बथुआ (Wild spinach)
बथुआ हर सब्जी मार्केट में आसानी से मिल जाता है, और देश भर में लोग बथुआ का सेवन करते हैं। आप भी जरूर बथुआ को खाते होंगे, लेकिन आपको केवल यह पता होगा कि बथुआ को साग के रूप में खाया जाता है। बथुआ एक महत्त्वपूर्ण तथा स्वास्थ्यवर्धक शाक (Bathua vegetable) है। इस पौधे के पत्ते शीतादरोधी (Antiscorbutic) तथा पूयरोधी (Antidiuretic) होते हैं। बथुए में अनेक प्रकार के लवण एवं क्षार पाए जाते हैं, जिससे यह पेट रोग के लिए फायदेमंद होता ही है साथ ही अनेक बीमारियों में भी काम में लाया जा सकता है।
बथुआ के उपयोग
- बथुआ के बीजों (1-2 ग्राम) का चूर्ण बना लें। इसे मधु के साथ सेवन करें। इससे रक्तपित्त में लाभ होता है।
- दांत में दर्द हो रहा हो तो बथुआ के बीज का चूर्ण बनाकर दांतों पर रगड़ें। इससे दांत का दर्द तो ठीक होता ही है, साथ ही मसूड़ों की सूजन भी कम हो जाती है।
- बथुआ के पत्तों को उबालकर पीस लें। इसे सूजन वाले अंग पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।
- बथुआ के पत्तों की सब्जी बनाकर सेवन करें। इससे खांसी में आराम मिलता है।
- बथुआ के रस (5 मिली) में नमक मिलाकर पिएं। इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं।
- बथुआ के पत्ते में केरिडोल होता है, जिसका प्रयोग आंतों के कीड़े एवं केंचुए को खत्म करने के लिए भी किया जाता है।
- कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए बथुआ के पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं। इससे कब्ज के साथ-साथ बवासीर, तिल्ली विकार, और लिवर के विकारों में लाभ मिलता है।
- मूत्र रोग को ठीक करने के लिए बथुआ के पत्ते का रस (5 मिली) निकाल लें। इसमें मिश्री मिलाकर पिलाने से मूत्र विकार खत्म होते हैं।
- ल्यूकोरिया से पीड़ित लोग 1-2 ग्राम बथुआ के जड़ को जल या दूध में पकाएं। इसे तीन दिन तक पिएं। इससे ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
- अनार के रस, दही तथा तेल से युक्त बथुआ की सब्जी का सेवन करें। इससे दस्त में फायदा होता है।
- पेचिश में लाभ लेने के लिए बथुआ के पत्तों की सब्जी बना लें। इसमें घी मिला लें। इसका सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।
- बथुआ के पत्ते के रस को बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इससे खूनी बवासीर में फायदा होता है।
- मोच आने पर बथुआ के पत्ते को पीसकर लगाएं। इससे मोच के कारण होने वाले दर्द से आराम मिलता है।
- बथुआ के पत्ते एवं तना का काढ़ा बनाकर जोड़ों पर लगाएं। इससे जोड़ों के दर्द ठीक होते हैं।
- आग से कोई अंग जल गया है तो बथुआ के पत्ते के रस को जले हुए स्थान पर लगाएं। इससे लाभ होता है।
- साइनस में बथुआ के पत्ते और तमाखू के फूलों को पीसकर घी में मिलाकर लगाएं। इससे साइनस में फायदा होता है।
- बथुआ के शाक (सब्जी) में सेंधा नमक मिलाकर, छाछ के साथ सेवन करें। इससे रोग से लड़ने की शक्ति (रोग प्रतिरक्षा शक्ति) मजबूत होती है।

Comments
Post a Comment