बेल (wood apple)

     बेल मुख्य रुप से भारत में पाया जाने वाला एक पौधा है। आमतौर पर लोग जूस या शरबत के रुप में बेल का सेवन ज्यादा करते हैं।हिंदू धर्म में इसे एक पवित्र पौधा माना जाता है और पूजा में बेल के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधि माना गया है जो पाचन संबंधी कई बीमारियों में फायदेमंद है।  इस फल का हर हिस्सा ही सेहत के लिए के लिए गुणकारी है, बाहर से यह फल जितना ही कठोर होता है अंदर से उतना ही मुलायम और गूदेदार होता है। इसके गूदे में मौजूद बीज भी कई बीमारियों के इलाज में फायदा पहुंचाते हैं। बेल के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन और आयरन भी अधिक मात्रा में मिलते हैं। बेल के नियमित सेवन से शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

बेल के उपयोग 

  1. डायरिया और पेचिश : आधा चम्मच बेलगिरी के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें।
  2. बार बार शौच जाने की समस्या : दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर जूस बना लें और दिन में दो बार इसका सेवन करें।
  3. खून साफ करने में मदद : ताजे बेल के गूदे को निकालकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसे मैश करके खाएं।
  4. लू से बचाव : दो चम्मच बेल के गूदे को आधा गिलास पानी में मिलाकर बेल का जूस बनाएं और इस जूस का दिन में एक से दो बार सेवन करें।
  5. किडनी के लिए फायदेमंद : आधा चम्मच बेल की पत्तियों के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सेवन करें।
  6. लीवर के लिए फायदेमंद : ताजे बेल के गूदे को निकालकर रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें और सुबह उसे मैश करके खाएं।
  7. स्कर्वी : आधा से एक चम्मच बेलगिरी चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर खाएं।
  8. कान के दर्द से आराम : बिल्वादी तेल एक आयुर्वेदिक तेल है, इसकी मुख्य सामग्री बेल होती है। यह तेल कान के दर्द से आराम दिलाने में बहुत कारगर मानी जाती है।

  • अगर मल के कठोर होने के कारण आपको कब्ज़ की समस्या है तो ऐसे में बेल के सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि यह मल को सख्त बनाती है। इस वजह से आपकी कब्ज़ की समस्या और बढ़ सकती है।

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