर मिश्री मिलाकर पीने से प्रदर तथा प्रमेह में लाभ मिलता है।
  8. टिंडे के फल को पीसकर जोड़ो पर लगाने से दर्द से राहत मिलती है।
  9. टिंडे के बीज और पत्तों को पीसकर उसका लेप बना लें। उसके बाद लेप को प्रभावित जगह पर लगाने से दर्द और सूजन दोनों कम होता है।
  10. अगर लंबे अर्से तक बीमार रहने के बाद कमजोरी आ गई है तो पके हुए टिण्डें के बीजों को निकालकर मेवे के रूप में सेवन करने से कमजोरी और थकान में लाभ होता है।
  11. टिंडे में पानी की मात्रा अधिक पायी जाती है साथ ही ये फाइबर युक्त भी होता है, जो की पाचन तंत्र को ठीक रखकर वजन को बढ़ने से रोकता है। 

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