अगस्त (Scarlet wisteria tree)
अगस्त एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। ये सर्दी के दिनों में ही उगते हैं। इसके फूलों से कई तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं। लोग इसके फूलों से सब्जी, पकौड़े, अचार, गुलकंद आदि बनाते हैं। मुनिराज अगस्त के नाम से इसकी प्रसिद्धि इसलिए हुई कि जब अगस्त तारे का उदय होता है तब इसके वृक्षों पर फूल लगते हैं। राजनिघंटुकार ने सफेद, पीला, नीला और लाल फूलों के आधार पर इसकी चार प्रजातियां बताई हैं परन्तु अधिकांश रुप में सफेद रंग का फूल ही प्राप्त होता है। इसके कोमल पत्ते, फूल और फलियों का साग बनाकर खाया जाता है।
अगस्त-के फूल-मधुर कड़वा, गुण में रूखे; कफ पित्त दूर करने वाले, ज्वर या बुखार में लाभकारी, प्रतिश्याय (Coryza), रतौंधी, पीनस-रोग में फायदेमंद होते है। अगस्त के पत्ते-कड़वे, तीखे, थोड़े गर्म प्रकृति के, कृमि, कंडू या खुजली, रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहना), विष तथा प्रतिश्याय को दूर करने वाले होते हैं। अगस्त की फली कड़वी, छोटी, रुचि,बुद्धि और यादाश्त बढ़ाने वाली होने के साथ-साथ पांडु या एनीमिया में लाभकारी होती है। इसके अलावा कीड़ा काटने पर विष का प्रभाव कम करने वाली और सूजन कम करने में सहायक होती है। इसका पका फल रूखा और पित्तकारक होता है। इसकी छाल कड़वी, पौष्टिक, पाचक और शक्ति-वर्धक होती है। इसका पत्ता चिन्ता कम करने वाला (Anxiolytic) होता है।
अगस्त के उपयोग
- अगस्त के जड़ तथा पत्ते के काढ़े में शहद मिलाकर पिलाने से भी सर्दी-खांसी जैसी समस्या से राहत मिलती है।
- जिस तरफ के सिर में दर्द हो, उसके दूसरी ओर के नथुने में अगस्त के पत्तों या फूलों के रस की 2-3 बूंदे टपकाने से सिरदर्द तथा आधासीसी में लाभ होता है। इसके प्रयोग से प्रतिश्याय जन्य या सर्दी-खांसी के कारण सिरदर्द तथा नाक में जो दर्द होता है उससे राहत मिलती है।
- अगस्त के 250 ग्राम पत्तों को पीसकर या काढ़ा बनाकर 1 किलो घी में मिलाकर अच्छी तरह पकाकर छानकर रख लें। इस घी को 2-5 ग्राम मात्रा में सेवन करने से रतौंधी (नक्तान्धता) आदि आँख के रोगों से राहत मिलती है।
- अगस्त के फूलों का साग बनाकर मक्खन के साथ सेवन करने से भी रतौंधी की परेशानी कम होती है।
- अगस्त फूल का रस या फूल का मधु (पुष्पों को तोड़ने में मधु जैसा स्राव निकलना) को 2-2 बूंद नेत्रों में डालने से आँखों का दर्द कम होता है।
- अगस्त के फूलों की सब्जी या साग बनाकर कुछ समय तक सुबह-शाम मक्खन के साथ सेवन करने से या अगस्त के फूलों के रस की 2-2 बूंद नेत्रों में डालने से नक्तान्ध्य (रतौंधी) में लाभ होता है।
- अगस्त की छाल (5-10 ग्राम) का काढ़ा बनाकर 20-30 मिली काढ़े में थोड़ा सेंधानमक और भुनी हुई 2 नग लौंग अथवा हींग मिलाकर सुबह-शाम पीने से दस्त, प्रवाहिका तथा पेट दर्द से राहत मिलती है।
- अगस्त की पत्तियों के काढ़ा से गरारा करने से सूखी खांसी, जीभ का फटना, गले में खराश तथा कफ के साथ खून निकलना आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।
- 10 मिली अगस्त-के पत्ते के रस में थोड़ा शहद मिलाकर सेवन करने से तथा अगस्त-के छाले-के रस के पिचु को योनि में धारण करने से सफेद पानी निकलने एवं योनिकण्डु (योनि की खुजली) से राहत मिलती है।
- धतूरे की जड़ और अगस्त की जड़ दोनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और पुल्टिस जैसा बनाकर वेदनायुक्त भाग पर बांधने से दर्द तथा सूजन से राहत मिलती है।
- अगस्त-पुष्प के 100 ग्राम चूर्ण को एक लीटर दूध में डालकर दही जमा दें, दूसरे दिन इस दही में मक्खन निकाल कर प्रभावित स्थान की मालिश करने से लाभ होता है।
- अगस्त के पत्तों को गर्म कर (यदि पुटपाक-विधि से गर्म करें तो अच्छा है), फोड़े पर बांधने से फोड़ा फूट कर बह जाता है।
- दो या तीन चम्मच अगस्त-पत्ते-के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से शीघ्र ही बुखार का आना रुक जाता है। इसका प्रयोग बराबर 15 दिन तक करना चाहिए।
- अगस्त के पत्ते का चूर्ण और कालीमिर्च-चूर्ण के समान मात्रा में लेकर गोमूत्र के साथ पीसकर मिर्गी के रोगी को सुंघाने से लाभ होता है। यदि बालक छोटा हो तो अगस्त के दो पत्तों का रस और उसमें आधी मात्रा में काली मिर्च मिलाकर उसमें रूई का फाहा तरकर उसे सूंघने से मिर्गी शांत हो जाती है।
- 1-2 ग्राम अगस्त-बीज-चूर्ण को गाय के 250 मिली धारोष्ण दूध के साथ सुबह शाम कुछ दिन तक खाने से स्मरण-शक्ति तीव्र हो जाती है।
- अगस्त के फूलों का शाक खाने से रक्तस्राव या ब्लीडिंग बंद हो जाती है।
- अगस्त के छाल का अधिक मात्रा में सेवन करने से वमन या उल्टी तथा दस्त होने लगता है।
Comments
Post a Comment